
नई दिल्ली। आध्यात्मिक संत नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कम बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने शुरुआत में अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार के बाद दर्शकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की और अब इसकी कमाई लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। रिपोर्टों के अनुसार फिल्म ने भारत में करीब 132 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन पार कर लिया है। फिल्म की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसके पीछे किसी बड़े स्टार या भारी-भरकम बजट के बजाय आस्था, कहानी और दर्शकों की प्रतिक्रिया को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर की कहानी भी फिल्म की सफलता से कम दिलचस्प नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक 21 वर्षीय अनुप्रिया ने फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखने से पहले अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और विदेश में भी रहीं। उन्होंने फिल्म को लेकर अपनी व्यक्तिगत रुचि और आध्यात्मिक जुड़ाव को महत्व दिया। फिल्म की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह नीम करौली बाबा से प्रेरित आध्यात्मिक कहानी है और इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी तक भक्ति, सेवा और प्रेम का संदेश पहुंचाना है।
अनुप्रिया के अनुसार फिल्म बनाने की प्रेरणा उनके लिए अचानक आई। उन्होंने बताया कि उन्हें बाबा से जुड़ा एक आध्यात्मिक संकेत महसूस हुआ और इसके बाद उन्होंने इस परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उनके लिए यह केवल फिल्म बनाने का व्यावसायिक निर्णय नहीं था, बल्कि एक ऐसी कहानी को पर्दे पर लाने का प्रयास था, जिससे वह स्वयं गहराई से प्रभावित हुई थीं।
रिपोर्टों के अनुसार अनुप्रिया ने विदेश में अपने करियर के दौरान इस विषय में रुचि विकसित की। उनकी कहानी में स्टीव जॉब्स का संदर्भ भी सामने आता है। नीम करौली बाबा के प्रति स्टीव जॉब्स की श्रद्धा के बारे में पढ़ने के बाद अनुप्रिया की जिज्ञासा बढ़ी और उन्होंने बाबा के जीवन तथा उनकी शिक्षाओं के बारे में अध्ययन शुरू किया। धीरे-धीरे यह रुचि एक फिल्म परियोजना में बदल गई।
फिल्म की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ‘हनुमान अंश’ किसी पारंपरिक जीवनी के रूप में नहीं बनाई गई है, बल्कि यह बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित कहानी है। इसमें एक युवा साधक की यात्रा को केंद्र में रखा गया है, जो भगवान राम की तलाश से शुरू होकर सेवा और भक्ति के मार्ग तक पहुंचती है। फिल्म में नीम करौली बाबा की शिक्षाओं और उनके आध्यात्मिक प्रभाव को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
फिल्म की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका दर्शकों की प्रतिक्रिया की रही। शुरुआती दौर में फिल्म को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच इसकी चर्चा बढ़ती गई। इसे ‘माउथ पब्लिसिटी’ का फायदा मिला और सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी। यही कारण है कि फिल्म ने शुरुआती उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया।
अनुप्रिया की अपनी यात्रा भी इस सफलता का अहम हिस्सा है। उन्होंने जिस फिल्म में निवेश किया, उसके बारे में शुरुआत में उन्हें भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कहानी और विषय पर भरोसा बनाए रखा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपनी उपलब्ध पूंजी का बड़ा हिस्सा इस परियोजना में लगाया। यही वजह है कि फिल्म का सफल होना उनके लिए आर्थिक उपलब्धि के साथ-साथ व्यक्तिगत विश्वास की जीत भी माना जा रहा है।

अनुप्रिया ने हाल में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर का दौरा भी किया, जिसे नीम करौली बाबा के जन्म और शुरुआती जीवन से जोड़ा जाता है। उन्होंने वहां बाबा से जुड़े स्थानों को देखा और अपनी यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि अकबरपुर जैसे स्थान, जिनका संबंध इतनी बड़ी आध्यात्मिक शख्सियत से रहा है, वहां विकास की संभावनाएं अभी भी काफी हैं।
अनुप्रिया ने वहां मौजूद एक नीम के पेड़ से जुड़ा अपना भावनात्मक अनुभव भी साझा किया। उनके अनुसार यह मान्यता है कि पेड़ बाबा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने उस पेड़ को छुआ तो उन्हें ऐसा भाव आया जैसे वह बाबा के करीब पहुंच गई हों। यह अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और आध्यात्मिक रहा। उनके इस बयान को फिल्म के प्रति उनके व्यक्तिगत जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
फिल्म की कहानी में नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा को केंद्रीय महत्व दिया गया है। बाबा को देश-विदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मानते हैं। उत्तराखंड का कैंची धाम भी उनके प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। फिल्म ने इसी व्यापक आध्यात्मिक प्रभाव को युवा दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है।
फिल्म के निर्माण की खास बात इसका सीमित बजट भी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार फिल्म करीब दो करोड़ रुपये से कम के बजट में बनाई गई थी। ऐसे में 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई तक पहुंचना इसके निर्माताओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया। बाद की रिपोर्टों में फिल्म की कमाई 132 करोड़ रुपये से भी आगे बताई गई है, जबकि कुछ ट्रेड रिपोर्टों में अलग-अलग तारीखों पर अलग आंकड़े सामने आए हैं।
फिल्म की सफलता ने यह भी दिखाया है कि दर्शकों के बीच आध्यात्मिक और भारतीय संस्कृति से जुड़ी कहानियों के लिए जगह मौजूद है। हालांकि किसी फिल्म की सफलता कई कारणों पर निर्भर करती है, लेकिन ‘हनुमान अंश’ के मामले में कहानी के विषय, दर्शकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया और लगातार बढ़ी चर्चा ने इसके प्रदर्शन को मजबूत करने में भूमिका निभाई।
अनुप्रिया नागर के लिए यह परियोजना अब केवल एक फिल्म नहीं रह गई है। एक युवा निर्माता के रूप में उन्होंने कम बजट और सीमित संसाधनों के बावजूद एक आध्यात्मिक विषय को बड़े पर्दे तक पहुंचाया। फिल्म की सफलता के बाद उनकी पहचान भी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार वह आगे भी इस कहानी को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की योजना पर विचार कर रही हैं।
‘हनुमान अंश’ की कहानी और अनुप्रिया नागर की यात्रा इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई है कि किसी परियोजना के पीछे व्यक्तिगत विश्वास और लगातार प्रयास हो तो वह दर्शकों तक पहुंच सकती है। लंदन में करियर से लेकर फिल्म निर्माण तक का उनका सफर और अपनी पूंजी को इस परियोजना में लगाने का फैसला अब फिल्म की सफलता के साथ चर्चा में है। वहीं बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की बढ़ती कमाई ने इसे इस साल की चर्चित कम बजट वाली फिल्मों में शामिल कर दिया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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