Blacklist it : व्यापार मंडल की मांग : नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली स्पैरो सॉफ्टटेक को तुरंत ब्लैकलिस्ट करो

जयपुर। जयपुर नगर निगम में यूडी टैक्स वसूली के नाम पर चल रहे
- ‘खेल’ के खिलाफ जयपुर व्यापार मंडल ने अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। व्यापार मंडल ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया है कि टैक्स वसूली का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड ने पिछले 6 वर्षों में अनुबंध की शर्तों का शत-प्रतिशत उल्लंघन किया है। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की पर्याय बन चुकी इस फर्म को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए और इसकी कमियों पर पर्दा डालने के लिए तैयारकिए गए नए टेंडर को निरस्त किया जाए।
- व्यापार मंडल के अनुसार, अनुबंध के अनुच्छेद 17 (Termination of Contract) की शर्तों के तहत यह फर्म पूरी तरह बर्खास्तगी की हकदार है। नगर निगम ने स्वयं 15 मार्च 2023 को पत्र संख्या 226 के माध्यम से माना था कि फर्म का प्रदर्शन न केवल असंतोषजनक है, बल्कि इसके कर्मी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े गए हैं,
जिससे निगम की साख मिट्टी में मिली है।
- इतना ही नहीं, फर्म द्वारा जानबूझकर गलत कर निर्धारण कर जनता को प्रताड़ित किया गया। निगम ने 13 दिसंबर 2021 को पत्र क्रमांक 156 के जरिए गलत बिलिंग और कम कर संग्रह के एवज में फर्म पर 1.28 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम पेनल्टी भी आरोपित की थी। बता दें कि फर्म की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण नगर निगम के गिरते राजस्व आंकड़े हैं। टेंडर के समय वर्ष 2019-20 के लिए 225 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया था,
- जिसके विरुद्ध मात्र 70 करोड़ की प्राप्ति हुई। वर्ष 2020-21 में भी 225 करोड़ के लक्ष्य के सामने केवल 72.25 करोड़ रुपए ही वसूले जा सके। इसके बाद फर्म को पेनल्टी से बचाने के लिए लक्ष्यों को घटाने का ‘खुला खेल’ शुरू हुआ। वर्ष 2021-22 में लक्ष्य घटाकर 125 करोड़ किया गया, लेकिन वसूली मात्र 45.53 करोड़ रही। 2022-23 में 114 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 57.65 करोड़ और 2023-24 में 88 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 70.03 करोड़ की प्राप्ति दिखाई गई।

हैरानी की बात यह है कि
- वर्ष 2024-25 में 111 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 104.02 करोड़ की वसूली का दावा किया गया है, लेकिन व्यापार मंडल का आरोप है कि इसमें से 50% राशि केवल मार्च महीने में जेडीए और आरसीए जैसे सरकारी विभागों से कागजी तौर पर दिखाई गई है, जबकि पोर्टल पर आरसीए के बिल अब भी लंबित बोल रहे हैं। 6 वर्षों के औसत को देखें तो आय की उपलब्धि कुल लक्ष्य का मात्र 33 प्रतिशत ही रही है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर तकनीकी धोखाः
- व्यापारियों का कहना है कि जीआईएस (GIS) तकनीक के नाम पर करोड़ों रुपए डकारने के बावजूद पारदर्शिता शून्य है। फर्म को मार्च 2021 तक 6 लाख संपत्तियों का डिजिटल सर्वे पूरा करना था, लेकिन उसने बिना सर्वे किए ही 2005 के पुराने डेटा के आधार पर नोटिस जारी कर दिए। आज भी जयपुर का यूडी टैक्स पोर्टल इतना पिछड़ा है कि उस पर संपत्ति की फोटो या लोकेशन तक दिखाई नहीं देती। व्यापारियों का आरोप है कि फर्म जानबूझकर गलत नोटिस भेजती है ताकि बाद में कैंप लगाकर निगम कर्मियों से ही काम करवाया जाए और फर्म बिना कुछ किए अपना 10 प्रतिशत हिस्सा वसूल सके।
नए टेंडर में साठगांठ होने की आशंकाः
- व्यापार मंडल ने सवाल उठाया है कि जब फर्म का कार्य संतोषजनक नहीं था, तो उसे कार्यकाल विस्तार देने के बजाय नया टेंडर इस तरह क्यों तैयार किया गया कि फिर से इसी फर्म को लाभ मिले? व्यापारियों का दावा है कि नए टेंडर की शर्तें कूट रचित तरीके से ऐसी बनाई गई हैं जिससे स्पैरो सॉफ्टटेक को 100 में से 100 अंक मिलें। यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की बजट घोषणा और स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खरा के सरलीकरण के आदेशों की अवहेलना है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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