Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कारण ?

Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कार

Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कारण ?
Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कारण ?

पवित्र पुष्कर धाम यहूदियों के लिए मिनी इज़रायल हैं।

दुनिया भर के यहूदी जब भी भारत आएंगे वो पवित्र पुष्कर धाम जाए बगैर वापस नहीं जाएंगे। आखिर पुष्कर धाम से यहूदियों का इतना लगाव क्यों है? नई दिल्ली। पुष्कर धाम राजस्थान में हिंदुओं का एक मुख्य तीर्थस्थान है, लेकिन इसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है..विशेषकर यहूदियों में – दुनिया भर के यहूदी जब भी भारत आएंगे वो पवित्र पुष्कर धाम जाए बगैर वापस नहीं जाएंगे आखिर पुष्कर धाम से यहूदियों का इतना लगाव क्यों है?

पवित्र पुष्कर धाम के लगाव पर प्रकाश डालते हुए सीनियर सिटीज़न्स ने बताया कि इजरायल के पर्यटकों के लिए पुष्कर (राजस्थान) भारत के सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक है। इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक कारण जुड़े हुए हैं। इजरायल के हरेक नागरिक को फौजी ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है, उसके बगैर आपको किसी कॉलेज से डिग्री नहीं मिलेंगी ना ही कोई भी नौकरी या रोज़गार – हरेक को चाहे लड़के हो या फ़िर लड़कियां। तीन साल के कड़े अनुशासन और तनावपूर्ण माहौल के बाद, वे दुनिया घूमने निकलते हैं।

उन्होंने कहा कि वे ऐसी जगह की तलाश करते हैं जहाँ वे पूरी तरह से तनावमुक्त (Relax) हो सकें। पुष्कर का शांत वातावरण और झील का किनारा उन्हें वह मानसिक शांति देता है। पुष्कर में एक सक्रिय ‘चाबद हाउस’ है। यह एक ऐसा केंद्र है जहाँ इजरायली पर्यटकों को अपनी भाषा (हिब्रू) बोलने वाले लोग, यहूदी रीति-रिवाजों के अनुसार त्यौहार मनाने की सुविधा और ‘कोशर’ (Kosher) भोजन मिलता है। यह उन्हें घर से दूर घर जैसा अहसास कराता है। पुष्कर की गलियों में आपको हर जगह हिब्रू भाषा में लिखे साइनबोर्ड, इजरायली कैफे और ‘फलाफेल’ या ‘हुमस’ जैसे व्यंजन आसानी से मिल जाएंगे।

उन्होंने आगे बताया कि पवित्र पुष्कर धाम यहूदियों के लिए मिनी इज़रायल हैं। वहां के स्थानीय लोग भी काफी हद तक हिब्रू समझ लेते हैं। यह अपनापन उन्हें यहाँ खींच लाता है। पुष्कर एक पवित्र नगरी है, जहाँ मांस और शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह सात्विक और आध्यात्मिक वातावरण उन इजरायली युवाओं को बहुत आकर्षित करता है, जो शांति और आत्म-खोज (Self-discovery) की तलाश में भारत आते हैं। इसके अलावा जब इजरायल के पर्यटक अक्सर 6 महीने से एक साल तक की लंबी यात्रा पर निकलते हैं। पुष्कर उनके लिए बहुत किफायती है। यहाँ रहने और खाने का खर्च बहुत कम है, जिससे वे यहाँ हफ़्तों या महीनों तक आराम से रुक सकते हैं।

Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कारण ?
Attaccamentu psicologicu : पुष्कर धाम इजरायलियों के लिए प्रिय है, यात्रा में अनिवार्य, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक लगाव के कारण ?

उन्होंने यह भी बताया कि

हम जब दिल्ली के पहाड़गंज में रहते थे 1988 तक तब भी वहां होटलों में अधिकतर यहुदी आते और पुष्कर धाम ही जाते वो लोग थोड़ी बहुत हिंदी भी जानते थे वो तब से भारत आ रहे है। तब हम नहीं समझ पाते थे कि ये सिर्फ पुष्कर धाम ही क्यों सबसे पहले जाते है?
उन्होंने कहा पुष्कर अजमेर जिले में स्थित है और पुष्कर जाने के लिए रास्ते में थोड़ा पहाड़ जैसा रास्ता मिलता है। हरियाली पेड़ मिलते हैं वैसे वहां गर्मी बहुत होती है, जहां रेतीली मिट्टी है। अनेक छोटे बड़े मंदिर हैं। कुछ दिन रहने और छुट्टियां बताने के लिए यह एक शांत जगह है। मैं पुष्कर में अनेक बार गया हूं हिंदुओं के लिए यह बहुत पवित्र शहर है, क्योंकि ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर यही है और सरोवर झील हैं, यह बहुत पवित्र स्थान माना जाता है। दुर्भाग्य से अब यहां प्राकृतिक पानी नहीं है बल्कि ट्यूबवेल से पानी भरा जाता है।

उन्होंने बताया कि मुझे पुष्कर और वृंदावन तीर्थ एक जैसे लगते हैं, बस थोड़ा सा फर्क है पुष्कर में मिठाइयां ज्यादा चलन में है। यहां बहुत लंबे समय से हितों में डेरा बना रखा है, जो छुप छुपा कर कभी कभी नशाखोरी करते हैं लेकिन अच्छी बात है कि वह किसी को डिस्टर्ब नहीं करते ईश्वर के ध्यान में शांत रहते हैं। हर जगह कुछ ना कुछ गलत चीज होती है कोई नई बात नहीं लेक़िन श्रद्धा आस्था अपनी जगह फिर भी मजबूती से कायम रहती है, वो इन चीजों से कभी भी डिगती नहीं हैं। फ़िर भी यहूदियों का प्रिय स्थल पवित्र पुष्कर धाम हैं, और यहूदी कसोल नाम की जगह पर भी जाते है जो हिमाचल प्रदेश में स्थित है। वह ग्रामीण गोवा के धार्मिक स्थालों पर भी जाते हैं। हमारी राजस्थान सरकार से अपील हैं कि पवित्र पुष्कर धाम में पर्यटन को बढ़ाने के लिए सभी व्यवस्थाएं और बेहतर की जाएं।

आखिर में उन्होंने कहा कि हम भी पवित्र पुष्कर धाम गए थे एकबार। हमें बड़ा आश्चर्य हुआ था कि इस छोटे से गांव जैसे शहर में इतने यहूदियों का आने की वजह क्या हो सकती हैं ? लेकिन आज उसका उतर हमें मिल गया। इस महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए आप का बहुत बहुत आभार सर।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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