Contributions of Education : सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसेवा और शिक्षा के योगदान को किया याद ?

Contributions of Education : सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसेवा और शिक्षा के योगदान को किया याद
Contributions of Education : सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसेवा और शिक्षा के योगदान को किया याद

प्रयागराज। जनसेवा, समाजसेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्वर्गीय सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज, जमुनीपुर के परिसर में भावभीना श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, क्षेत्रवासी, शुभचिंतक और उनके परिचित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया। पुण्यतिथि के अवसर पर उनके निवास स्थान पर भी श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। क्षेत्र के लोगों ने उनके साथ बिताए समय और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद करते हुए कहा कि सुरेंद्र श्रीवास्तव का जीवन सेवा, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से ओत-प्रोत रहा। उनके निधन के वर्षों बाद भी क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी स्मृतियां जीवंत हैं और उनके कार्यों को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

स्वर्गीय सुरेंद्र श्रीवास्तव प्रयागराज के जमुनीपुर ग्राम के निवासी थे। अपने क्षेत्र के लोगों के साथ उनका आत्मीय और सहज संबंध रहा। क्षेत्रवासियों ने उन्हें सदैव सम्मान और स्नेह दिया, वहीं उन्होंने भी अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए लोगों की सहायता और सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहने का प्रयास किया। जनसेवा को उन्होंने केवल सामाजिक दायित्व के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को समझना, उनकी सहायता करना और सामाजिक कार्यों में आगे बढ़कर सहभागिता करना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा। यही कारण था कि उन्हें क्षेत्र में एक जनसेवक और समाजसेवक के रूप में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। उनके व्यवहार में सहजता और सरलता थी, जिसके कारण समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उनसे आसानी से जुड़ते थे। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में लोगों के बीच आपसी सहयोग, भाईचारे और सद्भाव की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया।

सुरेंद्र श्रीवास्तव का जीवन जनसेवा, समाजसेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। वह सरल, सहज, सहयोगी और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। उनसे मिलने वाला व्यक्ति उनके व्यवहार में अपनापन महसूस करता था। उन्होंने अपने सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया। अपने परिवार को एक सूत्र में बांधकर रखना उनके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषता रही। परिवार के सदस्यों के साथ उनके आत्मीय संबंध रहे और उन्होंने हमेशा परिवार की एकता एवं आपसी सहयोग को महत्व दिया। यही कारण है कि आज भी उनके परिवार के सदस्य और परिचित उनके जीवन मूल्यों को याद करते हैं। उनके व्यक्तित्व का प्रभाव केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज और क्षेत्र के लोगों के बीच भी उनकी अपनी एक अलग पहचान बनी रही।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सुरेंद्र श्रीवास्तव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज, जमुनीपुर से उनका विशेष जुड़ाव रहा और विद्यालय के प्रबंधक के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए। उन्होंने विद्यालय के विकास और शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए। विद्यालय से जुड़े शिक्षक, कर्मचारी, अभिभावक और छात्र-छात्राएं आज भी उनके योगदान को सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उनके लिए शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित विषय नहीं थी, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम थी। उनका मानना था कि बेहतर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है और समाज को नई दिशा दी जा सकती है।

पुण्यतिथि के अवसर पर मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के लोगों ने स्वर्गीय सुरेंद्र श्रीवास्तव के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान की चर्चा की। शिक्षकों ने कहा कि विद्यालय के विकास में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने विद्यालय से जुड़े लोगों के साथ हमेशा सहयोगात्मक व्यवहार किया और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप कार्य किया। विद्यालय के कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने भी उन्हें श्रद्धा के साथ याद किया। विद्यार्थियों ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत होता है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से दूसरों के लिए उपयोगी बनने का प्रयास किया।

Contributions of Education : सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसेवा और शिक्षा के योगदान को किया याद
Contributions of Education : सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसेवा और शिक्षा के योगदान को किया याद

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए उसके कार्यों से निर्धारित होता है। सुरेंद्र श्रीवास्तव ने अपने जीवन में लोगों की सहायता और समाज की सेवा को महत्व दिया। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आठवीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उपस्थित लोगों ने कहा कि उनके द्वारा किए गए जनसेवा और समाजसेवा के कार्य आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सुरेंद्र श्रीवास्तव आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, व्यवहार और समाज के प्रति उनका योगदान लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

उनकी पुण्यतिथि पर उनके निवास स्थान पर भी बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी, शुभचिंतक, रिश्तेदार और परिचित पहुंचे। लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान अनेक लोगों ने उनके साथ बिताए आत्मीय पलों को याद किया। क्षेत्रवासियों ने कहा कि सुरेंद्र श्रीवास्तव का स्वभाव बेहद सरल और सहयोगी था। जब भी किसी व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता होती थी, वह अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने के लिए तत्पर रहते थे। लोगों के सुख-दुख में शामिल होना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भाग लेना उनके जीवन का हिस्सा रहा। उनके इसी व्यवहार के कारण उनके जाने के बाद भी क्षेत्र के लोगों के बीच उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता बनी हुई है।

परिजनों एवं शुभचिंतकों ने कहा कि सुरेंद्र श्रीवास्तव ने परिवार और समाज दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उन्होंने अपने जीवन में रिश्तों की अहमियत को समझा और लोगों के साथ मधुर संबंध बनाए। उनका मानना था कि समाज तभी मजबूत बन सकता है, जब लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े हों। उन्होंने परिवार को एकजुट रखने के साथ ही सामाजिक स्तर पर भी लोगों को जोड़ने का कार्य किया। उनके जीवन की यही विशेषता उन्हें अन्य लोगों से अलग पहचान देती थी।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान को विशेष रूप से याद किया। वक्ताओं ने कहा कि किसी शिक्षण संस्था के विकास में प्रबंधक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और सुरेंद्र श्रीवास्तव ने अपने कार्यकाल में इस जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाया। विद्यालय के शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाने, विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके प्रयासों को आज भी याद किया जाता है। उनके योगदान से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी उनकी कार्यशैली को सम्मानपूर्वक स्मरण करते हैं।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि समाज में ऐसे व्यक्तित्वों की स्मृति को जीवित रखना आवश्यक है, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा जनहित में लगाया। पुण्यतिथि जैसे अवसर नई पीढ़ी को ऐसे लोगों के जीवन और उनके कार्यों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करते हैं। उपस्थित लोगों ने कहा कि सुरेंद्र श्रीवास्तव के जीवन से सेवा, सहयोग, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरणा ली जा सकती है। उन्होंने जिस प्रकार शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अनुकरणीय है।

स्वर्गीय सुरेंद्र श्रीवास्तव की आठवीं पुण्यतिथि पर विद्यालय परिवार, क्षेत्रवासियों, परिजनों और उनके शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को याद किया। लोगों ने कहा कि उनका जीवन समाज के लिए समर्पित रहा और उनके द्वारा किए गए कार्य उनकी स्मृति को हमेशा जीवित रखेंगे। उपस्थित लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने तथा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही ईश्वर से उनके परिवार एवं शुभचिंतकों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। श्रद्धांजलि कार्यक्रम भावुक वातावरण में संपन्न हुआ, जहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने स्वर्गीय सुरेंद्र श्रीवास्तव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान को नमन किया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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