
पत्रकार सुरक्षा कानून –
लागू कराना संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए देशभर में बनेगी लाखों पत्रकारों की ‘न्याय सहायता टीम’ पत्रकार सब की आवाज उठाते हैं लेक़िन पत्रकारों की सुरक्षा की आवाज कोई नहीं उठता मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत ह्रदय वरिष्ठ पत्रकार इंदभान भदौरिया ने चिंता जताई कि भेदभाव और भ्रष्टाचार के कारण संकट के समय पत्रकारों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता। पत्रकार – जनता, समाज, विपक्ष और सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे रोज़ आर्थिक तंगी, असुरक्षा और भेदभाव जैसी समस्याओं से जूझते हुए दबाव में काम करते हैं। जब कोई पत्रकार मुश्किल में होता है या बीमार होता हैं, या उसका निधन हो जाता है, तब न तो संस्थान और न कोई पार्टी ना कोई नेता सामने आता हैं नाही कोई ठोस सहायता मिलती है। अक्सर देखा गया हैं कि भेदभाव और भ्रष्टाचार के कारण संकट और बीमारी में पत्रकारों के साथ कोई नहीं खड़ा होता। उन्होंने पत्रकारों को समाज का आईना बताते हुए कहा कि पत्रकार – जनता, समाज, सरकार और विपक्ष एवं नेताओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं और लोकतंत्र की आवाज को मजबूती देते हैं।
बावजूद इसके, आज पत्रकार आर्थिक तंगी, असुरक्षा भेदभाव और बढ़ते भ्रष्टाचार के माहौल से जूझ रहे हैं और कोई राजनीतिक पार्टी या नेता आवाज़ नहीं उठता हैं – सिर्फ़ सबको अपनी अपनी खबरें छपवाने से मतलब हैं बस। आज़ादी से लेकर अब तक देश में लाखों संघठन बने लेक़िन ग्रुपबाज़ी के कारण आज़ तक कोई पत्रकारों हित में सुझाव एवं समाधान नहीं निकाल पाए। देखा गया हैं जो ग्रुप बने भी हैं इन ग्रुपों में समाधान-सुझाव पर कम और बेकार की बातो पर ज़्यादा फोकस रहता हैं और ऐसे में पत्रकारहित की अनदेखी उत्पन्न होती हैं। इसी कारण पत्रकारों को अधिकार नहीं मिलते क्युकी पत्रकारों में भी एकता ही नहीं हैं यहां भी मैं बडा – मैं बडा की गंभीर समस्या हैं, अपने अपने निज़ी स्वार्थो के कारण एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। कोई बैसिक सुझाबों पर बात ही नहीं करता? इसीलिए इतनी मेहनत के बाद भी सब बेकार हो जाता हैं और पत्रकार सुरक्षा क़ानून और सम्मान की बात पीछे रह जाती हैं। वही, राजनीतिक पार्टियां एवं नेता और कुछ स्वार्थी अपने सदैव चाहते हैं की पत्रकार यूही बटे रहे और आपस में ही मैं बडा – मैं बडा की सोच में उलझें रहे और हमारी खबरें छापने रहे और हमारे पीछे पीछे भागते रहे।
अगर पत्रकार एक हो गए तो अपना हक़ (पत्रकार सुरक्षा क़ानून) मागेगे….इसीलिए रोज़-रोज़ नए-नए फ़र्ज़ी राजनीतिक मुद्दे नेताओं द्वारा पेश किए जाते हैं, देश में अब तक कितनी ही सरकारे आयी और चली गयी……., सभी ने हर महीने देश के पत्रकारों के सामने एक नया मुद्दा पेश किया और इन फ़र्ज़ी मुद्दों के शोर में पत्रकारों के हित की महत्वपूर्ण बात (पत्रकार सुरक्षा क़ानून) दब दी गयी। इसमें सबसे बड़ी कमी हमारी ही हैं कि कुछ अपना स्वार्थ साधने वालों के कारण हम में एकता नहीं हो पाती हैं इसके पीछे भी बडा कारण हैं – एक इसलिए नहीं हो पाते हैं कि हर कोई मैं बडा – मैं बडा के चककर में फसा हुआ हैं, इसीलिए ये बुरी स्तिथि अब सब के सामने हैं। हमारे यहां कहावत हैं कउआ काउये का मांस नहीं खाता लेक़िन यहां स्तिथि बहुत विचित्र हैं, मगर अब पत्रकारहित में, भेदभाव और भ्र्ष्टाचार से मुक्त सत्य, न्याय, सुरक्षा और अधिकारों के लिए अब समाधान जरूरी हैं, पत्रकारों के हित में हमारा संगठन देशभर में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर 15 अगस्त से सक्रिय रूप से अभियान चलाएगा। न्याय और सत्य के प्रतिक भगवान शिव के आशीर्वाद से “न्याय सहायता टीम” का शुभारम्भ 15 अगस्त के पावन दिन से किया जाएगा
देश के प्रत्येक जिले में 11 न्यायप्रिय पत्रकारों की एक टीम बनेगी, देश के लगभग 800 जिलों को ध्यान में रखते हुए यह संख्या लाखों तक पहुंचेगी इस संरचना के तहत हर स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और 21 सदस्यीय प्रमुख टीम का गठन भी किया जाएगा संगठन का अध्यक्ष पद एक वर्ष के लिए होगा और इसके बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराए जाएंगे यह टीम देश के हर कोने से पत्रकारों को जोड़कर एक सशक्त मंच तैयार करेगी, जिसका उद्देश्य पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें हर स्तर पर सहयोग देना होगा। टीम के सभी सदस्यों की पहचान सफ़ेद शर्ट और काली पेंट ड्रेस से होगी और इसका गठन पूरी तरह संगठित व चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा उन्होंने टीम के कार्य करने की शैली स्पष्ट करते हुए कहा कि सबसे पहले गलत को टोकना, फिर रोकना और आवश्यकता पड़ने पर शिकायत व पंचायत के माध्यम से न्याय दिलाना इस टीम का उद्देश्य होगा। देशहित में, सभी कार्य संवैधानिक दायरे में रहकर किए जाएंगे और सरकार तक समाधान के सुझाव सौंपे जाएंगे – इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्रियों, मन्त्रीयों, सांसदों, विधायकों,मेयरों, पार्टी अध्यक्षों, जिलाध्यक्षओं और सभासदों तक अभियान चलाकर ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
नई दिल्ली,संजय साग़र सिंह। पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर एक बार फिर मजबूत आवाज उठी है। मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत ह्रदय वरिष्ठ पत्रकार इंदभान भदौरिया ने देशभर में लाखों न्यायप्रेमी पत्रकारों की भेदभाव रहित सहायता टीम गठित करने का ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि – पत्रकार सुरक्षा कानून – लागू कराना संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पत्रकार सब की आवाज उठाते हैं
लेक़िन पत्रकारों की सुरक्षा की आवाज कोई नहीं उठता मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत ह्रदय वरिष्ठ पत्रकार इंदभान भदौरिया ने चिंता जताई कि भेदभाव और भ्रष्टाचार के कारण संकट के समय पत्रकारों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता हैं। पत्रकार – जनता, समाज, विपक्ष और सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे रोज़ आर्थिक तंगी, असुरक्षा और भेदभाव जैसी समस्याओं से जूझते हुए दबाव में काम करते हैं। जब कोई पत्रकार मुश्किल में होता है या बीमार होता हैं, या उसका निधन हो जाता है, तब न तो संस्थान और न कोई पार्टी ना कोई नेता सामने आता हैं नाही कोई ठोस सहायता मिलती है। अक्सर देखा गया हैं कि भेदभाव और भ्रष्टाचार के कारण संकट और बीमारी में पत्रकारों के साथ कोई नहीं खड़ा होता।
उन्होंने पत्रकारों को समाज का आईना बताते हुए कहा कि पत्रकार – जनता, समाज, सरकार और विपक्ष एवं नेताओं के बीच सेतु का कार्य करते हैं और लोकतंत्र की आवाज को मजबूती देते हैं। बावजूद इसके, आज पत्रकार आर्थिक तंगी, असुरक्षा भेदभाव और बढ़ते भ्रष्टाचार के माहौल से जूझ रहे हैं और कोई राजनीतिक पार्टी या नेता आवाज़ नहीं उठता हैं – सिर्फ़ सबको अपनी अपनी खबरें छपवाने से मतलब हैं बस। आज़ादी से लेकर अब तक देश में लाखों संघठन बने लेक़िन ग्रुपबाज़ी के कारण आज़ तक कोई पत्रकारों हित में सुझाव एवं समाधान नहीं निकाल पाए। देखा गया हैं जो ग्रुप बने भी हैं इन ग्रुपों में समाधान-सुझाव पर कम और बेकार की बातो पर ज़्यादा फोकस रहता हैं और ऐसे में पत्रकारहित की अनदेखी उत्पन्न होती हैं। इसी कारण पत्रकारों को अधिकार नहीं मिलते क्युकी पत्रकारों में भी एकता ही नहीं हैं यहां भी मैं बडा – मैं बडा की गंभीर समस्या हैं, अपने अपने निज़ी स्वार्थो के कारण एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। कोई बैसिक सुझाबों पर बात ही नहीं करता? इसीलिए इतनी मेहनत के बाद भी सब बेकार हो जाता हैं और पत्रकार सुरक्षा क़ानून और सम्मान की बात पीछे रह जाती हैं।
वही, अपना भविष्य सुरक्षित करने वाली राजनीतिक पार्टियां एवं नेता और कुछ स्वार्थी अपने सदैव चाहते हैं की पत्रकार यूही बटे रहे और आपस में ही मैं बडा – मैं बडा की सोच में उलझें रहे और हमारी खबरें छापने रहे और हमारे पीछे पीछे भागते रहे। अगर पत्रकार एक हो गए तो अपना हक़ (पत्रकार सुरक्षा क़ानून) मागेगे….इसीलिए रोज़-रोज़ नए-नए फ़र्ज़ी राजनीतिक मुद्दे नेताओं द्वारा पेश किए जाते हैं, देश में अब तक कितनी ही सरकारे आयी और चली गयी…….,सभी ने हर महीने देश के पत्रकारों के सामने एक नया मुद्दा पेश किया और इन फ़र्ज़ी मुद्दों के शोर में पत्रकारों के हित की महत्वपूर्ण बात (पत्रकार सुरक्षा क़ानून) दब दी गयी। इसमें सबसे बड़ी कमी हमारी ही हैं कि कुछ अपना स्वार्थ साधने वालों के कारण हम में एकता नहीं हो पाती हैं इसके पीछे भी बडा कारण हैं – एक इसलिए नहीं हो पाते हैं कि हर कोई मैं बडा – मैं बडा के चककर में फसा हुआ हैं, इसीलिए ये बुरी स्तिथि अब सब के सामने हैं।
हमारे यहां कहावत हैं कउआ काउये का मांस नहीं खाता लेक़िन यहां स्तिथि बहुत विचित्र हैं, मगर अब पत्रकारहित में, भेदभाव और भ्र्ष्टाचार से मुक्त – सत्य, न्याय, सुरक्षा और अधिकारों के लिए अब समाधान जरूरी हैं, पत्रकारों के हित में हमारा संगठन देशभर में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर 15 अगस्त से सक्रिय रूप से अभियान चलाएगा। न्याय और सत्य के प्रतिक भगवान शिव के आशीर्वाद से “न्याय सहायता टीम” का शुभारम्भ 15 अगस्त के पावन दिन से किया जाएगा। देश के प्रत्येक जिले में 11 न्यायप्रिय पत्रकारों की एक टीम बनेगी, देश के लगभग 800 जिलों को ध्यान में रखते हुए यह संख्या लाखों तक पहुंचेगी। इस संरचना के तहत हर स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और 21 सदस्यीय प्रमुख टीम का गठन भी किया जाएगा। संगठन का अध्यक्ष पद एक वर्ष के लिए होगा और इसके बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव कराए जाएंगे। यह टीम देश के हर कोने से पत्रकारों को जोड़कर एक सशक्त मंच तैयार करेगी, जिसका उद्देश्य पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें हर स्तर पर सहयोग देना होगा। टीम के सभी सदस्यों की पहचान सफ़ेद शर्ट और काली पेंट ड्रेस से होगी और इसका गठन पूरी तरह संगठित व चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने टीम के कार्य करने की शैली स्पष्ट करते हुए कहा कि सबसे पहले गलत को टोकना, फिर रोकना और आवश्यकता पड़ने पर शिकायत व पंचायत के माध्यम से न्याय दिलाना इस टीम का उद्देश्य होगा। देशहित में, सभी कार्य संवैधानिक दायरे में रहकर किए जाएंगे और सरकार तक समाधान के सुझाव सौंपे जाएंगे – इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्रियों, मन्त्रीयों, सांसदों, विधायकों,मेयरों, पार्टी अध्यक्षों, जिलाध्यक्षओं और सभासदों तक अभियान चलाकर ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत ह्रदय वरिष्ठ पत्रकार इंदभान भदौरिया ने साफ कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराना संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आह्वान किया कि हर पत्रकार को अपने अधिकार और सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा, तभी लोकतंत्र और अधिक सशक्त बनेगा और पत्रकारों को न्याय मिलेगा। उन्होंने पत्रकारों के हित में चल रही पहलों का जिक्र करते हुए बताया कि संगठन प्रशिक्षण शिविर, जिला सम्मेलन, पत्रकार राहत कोष, टोल टैक्स में छूट, आयुष्मान कार्ड और बीमा सुरक्षा जैसी सुविधाओं की मांग कर रहा है। इन प्रयासों से पत्रकारिता को नैतिक आधार मिलेगा और पत्रकारों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलेगा।
एक पत्रकार की ताकत उसकी कलम है, लेकिन पत्रकारों की असली ताकत उनकी एकता
उन्होंने बताया कि अब सभी के सामने मजबूती से अपनी बात रखने के लिए 15 से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, हर पत्रकार की सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान की सामूहिक बात है। हमने पहल की है, अब इसे मजबूती देना हम सभी पत्रकार साथियों की जिम्मेदारी है। पत्रकारों की एकजुटता और सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण प्रयास को मजबूत करने के लिए अपने अन्य साथी पत्रकारों को भी साथ लेकर चलना चाहिए। एक पत्रकार की ताकत उसकी कलम है, लेकिन पत्रकारों की असली ताकत उनकी एकता है। साथियों, एक विनम्र आग्रह यह अभियान किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सभी पत्रकार साथियों के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। पत्रकारों के हित और सुरक्षा को लेकर जिस पहल की शुरुआत की है। जब हम सभी पत्रकार साथी एकजुट होकर मजबूती से साथ खड़े होंगे, तभी इस पहल की आवाज पूरे देश में गूंजेगी और इसका प्रभाव दिखाई देगा। इसलिए सभी सम्मानित पत्रकार साथियों से आग्रह है कि 15 अगस्त को अपनी बात और सुझाव अवश्य दर्ज कराएं ताकि अभियान की तैयारी उसी अनुसार की जा सके। आइए, इस पहल को हम सभी मिलकर मजबूत बनाएं आपकी उपस्थिति केवल अभियान में शामिल होना नहीं, बल्कि पत्रकार एकता के साथ खड़े होने का संदेश होगी।
आखिर में उन्होंने कहा कि एकता • सम्मान • सुरक्षा पत्रकारिता – पत्रकारों की सुरक्षा पर अब सिर्फ चर्चा नहीं, एकजुट होकर दिशा तय करने का समय है। पत्रकारों की सुरक्षा एवं सम्मान समय की जरूरत वाली पहल है। 15 अगस्त को हम सब मिलकर ऐसा मजबूत पत्रकार सुरक्षा मंच तैयार करें, जहां किसी एक पत्रकार पर संकट आए तो वह खुद को अकेला महसूस न करे। हमारी ताकत किसी एक संस्था, संगठन या पद में नहीं, बल्कि हमारी एकता में है। हमारे विचारों में मनभेद और मतभेद विचारों में हो सकते हैं, लेकिन पत्रकारो की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर हमारी आवाज एक होनी चाहिए। आइए, 15 अगस्त से शुरू होने वाले अभियान में एक ऐसी मिसाल कायम करें कि देश में किसी पत्रकार को दबाने की कोशिश हो, तो उसके पीछे पूरा पत्रकार समाज बिना भेदभाव के मजबूती से खड़ा दिखाई दे। एक पत्रकार की सुरक्षा और पूरे पत्रकार समाज की जिम्मेदारी। एक पत्रकार की आवाज पूरे पत्रकार समाज की आवाज। आइए पत्रकारों के हित में एक नई शुरुआत करे – पत्रकार एकजुट रहें, सुरक्षित रहें, सम्मानित रहें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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