Devotees gathered : भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर लोलार्क कुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति को जुटे श्रद्धालु ?

Devotees gathered : भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर लोलार्क कुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति को जुटे श्रद्धालु
Devotees gathered : भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर लोलार्क कुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति को जुटे श्रद्धालु

वाराणसी।

धर्म और आस्था की नगरी काशी में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के अवसर पर श्रद्धालुओं का अद्भुत सैलाब देखने को मिला। भदैनी स्थित पौराणिक लोलार्क कुंड में आधी रात 12 बजते ही पवित्र स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। हर-हर महादेव और सूर्य देव के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना की। संतान प्राप्ति की कामना लेकर देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की लंबी कतार देर रात से ही दिखाई देने लगी। श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी अधिक रही कि कतार करीब तीन किलोमीटर तक पहुंच गई और पांडेय हवेली तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन नजर आई।

लोलार्क कुंड काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के दिन यहां विशेष धार्मिक आयोजन होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु दूर-दूर से काशी पहुंचते हैं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुंड में स्नान करके भगवान सूर्य की पूजा करते हैं। संतान प्राप्ति की कामना से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

इस बार भी आधी रात से ही लोलार्क कुंड के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। जैसे ही रात के 12 बजे, श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान शुरू कर दिया। कुंड परिसर और आसपास का वातावरण धार्मिक जयकारों से गूंज उठा। हर-हर महादेव और सूर्य देव के जयकारों के बीच लोगों ने स्नान किया और पूजा-अर्चना की। धार्मिक वातावरण के कारण पूरा क्षेत्र आस्था और भक्ति से सराबोर नजर आया।

देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के साथ विदेशों से भी लोगों के पहुंचने की जानकारी सामने आई। कई श्रद्धालु पहले से ही वाराणसी पहुंच चुके थे, जबकि कुछ लोग देर रात तक लोलार्क कुंड की ओर आते रहे। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही कुंड तक पहुंचने के लिए बनाए गए मार्गों पर भी भीड़ दिखाई देने लगी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को कतार में आगे बढ़ते देखा गया।

लोलार्क कुंड में स्नान को लेकर धार्मिक मान्यताएं लंबे समय से चली आ रही हैं। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के अवसर पर यहां स्नान करने और सूर्य देव की आराधना करने की परंपरा बताई जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपती इस अवसर पर कुंड में स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। इसी कारण इस पर्व को स्थानीय धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

रात 12 बजे स्नान शुरू होने के बाद कुंड के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती गई। तीन किलोमीटर तक लंबी कतार पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पांडेय हवेली तक श्रद्धालुओं की कतार दिखाई देने की जानकारी सामने आई। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए धार्मिक जयकारे लगाते रहे और पूजा की तैयारियों में जुटे रहे।

Devotees gathered : भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर लोलार्क कुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति को जुटे श्रद्धालु
Devotees gathered : भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर लोलार्क कुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब, संतान प्राप्ति को जुटे श्रद्धालु

वाराणसी में धार्मिक आयोजनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं का पहुंचना सामान्य रूप से देखा जाता है। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण यहां होने वाले प्रमुख पर्वों और आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। लोलार्क षष्ठी भी ऐसे ही धार्मिक अवसरों में शामिल है, जिसमें श्रद्धालु विशेष पूजा और स्नान के लिए काशी पहुंचते हैं।

लोलार्क कुंड को लेकर स्थानीय स्तर पर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन यहां स्नान और सूर्य देव की पूजा करने से उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपरा से जुड़ी हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते श्रद्धालु हर वर्ष यहां पहुंचते हैं और धार्मिक विधियों में हिस्सा लेते हैं।

आधी रात से शुरू हुआ स्नान कई घंटे तक चलने की स्थिति बनी रही। श्रद्धालु कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कुंड के आसपास धार्मिक गतिविधियां लगातार चलती रहीं। लोगों ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना की और सूर्य देव को नमन किया। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे थे। कुछ लोग अपने साथ पूजा सामग्री भी लेकर आए थे।

लोलार्क कुंड के आसपास इस दौरान काशी की धार्मिक परंपराओं की झलक दिखाई दी। जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा। रात के समय भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण आसपास का इलाका काफी सक्रिय रहा। श्रद्धालुओं की कतारें दूर तक दिखाई दीं।

संतान प्राप्ति की कामना को लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन विशेष भावनात्मक और धार्मिक महत्व रखता है। श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं और कुंड में स्नान करते हैं। कई लोग इस धार्मिक परंपरा में परिवार के साथ शामिल होते हैं। उनके लिए यह केवल स्नान का अवसर नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और मनोकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

काशी में होने वाले धार्मिक आयोजनों की खासियत यह भी है कि यहां परंपरा और आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति भी दिखाई देती है। लोलार्क षष्ठी के अवसर पर भी भदैनी क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सूर्य देव की आराधना ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

श्रद्धालुओं की इतनी लंबी कतार के कारण आयोजन स्थल के आसपास काफी भीड़ रही। करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार पांडेय हवेली तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। श्रद्धालु अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। रात से ही शुरू हुई भीड़ के कारण कुंड के आसपास लगातार लोगों की आवाजाही बनी रही।

लोलार्क कुंड में होने वाला यह धार्मिक आयोजन काशी की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवसर पर सूर्य देव की पूजा और कुंड में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी विश्वास के कारण देश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु काशी की यात्रा करते हैं।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए काशी पहुंचना भी धार्मिक यात्रा का हिस्सा बन गया। दूर-दराज से आए लोगों ने पहले से अपनी यात्रा की तैयारी की। कुछ श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे तो कुछ समूहों में काशी आए। लोलार्क कुंड के आसपास पहुंचने के बाद उन्होंने निर्धारित कतार में अपनी बारी का इंतजार किया और स्नान के बाद पूजा-अर्चना की।

रात के 12 बजे जैसे ही स्नान शुरू हुआ, कुंड परिसर में धार्मिक उत्साह दिखाई देने लगा। हर-हर महादेव और सूर्य देव के जयकारे लगातार सुनाई देते रहे। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान सूर्य को नमन किया और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना की। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा।

लोलार्क कुंड में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर काशी की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था को सामने रखा। तीन किलोमीटर लंबी कतार में शामिल लोगों में संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी रही। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक अवसर में भाग लिया।

भदैनी स्थित पौराणिक लोलार्क कुंड में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर आधी रात से शुरू हुआ स्नान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अवसर रहा। जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने स्नान और पूजा-अर्चना की। पांडेय हवेली तक पहुंची करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार ने आयोजन में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी को दर्शाया। काशी में इस अवसर पर देर रात तक धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए पूजा-पाठ में जुटे रहे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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