Appointment is mandatory : सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में करियर काउंसलर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य ?

Appointment is mandatory : सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में करियर काउंसलर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

Appointment is mandatory : सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में करियर काउंसलर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य
Appointment is mandatory : सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में करियर काउंसलर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी फैसला लिया है। बोर्ड ने देशभर के सभी सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में मेंटल हेल्थ काउंसलर और करियर काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय छात्रों में बढ़ते पढ़ाई के दबाव, करियर को लेकर भ्रम, तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है।

सीबीएसई का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में केवल अकादमिक प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि छात्रों के संपूर्ण मानसिक, भावनात्मक और करियर विकास पर ध्यान देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

क्यों जरूरी हुआ यह फैसला

बीते कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि छात्र पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं, अभिभावकों की अपेक्षाओं और सामाजिक दबाव के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। कई बार छात्र गलत विषय चयन कर लेते हैं, जिससे आगे चलकर उन्हें करियर में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जैसे एंग्जायटी, डिप्रेशन, आत्महत्या के विचार आदि भी तेजी से बढ़ी हैं।

इन्हीं गंभीर मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने यह निर्णय लिया है कि अब स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलर्स की मौजूदगी अनिवार्य होगी, ताकि छात्रों को समय रहते सही मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके।

करियर काउंसलर की भूमिका

सीबीएसई के निर्देशों के अनुसार, करियर काउंसलर कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी रुचि, क्षमता, कौशल और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर सही विषय और करियर विकल्प चुनने में मदद करना होगा।

करियर काउंसलर छात्रों को निम्नलिखित विषयों पर मार्गदर्शन देंगे—

  • कक्षा 9 के बाद विषय चयन

  • कक्षा 10 के बाद स्ट्रीम (विज्ञान, वाणिज्य, कला) का चयन

  • उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्सेज की जानकारी

  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सलाह

  • वैकल्पिक और उभरते करियर विकल्पों की जानकारी

इससे छात्रों में करियर को लेकर स्पष्टता आएगी और वे अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे।

Appointment is mandatory : सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में करियर काउंसलर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य
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मेंटल हेल्थ काउंसलर की जिम्मेदारी

मेंटल हेल्थ काउंसलर छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी परामर्श देंगे। वे छात्रों की मानसिक स्थिति को समझकर उन्हें भावनात्मक सहारा प्रदान करेंगे। बोर्ड के अनुसार, काउंसलर निम्नलिखित कार्य करेंगे—

  • पढ़ाई के दबाव से जूझ रहे छात्रों की मदद

  • तनाव, चिंता और अवसाद से संबंधित समस्याओं का समाधान

  • व्यवहारिक समस्याओं की पहचान और सुधार

  • परीक्षा के डर और असफलता से उबरने में सहयोग

  • अभिभावकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना

सीबीएसई का मानना है कि यदि छात्रों को समय रहते सही मानसिक सहयोग मिले, तो वे न केवल पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, बल्कि जीवन की चुनौतियों से भी आत्मविश्वास के साथ निपट सकेंगे

अभिभावकों के लिए भी राहत

यह फैसला केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए भी राहत लेकर आया है। अक्सर माता-पिता अनजाने में बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का बोझ डाल देते हैं। मेंटल हेल्थ काउंसलर अभिभावकों को यह समझाने में मदद करेंगे कि बच्चों की मानसिक स्थिति, रुचि और क्षमता को समझना कितना जरूरी है।

इससे अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद बेहतर होगा और परिवार में सकारात्मक माहौल बनेगा।

स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ी

सीबीएसई के इस निर्णय के बाद अब स्कूलों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। सभी सीबीएसई स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे—

  • योग्य और प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति करें

  • छात्रों के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित करें

  • गोपनीयता और संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखें

  • काउंसलिंग को स्कूल संस्कृति का हिस्सा बनाएं

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यावहारिक रूप से प्रभावी बनाया जाए।

शिक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों ने सीबीएसई के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि भारत में लंबे समय से शिक्षा को केवल अंक और रैंक तक सीमित रखा गया, जबकि मानसिक स्वास्थ्य और करियर मार्गदर्शन की उपेक्षा होती रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम—

  • छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाएगा

  • ड्रॉपआउट और मानसिक समस्याओं को कम करेगा

  • शिक्षा को अधिक मानवीय और संतुलित बनाएगा

छात्रों के लिए नई उम्मीद

छात्रों के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से करियर को लेकर असमंजस में थे, लेकिन अब उन्हें सही मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

सीबीएसई का यह निर्णय भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह साफ संकेत देता है कि अब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और उज्ज्वल भविष्य पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा।

यह फैसला न केवल छात्रों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करेगा, बल्कि देश के भविष्य को भी मजबूत आधार प्रदान करेगा।
निस्संदेह, सीबीएसई का यह कदम शिक्षा जगत में एक सकारात्मक और आवश्यक पहल साबित होगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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