
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज।
किसी भी विद्यालय की पहचान केवल वहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों और उन्हें शिक्षित करने वाले शिक्षकों से नहीं होती, बल्कि उन कर्मठ लोगों से भी होती है, जो पर्दे के पीछे रहकर विद्यालय की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे ही समर्पित, कर्मठ और सेवाभावी व्यक्तित्व के धनी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के भैया जी श्री नैन सिंह राणा 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने वर्ष 1992 से विद्यालय में निरंतर सेवा करते हुए अपने कार्यकाल के 34 वर्ष, 9 माह और 3 दिन पूरे किए। विद्यालय के प्रति उनका लगाव, समर्पण, त्याग, परिश्रम, निष्ठा और ईमानदारी सदैव प्रेरणादायक रहेंगे।
श्री नैन सिंह राणा का विद्यालय में योगदान केवल अपने निर्धारित दायित्वों को निभाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने वर्षों तक विद्यालय की दिनचर्या, अनुशासन और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सेवानिवृत्ति का अवसर विद्यालय परिवार के लिए भावनाओं से भरा हुआ है। यह एक ऐसे सेवाभावी व्यक्ति की विदाई है, जिनकी दिनचर्या के साथ विद्यालय की अनेक पीढ़ियों की यादें जुड़ी हुई हैं।
34 वर्षों से अधिक की सेवा, समर्पण की अनूठी मिसाल
वर्ष 1992 में विद्यालय की सेवा से जुड़े श्री नैन सिंह राणा ने अपने लंबे कार्यकाल के दौरान निरंतर निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। 34 वर्ष, 9 माह और 3 दिन का उनका सेवाकाल इस बात का प्रतीक है कि किसी भी संस्थान की उन्नति में लंबे समय तक समर्पित भाव से काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।
विद्यालय में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग महत्व होता है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करते हैं, विद्यार्थी विद्यालय की पहचान बनते हैं और वहीं व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी विद्यालय की दिनचर्या को व्यवस्थित रखने में योगदान देते हैं। नैन सिंह राणा ने भी अपने कार्यकाल में इसी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ निभाया।
उनकी सेवा में नियमितता, समय की पाबंदी और अपने कार्य के प्रति प्रतिबद्धता की झलक दिखाई देती रही। वर्षों तक एक ही संस्थान के साथ जुड़े रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनका सेवाकाल विद्यालय के प्रति निष्ठा और समर्पण की ऐसी कहानी है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
घंटी की आवाज में बसती थीं विद्यालय की यादें
विद्यालय की दिनचर्या में घंटी की आवाज का विशेष महत्व होता है। इसी आवाज के साथ कक्षाएं शुरू होती हैं, एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने का समय होता है और अंत में छुट्टी का संकेत मिलता है। विद्यार्थियों के लिए घंटी केवल समय बताने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह उनके पूरे दिन की गतिविधियों का हिस्सा बन जाती है।
नैन सिंह राणा द्वारा समय पर बजाई जाने वाली घंटी की आवाज भी विद्यालय की पहचान और दिनचर्या से जुड़ी रही। उस आवाज के साथ न जाने कितने विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई शुरू की, कक्षाओं में प्रवेश किया और छुट्टी के समय अपने घर जाने की तैयारी की।
आज जब भैया जी अपने सेवाकाल को पूरा कर विद्यालय से सेवानिवृत्त हुए हैं, तो उनकी यह जिम्मेदारी और उससे जुड़ी यादें निश्चित रूप से विद्यालय परिवार के मन में विशेष स्थान रखती हैं। आने वाले समय में जब विद्यालय की घंटी बजेगी, तो पुराने विद्यार्थियों और सहकर्मियों को उनके द्वारा निभाई गई जिम्मेदारियों की याद अवश्य आएगी।
समय के साथ विद्यालय में विद्यार्थियों की अनेक पीढ़ियां आईं और अपनी शिक्षा पूरी करके आगे बढ़ गईं, लेकिन विद्यालय की व्यवस्था में योगदान देने वाले ऐसे समर्पित लोगों की भूमिका अक्सर लोगों की स्मृतियों में लंबे समय तक बनी रहती है।
पर्दे के पीछे रहकर विद्यालय को व्यवस्थित रखने वालों का भी है विशेष महत्व
किसी भी शिक्षण संस्थान को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनेक लोगों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता होती है। विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ-साथ समय प्रबंधन, अनुशासन, साफ-सफाई और दैनिक व्यवस्थाओं का भी अपना महत्व है। इन सभी कार्यों में योगदान देने वाले कर्मचारी विद्यालय के संचालन की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
नैन सिंह राणा भी विद्यालय परिवार की ऐसी ही अनमोल शख्सियत रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्य के माध्यम से विद्यालय की दिनचर्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान इस बात की याद दिलाता है कि किसी संस्थान की सफलता केवल सामने दिखाई देने वाले कार्यों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन लोगों के परिश्रम पर भी टिकी होती है, जो पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
उनकी सेवा से यह प्रेरणा मिलती है कि कार्य चाहे छोटा हो या बड़ा, उसकी वास्तविक महत्ता उसे निभाने वाले व्यक्ति की निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण से निर्धारित होती है। अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से करना ही किसी व्यक्ति को सम्मान का पात्र बनाता है।

विदाई के अवसर पर भावुक हुआ विद्यालय परिवार
15 अक्टूबर 2026 का दिन श्री नैन सिंह राणा के लिए उनके लंबे सेवाकाल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। सेवानिवृत्ति के साथ उनके नियमित कार्यकाल का समापन हुआ, लेकिन विद्यालय से जुड़ी उनकी यादों और संबंधों का अंत नहीं हुआ।
विद्यालय में बिताए गए वर्षों के दौरान उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को आते-जाते देखा। विद्यालय की बदलती परिस्थितियों, समय के साथ विकसित होती व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की पीढ़ियों के बीच उनका अपना एक अलग स्थान रहा। इस लंबे सफर में विद्यालय से उनका जुड़ाव केवल कार्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह एक पारिवारिक संबंध का रूप भी लेता गया।
विद्यालय परिवार के लिए ऐसे व्यक्ति को विदाई देना भावनात्मक क्षण होता है, जिसने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष संस्थान की सेवा में समर्पित किए हों। उनकी उपस्थिति विद्यालय की रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा रही। इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके व्यक्तित्व और योगदान की स्मृतियां विद्यालय परिवार के बीच बनी रहेंगी।
भले ही अब वह प्रतिदिन पहले की तरह विद्यालय की व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं रहेंगे, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए दायित्व और उनसे जुड़ी यादें हमेशा सम्मान के साथ याद की जाएंगी।
कर्म और समर्पण से मिलता है सम्मान
श्री नैन सिंह राणा का सेवाकाल एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति की महानता उसके पद से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से पहचानी जाती है। कोई काम छोटा नहीं होता। प्रत्येक जिम्मेदारी का अपना महत्व होता है और जब उसे पूरी ईमानदारी, लगन तथा समर्पण के साथ निभाया जाता है, तो वह व्यक्ति अपने कार्यस्थल और समाज में विशेष सम्मान प्राप्त करता है।
उनका जीवन और सेवा इसी भावना का उदाहरण है। लगातार कई दशकों तक विद्यालय के साथ जुड़े रहना, अपनी जिम्मेदारियों को निभाना और संस्थान की व्यवस्था में योगदान देना उनके कार्य के प्रति निष्ठा को दर्शाता है।
विद्यालय परिवार के लिए उनका योगदान एक ऐसी विरासत है, जो आने वाले समय में भी कर्मचारियों और विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दे सकती है। उनकी सेवा यह सिखाती है कि सच्चा समर्पण दिखावे का मोहताज नहीं होता। नियमित रूप से अपने दायित्व निभाना, समय का सम्मान करना और संस्थान के हित को महत्व देना भी सेवा का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है।
सुखमय और स्वस्थ जीवन की कामना
सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत होती है। लंबे समय तक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बाद व्यक्ति को अपने परिवार, स्वास्थ्य, रुचियों और व्यक्तिगत खुशियों के लिए अधिक समय मिल सकता है।
विद्यालय परिवार की ओर से श्री नैन सिंह राणा के आगामी जीवन के लिए सुख, शांति, अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की कामना की जाती है। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके जीवन का प्रत्येक नया दिन नई उमंग, उत्साह और आनंद लेकर आए। उनके चेहरे की मुस्कान सदैव बनी रहे और वह अपने परिवार के साथ सुखद एवं संतोषपूर्ण जीवन व्यतीत करें।
उनकी वर्षों की सेवा के लिए सम्मान और आभार व्यक्त करते हुए यही कामना है कि जीवन की इस नई पारी में उन्हें स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मीयता का भरपूर साथ मिले।
भैया जी श्री नैन सिंह राणा, विद्यालय में आपका नियमित सेवाकाल भले ही पूरा हो गया हो, लेकिन विद्यालय के प्रति आपका समर्पण, आपकी कर्मठता और आपकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। आपने अपने कर्मों से साबित किया है कि इंसान की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी निष्ठा और सेवा भावना से होती है। आपकी 34 वर्ष, 9 माह और 3 दिन की अनवरत सेवा के लिए हृदय से आभार और सेवानिवृत्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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