Decision set aside : राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं : भगवान राम को काल्पनिक बताने के मामले में वाराणसी कोर्ट में दोबारा होगी सुनवाई, लोअर कोर्ट का फैसला रद्द

वाराणसी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भगवान श्रीराम पर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में वाराणसी कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी। MP-MLA की सीनियर कोर्ट (अपर जिला जज) ने निचली अदालत (लोअर कोर्ट) के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इस याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना गया था। अपर जिला जज (ADJ) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने मामले को वापस लोअर कोर्ट भेजते हुए नए सिरे से सुनवाई करने के आदेश जारी किए हैं। सीनियर एडवोकेट हरिशंकर पांडेय ने पिछले साल 12 मई को राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया है:
विवादित बयान का स्थान: राहुल गांधी 21 अप्रैल, 2025 को अमेरिका के बोस्टन गए थे, जहाँ उन्होंने ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ एक सत्र में हिस्सा लिया था।
आरोप: आरोप है कि इस सत्र के दौरान राहुल गांधी ने भगवान श्रीराम को ‘पौराणिक’ (माइथोलॉजिकल) बताया था और उस युग की कहानियों को ‘काल्पनिक’ कहा था।
याचिकाकर्ता का तर्क: याचिकाकर्ता का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार सनातन धर्म के प्रतीकों पर इस तरह के बयान देकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं।

दोषी पाए जाने पर हो सकती है 5 साल की सजा
याचिकाकर्ता व सीनियर एडवोकेट हरिशंकर पांडेय के अनुसार, कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस मामले में सुनवाई का पूरा आधार बनता है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 और 4 के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है। ये धाराएं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े गंभीर अपराधों के अंतर्गत आती हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान है।
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में क्या कहा था?
यूनिवर्सिटी के इस सत्र में जब राहुल गांधी से हिंदू राष्ट्रवाद के दौर में धर्मनिरपेक्ष राजनीति और महात्मा गांधी के विचारों को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने कहा था— “बुद्ध, गुरु नानक, गांधी और अंबेडकर जैसे भारत के सभी महान सुधारक बिना किसी भेदभाव के रहे। वे दयालु और सहिष्णु थे। लेकिन, भाजपा का दृष्टिकोण हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि नफरत फैलाने वाला है।”
आगामी कदम : कोर्ट के इस आदेश के बाद अब अगले महीने (जुलाई) के पहले सप्ताह में वाराणसी की निचली अदालत में इस याचिका पर नए सिरे से कानूनी बहस और सुनवाई शुरू होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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