Committee approval : जौनपुर में मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की समीक्षा, 97 आवेदनों की कार्ययोजना को जिला समिति की मंजूरी

जौनपुर, 02 जुलाई। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राज्य सेक्टर की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा हेतु जिला स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पात्र एवं अपात्र आवेदनों पर विचार-विमर्श किया गया तथा योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की वर्तमान प्रगति, प्राप्त आवेदनों की स्थिति तथा प्रस्तावित कार्ययोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने बताया कि योजना के अंतर्गत विभिन्न मदों में प्राप्त आवेदनों का तकनीकी एवं प्रशासनिक परीक्षण किया गया है, जिसके आधार पर पात्रता का निर्धारण किया गया।
समीक्षा के दौरान समिति के समक्ष कुल 97 आवेदन प्रस्तुत किए गए। इन आवेदनों के आधार पर लगभग 70.056 लाख रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई, जिस पर विस्तृत चर्चा के बाद जिला स्तरीय समिति ने सर्वसम्मति से अनुमोदन प्रदान किया। समिति ने यह सुनिश्चित करने पर भी बल दिया कि योजना का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों को ही निर्धारित मानकों एवं शासन की गाइडलाइन के अनुसार उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करना, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना तथा मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना है। उन्होंने कहा कि कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है और यह क्षेत्र रोजगार तथा स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं प्रदान करता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। पात्र लाभार्थियों के चयन में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। सभी आवेदन शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप जांचे जाएं और केवल पात्र आवेदकों को ही योजना का लाभ दिया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की मंशा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए संबंधित अधिकारी गांव-गांव जाकर मत्स्य पालकों को योजना की जानकारी दें तथा उन्हें आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, अनुदान एवं अन्य सुविधाओं के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में कोई भी पात्र मत्स्य पालक योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिले में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग किया जाए। वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन, तालाबों का बेहतर प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता तथा तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। इससे मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी और जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। मत्स्य पालन ऐसा क्षेत्र है जिसमें अपेक्षाकृत कम लागत में अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यदि इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो वे इस क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकते हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। लाभार्थियों को समय पर स्वीकृति, अनुदान एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि परियोजनाओं का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा हो सके। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजना से संबंधित सभी अभिलेख अद्यतन रखे जाएं तथा कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे और प्रत्येक चरण में शासन के दिशा-निर्देशों का अनुपालन हो।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने मत्स्य पालन क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने के संबंध में भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। समिति के सदस्यों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि योजनाओं के बेहतर प्रचार-प्रसार से अधिकाधिक मत्स्य पालक इनका लाभ उठा सकेंगे और जिले में मत्स्य उत्पादन को नई गति मिलेगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि मत्स्य पालन केवल आय का साधन ही नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा और ग्रामीण विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकार द्वारा इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इन योजनाओं का लाभ समय पर और सही लाभार्थियों तक पहुंचे।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे विभागीय समन्वय के साथ कार्य करते हुए मत्स्य पालकों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के माध्यम से मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बैठक में जिला विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि, उप निदेशक मत्स्य वाराणसी, मत्स्य विभाग के अधिकारी तथा जिला स्तरीय समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सहयोग एवं समन्वय बनाए रखने का आश्वासन दिया।
बैठक के अंत में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य जौनपुर ने जिलाधिकारी सहित सभी अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं संबंधित विभागों के सहयोग से मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे जिले के अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा तथा मत्स्य उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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