Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत ?

Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत

Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत
Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत

1.4 अरब से अधिक की आबादी वाला भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। यहां की बड़ी जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है, और डिजिटल क्रांति के कारण इंटरनेट तथा सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे परिदृश्य में यह चर्चा तेज हो गई है कि भारत सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या कड़े नियमन पर विचार कर रही है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही यह जानकारी न केवल अभिभावकों बल्कि शिक्षाविदों, मनोवैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं के बीच गंभीर विमर्श का विषय बन गई है।

भारत में स्मार्टफोन और सस्ते डेटा की उपलब्धता ने डिजिटल पहुंच को अत्यंत आसान बना दिया है। Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) की विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या करोड़ों में है, जिनमें बड़ी संख्या किशोरों और बच्चों की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Instagram, Facebook, YouTube और Snapchat बच्चों और किशोरों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर वे न केवल मनोरंजन प्राप्त करते हैं, बल्कि अपनी अभिव्यक्ति, मित्रता और पहचान का निर्माण भी करते हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया के लाभों के साथ-साथ इसके दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि कम उम्र में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अवसाद, चिंता, आत्म-सम्मान में कमी, साइबर बुलिंग और स्क्रीन की लत जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। कई मामलों में बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटक जाता है और उनकी सामाजिक एवं पारिवारिक सहभागिता भी प्रभावित होती है। ऐसे में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध या सख्त आयु-सीमा लागू करने का विचार एक निवारक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विश्व के अन्य देशों में भी इस दिशा में पहल की गई है। उदाहरण के लिए, Australia ने हाल के वर्षों में नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कड़े कानूनों पर चर्चा की है। United Kingdom में ऑनलाइन सेफ्टी बिल के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इसी प्रकार United States में भी बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता की सुरक्षा के लिए COPPA (Children’s Online Privacy Protection Act) जैसे कानून लागू हैं। भारत भी इन वैश्विक प्रयासों को ध्यान में रखते हुए अपने स्तर पर नीति-निर्माण पर विचार कर सकता है।

Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत
Considering a ban : भारत 16 वर्ष से कम बच्चों हेतु सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचाररत

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े नियमों को Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) द्वारा समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। यदि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध या अभिभावक की अनिवार्य सहमति जैसी व्यवस्था लागू की जाती है, तो इसके लिए तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना होगा। आयु सत्यापन (Age Verification) की विश्वसनीय प्रणाली विकसित करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश प्लेटफॉर्म केवल स्व-घोषित आयु (self-declared age) पर निर्भर करते हैं।

इस प्रस्ताव के समर्थन में तर्क देने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल खतरों से बचाने में सहायक होगा। वे मानते हैं कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों की भावनात्मक और मानसिक परिपक्वता पूर्ण रूप से विकसित नहीं होती, जिससे वे ऑनलाइन जोखिमों को सही ढंग से समझ नहीं पाते। फर्जी खबरें, अनुचित सामग्री, ऑनलाइन शोषण और डेटा गोपनीयता के उल्लंघन जैसे खतरे उन्हें अधिक प्रभावित कर सकते हैं।

वहीं, इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले कुछ शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों का तर्क है कि पूर्ण प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं होगा। उनका मानना है कि डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) को बढ़ावा देना अधिक प्रभावी समाधान हो सकता है। यदि बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, गोपनीयता सेटिंग्स और ऑनलाइन व्यवहार के बारे में सही मार्गदर्शन दिया जाए, तो वे सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आज शिक्षा, रचनात्मकता और कौशल विकास के लिए भी सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

इस बहस का एक महत्वपूर्ण पहलू अभिभावकों की भूमिका भी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखने के साथ-साथ उनसे खुलकर संवाद करना चाहिए। केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है, बल्कि संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। स्कूलों में भी साइबर सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता से संबंधित पाठ्यक्रम शामिल किए जा सकते हैं।

भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल देश में किसी भी नीति को लागू करना चुनौतीपूर्ण होता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुंच और जागरूकता में अंतर है। ऐसे में यदि सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध या कड़े नियमन का निर्णय लेती है, तो उसे चरणबद्ध और व्यावहारिक तरीके से लागू करना होगा। साथ ही, तकनीकी कंपनियों के साथ समन्वय और स्पष्ट दिशानिर्देश भी आवश्यक होंगे।

अंततः, 1.4 अरब की आबादी वाले भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है। सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध, आंशिक प्रतिबंध, अभिभावकीय सहमति या कड़े आयु सत्यापन—इनमें से कौन सा विकल्प अपनाया जाएगा, यह भविष्य की नीति पर निर्भर करेगा। परंतु यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की मांग है। संतुलित, व्यावहारिक और समावेशी नीति के माध्यम से ही भारत अपने युवाओं को सुरक्षित और सशक्त डिजिटल भविष्य प्रदान कर सकता है।’

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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