
दमोह।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रमपुरा में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण बुधवार को दमोह कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए पंचायत में हुए विभिन्न विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई विकास कार्यों के लिए सरकारी राशि का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन संबंधित कार्य या तो पूरे नहीं किए गए या फिर अत्यंत घटिया गुणवत्ता के साथ किए गए।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि ग्राम पंचायत रमपुरा में वर्ष 2024-25 के दौरान सीसी सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का भुगतान कर लिया गया, लेकिन संबंधित निर्माण कार्य धरातल पर पूरा नहीं हुआ। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन मौके पर जाकर निरीक्षण करे तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना पंचायत की जिम्मेदारी है, लेकिन उनके गांव में कई योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सभी विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और यह जांच की जाए कि जिन कार्यों के लिए राशि खर्च दिखाई गई है, वे वास्तव में किए गए हैं या नहीं।
ज्ञापन में ग्राम पंचायत रमपुरा के तालाब गहरीकरण कार्य का भी उल्लेख किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तालाब गहरीकरण के नाम पर भी अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि इस कार्य में सरकारी धन का उपयोग किस प्रकार किया गया, इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच होगी तो वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो सकेगी।
ग्रामीणों ने हनुमान मंदिर परिसर में हैंडपंप नहीं लगाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से पेयजल की आवश्यकता है, लेकिन हैंडपंप लगाने का कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया। इससे स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की।
इसके अलावा ग्रामीणों ने गांव में नीम के चबूतरे से कराए गए सीसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया गया और उसमें निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तो गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आ सकती हैं।

कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आग्रह किया कि पंचायत में कराए गए सभी विकास कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना है, लेकिन यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताएं होती हैं तो उसका सीधा नुकसान गांव के लोगों को उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकारी धन जनता के हित में खर्च किया जाना चाहिए। यदि किसी कार्य के लिए राशि स्वीकृत होती है तो उसका उपयोग पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें दोबारा सामने न आएं।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और जल्द ही संबंधित अधिकारियों की टीम गांव पहुंचकर मौके का निरीक्षण करेगी। उनका कहना है कि जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय या निर्माण संबंधी अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विकास योजनाओं का लाभ तभी लोगों तक पहुंच सकता है, जब उनका क्रियान्वयन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा और गांव में लंबित विकास कार्यों को भी शीघ्र पूरा कराया जाएगा।
कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गांव के विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो और ग्रामीणों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
फिलहाल प्रशासन की ओर से शिकायत प्राप्त होने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है। जांच में संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, तकनीकी रिपोर्ट और स्थल निरीक्षण के आधार पर तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो प्रशासन उसी के अनुरूप अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
ग्राम पंचायत रमपुरा से जुड़ा यह मामला ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाता है। अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और गांव के विकास कार्यों को लेकर क्या निर्णय लिए जाते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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