
हापुड़। जनपद में नहर पुल पर एक साथ पांच तेंदुए दिखाई देने और इससे ग्रामीणों में दहशत फैलने संबंधी प्रकाशित समाचार को वन विभाग ने जांच के बाद भ्रामक और असत्य बताया है। दैनिक जागरण में 8 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार ‘नहर पुल पर एक साथ दिखे पांच तेंदुए, ग्रामीणों में खौफ’ के संबंध में प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) हापुड़ श्री गौतम सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि समाचार का आधार बना वीडियो संबंधित व्यक्ति ने स्वयं मौके पर बनाकर तैयार नहीं किया था, बल्कि उसे व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त करने के बाद डाउनलोड कर प्रसारित किया था। वन विभाग के अनुसार, वीडियो में दिखाई देने वाले स्थान और बताए गए घटनास्थल के बीच भी काफी अंतर पाया गया। जांच के आधार पर विभाग ने स्पष्ट किया कि संबंधित स्थल पर पांच तेंदुओं के एक साथ दिखाई देने की पुष्टि नहीं हुई है।
डीएफओ गौतम सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर की जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, समाचार प्रकाशित होने के बाद मामले की वास्तविकता का पता लगाने के लिए डीएफओ हापुड़ श्री गौतम सिंह ने स्वयं क्षेत्रीय वन अधिकारी गढ़मुक्तेश्वर के कर्मचारियों को साथ लेकर संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या वास्तव में नहर पुल पर पांच तेंदुए एक साथ दिखाई दिए थे और क्या वायरल वीडियो उसी स्थान का था, जिसका उल्लेख समाचार में किया गया था।
वन विभाग की टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वीडियो के स्रोत, उसके प्रसार और उसमें दिखाई देने वाले स्थान की पहचान करने का प्रयास किया। इसके लिए उस व्यक्ति को भी मौके पर बुलाया गया, जिसके द्वारा वीडियो बनाए जाने और प्रसारित किए जाने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने संबंधित व्यक्ति से वीडियो के संबंध में पूछताछ की और उसके मोबाइल फोन की जांच की।
जांच के दौरान वीडियो की वास्तविकता को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। मोबाइल फोन की जांच में पाया गया कि संबंधित व्यक्ति के मोबाइल से वह वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया गया था। पूछताछ में सामने आया कि वीडियो उसे व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त हुआ था, जिसे उसने अपने मोबाइल में डाउनलोड किया था। इसके बाद वीडियो को प्रसारित किया गया था।
मोबाइल की जांच में सामने आई वीडियो की सच्चाई
वन विभाग की जांच में वीडियो के स्रोत को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि वीडियो किस स्थान पर और किस परिस्थिति में बनाया गया था। इसके लिए वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति से पूछताछ की गई और उसके मोबाइल फोन में उपलब्ध जानकारी का परीक्षण किया गया।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो संबंधित व्यक्ति द्वारा स्वयं तैयार नहीं किया गया था। वह वीडियो पहले से व्हाट्सएप पर उपलब्ध था, जिसे डाउनलोड करने के बाद आगे प्रसारित किया गया था। इस तथ्य के सामने आने के बाद वीडियो की प्रमाणिकता की जांच और भी आवश्यक हो गई।
वन विभाग की टीम ने केवल मोबाइल फोन की जांच तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि संबंधित व्यक्ति द्वारा बताए गए स्थल का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य उसी स्थान का है या नहीं, जहां पांच तेंदुए दिखाई देने का दावा किया गया था।
वीडियो की पृष्ठभूमि और वास्तविक स्थल में नहीं मिला मेल
जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने उस क्षेत्र का निरीक्षण किया, जिसे वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति ने घटनास्थल बताया था। टीम ने वीडियो की पृष्ठभूमि में दिखाई देने वाली भौगोलिक परिस्थितियों और मौके पर मौजूद स्थान का मिलान किया।
निरीक्षण में पाया गया कि वीडियो की पृष्ठभूमि में दिखाई देने वाला स्थल और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थान एक-दूसरे से काफी अलग थे। दोनों स्थानों के बीच स्पष्ट अंतर होने के कारण वीडियो को संबंधित घटनास्थल का मानने का कोई ठोस आधार नहीं मिला।
वन विभाग ने वीडियो की पृष्ठभूमि और मौके की परिस्थितियों का मिलान करने के बाद मामले की अन्य जानकारियों की भी पड़ताल की। जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति से दोबारा पूछताछ की गई। विभाग के अनुसार, अंततः उस व्यक्ति ने स्वीकार किया कि वीडियो उसने स्वयं बनाकर जारी नहीं किया था, बल्कि उसे डाउनलोड करके प्रसारित किया था।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो को जिस स्थान और घटना से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा था, उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसे में वीडियो के आधार पर पांच तेंदुओं के एक साथ दिखाई देने और ग्रामीणों में दहशत फैलने संबंधी खबर की सत्यता पर सवाल खड़े हुए।
गहन जांच के बाद वीडियो को बताया फर्जी
डीएफओ हापुड़ श्री गौतम सिंह के नेतृत्व में की गई जांच में वीडियो के स्रोत, संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन, उसके बयान और घटनास्थल के निरीक्षण सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई। वन विभाग के अनुसार, सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित वीडियो फर्जी था और उसे वास्तविक घटनास्थल से जोड़कर प्रसारित किया गया था।
विभाग ने स्पष्ट किया कि 8 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार इसी वीडियो पर आधारित था। जांच में उस स्थान पर एक साथ पांच तेंदुओं के दिखाई देने की पुष्टि नहीं हुई। इसलिए समाचार में किए गए दावे को वास्तविक घटनाक्रम के अनुरूप नहीं पाया गया।
वन विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी वीडियो को देखकर या सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के आधार पर किसी घटना को सत्य मान लेना उचित नहीं है। वीडियो की वास्तविकता, उसके स्रोत और संबंधित स्थान की पुष्टि करना आवश्यक है, ताकि गलत जानकारी के कारण लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

गलत खबर का खंडन प्रकाशित करने की अपील
वन विभाग ने प्रकाशित समाचार के संबंध में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हुए अनुरोध किया है कि इस खबर का उचित खंडन प्रकाशित किया जाए। विभाग का कहना है कि जांच में जिस स्थान पर पांच तेंदुओं के एक साथ दिखाई देने का दावा किया गया था, वहां ऐसी कोई घटना प्रमाणित नहीं हुई। समाचार का आधार बना वीडियो भी जांच में फर्जी पाया गया।
इस मामले में विभाग की जांच का मुख्य निष्कर्ष यही है कि संबंधित वीडियो को उसके वास्तविक स्रोत और स्थान की पुष्टि किए बिना प्रसारित किया गया था। वीडियो बनाने और प्रसारित करने के बीच के अंतर तथा वीडियो की पृष्ठभूमि और वास्तविक स्थल में मेल न होने से इसकी विश्वसनीयता संदिग्ध पाई गई। पूछताछ में संबंधित व्यक्ति द्वारा वीडियो डाउनलोड करके प्रसारित किए जाने की बात स्वीकार करने के बाद वन विभाग ने इसे फर्जी बताया।
इस प्रकार, डीएफओ हापुड़ श्री गौतम सिंह द्वारा क्षेत्रीय वन अधिकारी गढ़मुक्तेश्वर के स्टाफ के साथ की गई जांच के आधार पर पांच तेंदुओं के नहर पुल पर एक साथ दिखाई देने संबंधी खबर का खंडन किया गया है। वन विभाग ने समाचार प्रकाशित करने वाले संबंधित माध्यम से अनुरोध किया है कि जांच में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पाठकों के सामने सही जानकारी प्रस्तुत की जाए और पूर्व में प्रकाशित गलत समाचार का खंडन किया जाए, जिससे क्षेत्र में किसी प्रकार का अनावश्यक भय या भ्रम न बना रहे।
नोट: यह समाचार वन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जांच संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और विभाग द्वारा किए गए खंडन को प्रस्तुत किया गया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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