
हापुड़, 03 नवंबर 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं एवं ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत ग्राम सभा चितौली में दो दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन ग्राम प्रधान पिंकी बाना ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल लाभार्थियों को लेखन सामग्री वितरित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया गया। साथ ही उन्हें स्वयं की खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य श्री रमेश चंद्र, श्री प्रवेंदर कुमार, सेवानिवृत्त प्रभारी रूपकिशोर शर्मा तथा प्रभारी हापुड़ श्री विजेंद्र सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान योजना के उद्देश्यों, पात्रता और इसके अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उपस्थित अतिथियों ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में खाद्य प्रसंस्करण का क्षेत्र स्वरोजगार और रोजगार सृजन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित होने वाली कृषि उपज एवं अन्य खाद्य सामग्री का प्रसंस्करण करके बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाकर बनें आत्मनिर्भर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रभारी हापुड़ श्री विजेंद्र सिंह ने ग्रामीणों को मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित छोटे एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें। ग्रामीण क्षेत्र के इच्छुक लाभार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपनी इकाई स्थापित कर स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि गांवों में कृषि उत्पादों की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में रहती है। यदि इन उत्पादों का उचित तरीके से प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन किया जाए तो ग्रामीणों के लिए अच्छी आमदनी के अवसर विकसित हो सकते हैं। खाद्य प्रसंस्करण के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने, उन्हें सुरक्षित रखने और बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसके माध्यम से ग्रामीण युवा अपने गांव में ही रोजगार शुरू कर सकते हैं और दूसरे लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।
पात्र लाभार्थियों को मिलेगा एक लाख रुपये तक अनुदान
श्री विजेंद्र सिंह ने योजना की आर्थिक सहायता के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने वाले पात्र लाभार्थियों को एक लाख रुपये तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। इससे इच्छुक ग्रामीणों को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक सहायता मिल सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों को योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ग्रामीणों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका सही उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान दे सकता है। सरकार की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिक से अधिक लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर छोटे उद्योगों की स्थापना करें और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएं।

दो दिवसीय प्रशिक्षण में दी जाएंगी उपयोगी जानकारियां
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों, उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया, छोटे उद्योगों की स्थापना तथा स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करके खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री भी वितरित की गई, ताकि वे प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली जानकारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें और भविष्य में उनका उपयोग कर सकें। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को केवल योजना की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक समझ और प्रोत्साहन प्रदान करना भी है।
ग्रामीणों से योजना का लाभ उठाने की अपील
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं और संसाधनों की कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसरों का लाभ उठाने की है। खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र में छोटे स्तर से शुरुआत करके भी व्यक्ति अपना व्यवसाय स्थापित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं को नौकरी के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने गांव में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर रोजगार के विकल्प तलाशने चाहिए। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का व्यावहारिक उपयोग कर वे भविष्य में अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बना सकते हैं।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान पिंकी बाना, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रमेश चंद्र, प्रवेंदर कुमार, सेवानिवृत्त प्रभारी रूपकिशोर शर्मा, प्रभारी हापुड़ विजेंद्र सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का संदेश दिया गया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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