Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट ?

Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट

Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट
Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट

फतेहपुर के बिंदकी कोतवाली क्षेत्र में अवैध नशे के कारोबार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में खुलेआम गांजा बिक्री हो रही है, जिससे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह स्थिति न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि समाज में बढ़ते नशे के खतरे को भी उजागर करती है।

बताया जा रहा है कि ललौली चौराहा स्थित “लाल मार्केट” और जोनिहा चौकी के पास एक चाय की दुकान को कथित रूप से अवैध गांजा बिक्री का केंद्र बनाया गया है। यह दुकान मुख्य मार्ग पर स्थित होने के बावजूद लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां सुबह से लेकर देर रात तक अवैध गतिविधियां बेरोकटोक चलती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस की सुस्ती के कारण नशा कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। इस वजह से क्षेत्र में अपराध और असामाजिक गतिविधियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण की भी चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह बात तेजी से फैल रही है कि कथित रूप से कुछ जुगलबंदी के सहारे यह कारोबार चल रहा है। इसी कारण पुलिस कार्रवाई को लेकर संदेह और बढ़ गया है।

लोगों का कहना है कि यह स्थिति केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक ढांचे को भी प्रभावित कर रही है। युवाओं में नशे की लत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। कई अभिभावकों ने चिंता जताई है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो आने वाली पीढ़ी पर इसका बुरा असर पड़ेगा।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। उनका कहना है कि यदि पुलिस ईमानदारी से कार्रवाई करे, तो इस अवैध कारोबार को एक दिन में रोका जा सकता है। लेकिन अब तक की स्थिति निराशाजनक रही है।

इस मामले में यह भी चर्चा है कि संबंधित स्थान पर किसी तरह की निगरानी या नियमित जांच नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस गश्त केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर नशे का कारोबार बढ़ता जा रहा है।

Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट
Crisis in the System : बिंदकी में नशे के कारोबार पर सवाल, खुलेआम गांजा बिक्री से कानून व्यवस्था पर संकट

नशे के इस बढ़ते नेटवर्क को लेकर सोशल मीडिया पर भी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब प्रशासनिक व्यवस्था इतनी पास मौजूद है, तो फिर इस तरह की गतिविधियां कैसे चल रही हैं। यह सवाल सीधे तौर पर कानून व्यवस्था की प्रभावशीलता पर चोट करता है।

कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि जल्द ही इस पूरे मामले से जुड़े वीडियो और सबूत सार्वजनिक हो सकते हैं। इसके बाद यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। स्थानीय स्तर पर लोग लिखित शिकायत की तैयारी भी कर रहे हैं, ताकि उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाया जा सके।

क्षेत्र में एक कहावत भी चर्चा में है, जो स्थानीय लोगों के गुस्से और निराशा को दर्शाती है—“हमरे सैंया भइल कोतवाल, तो हमरा डर केहू का।” यह कथन दर्शाता है कि लोगों का पुलिस व्यवस्था से भरोसा कमजोर होता जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बार-बार जीरो टॉलरेंस और अपराध मुक्त प्रदेश की नीति की बात की जाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रही ऐसी घटनाएं इन नीतियों की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करे, तो नशे के इस कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति और निष्पक्षता जरूरी है। केवल बयानबाजी से स्थिति नहीं सुधर सकती।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि नशे का कारोबार केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती भी है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में और गंभीर हो सकता है।

अंततः यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि कानून का डर यदि कमजोर हुआ, तो समाज में अराजकता बढ़ सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या संबंधित विभाग इस पर ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह अनदेखा रह जाता है।

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