Allegations of mining : हापुड़ में बेखौफ खनन माफिया! ददायरा-श्यामपुर के जंगल में दिन-रात मिट्टी खनन के आरोप ?

Allegations of mining : हापुड़ में बेखौफ खनन माफिया! ददायरा-श्यामपुर के जंगल में दिन-रात मिट्टी खनन के आरोप ?
Allegations of mining : हापुड़ में बेखौफ खनन माफिया! ददायरा-श्यामपुर के जंगल में दिन-रात मिट्टी खनन के आरोप ?

हापुड़।

जिले में अवैध खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी खनन का काम कथित रूप से धड़ल्ले से चलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार हापुड़ के ददायरा और श्यामपुर गांव के जंगल क्षेत्र में दिन-रात मिट्टी खनन किया जा रहा है। आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी डर के जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मिट्टी निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा डंपरों के माध्यम से उसे दूसरे स्थानों तक पहुंचा रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि दिन के साथ-साथ रात के अंधेरे में भी मिट्टी खनन का सिलसिला जारी रहता है। देर रात भारी वाहनों की आवाजाही से आसपास के ग्रामीणों की नींद प्रभावित हो रही है। कई ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी से भरे ट्रैक्टर और डंपर गांवों की सड़कों से तेज रफ्तार में गुजरते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।

ददायरा और श्यामपुर के जंगल में कथित रूप से चल रहे मिट्टी खनन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन के लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाले जाने से क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण रास्तों की स्थिति भी खराब होने का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन की गतिविधियां चल रही हैं तो संबंधित विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन का काम खुले तौर पर किया जा रहा है और इसके लिए रात का समय भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों की ओर से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण खनन गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

अवैध खनन को लेकर हापुड़ में पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार खनन से जुड़े विवादों के कारण क्षेत्र में तनाव की स्थिति भी पैदा होती रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में खनन माफियाओं से जुड़े विवाद में सतीश नामक व्यक्ति की हत्या की घटना ने भी क्षेत्र में चिंता पैदा की थी। इसके बावजूद यदि अवैध खनन की गतिविधियां दोबारा या लगातार जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं तो यह प्रशासन के लिए गंभीर विषय है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। मौके पर निरीक्षण, वाहनों की जांच और खनन क्षेत्र की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि बिना अनुमति मिट्टी निकाली जा रही है तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि खनन के लिए आवश्यक अनुमति मौजूद है तो प्रशासन को उसकी वैधता और निर्धारित नियमों के पालन की जांच करनी चाहिए।

रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मिट्टी से लदे ट्रैक्टर और डंपर तेज गति से गांवों की संकरी सड़कों से गुजरते हैं। इससे पैदल चलने वाले ग्रामीणों, बच्चों और अन्य वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के भीतर भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

Allegations of mining : हापुड़ में बेखौफ खनन माफिया! ददायरा-श्यामपुर के जंगल में दिन-रात मिट्टी खनन के आरोप ?
Allegations of mining : हापुड़ में बेखौफ खनन माफिया! ददायरा-श्यामपुर के जंगल में दिन-रात मिट्टी खनन के आरोप ?

मिट्टी खनन से जुड़े वाहनों की आवाजाही के कारण धूल उड़ने की समस्या भी सामने आने की बात ग्रामीणों ने कही है। रात के समय ट्रैक्टर और डंपरों की आवाज तथा दिन में भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित होने का आरोप है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करे तो वास्तविकता सामने आ सकती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि ददायरा और श्यामपुर के जंगल में चल रहे कथित मिट्टी खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाए कि खनन के लिए संबंधित लोगों के पास वैध अनुमति है या नहीं, कितनी मात्रा में मिट्टी निकाली जा रही है और निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। यदि जांच में अवैध खनन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रशासन को केवल शिकायत मिलने के बाद ही कार्रवाई करने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी करनी चाहिए। खनन वाले क्षेत्रों में अचानक निरीक्षण किए जाने से वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। साथ ही मिट्टी ढोने वाले वाहनों की भी जांच की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वे निर्धारित नियमों और अनुमति के अनुरूप परिवहन कर रहे हैं या नहीं।

अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राजस्व, खनन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी क्षेत्र में बिना अनुमति खनन हो रहा है तो कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई दिखाई देने पर ही खनन से जुड़े लोगों में कानून का डर पैदा होगा।

इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की जांच कराना और मौके की वास्तविक स्थिति सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि आरोप निराधार हैं तो भी जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है और यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

फिलहाल ददायरा और श्यामपुर के जंगल में कथित मिट्टी खनन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता का माहौल बताया जा रहा है। ग्रामीण चाहते हैं कि रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाए और खनन की गतिविधियों की जांच की जाए। साथ ही गांवों में तेज रफ्तार से दौड़ने वाले ट्रैक्टरों और डंपरों पर भी आवश्यक कार्रवाई की मांग की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते मामले को गंभीरता से लेकर जांच और कार्रवाई करता है तो किसी बड़ी घटना को टाला जा सकता है। वहीं अवैध खनन के आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए संबंधित विभागों की टीम द्वारा मौके का निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी है। अब देखना यह होगा कि ददायरा और श्यामपुर क्षेत्र में लगाए जा रहे अवैध मिट्टी खनन के आरोपों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाती है।

 

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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