Emphasis on connecting : एचआईवी संक्रमित मरीजों से भेदभाव दंडनीय अपराध, समय पर जांच और उपचार से जोड़ने पर जोर ?

Emphasis on connecting : एचआईवी संक्रमित मरीजों से भेदभाव दंडनीय अपराध, समय पर जांच और उपचार से जोड़ने पर जोर
Emphasis on connecting : एचआईवी संक्रमित मरीजों से भेदभाव दंडनीय अपराध, समय पर जांच और उपचार से जोड़ने पर जोर

हापुड़, 10 सितंबर। राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीआई नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से जनपद हापुड़ में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में एचआईवी एवं एड्स की रोकथाम, समय पर जांच, संक्रमित व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ने, उपचार की निरंतरता बनाए रखने और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से संबंधित सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने सहित कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी हापुड़ डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने किया। उन्होंने कहा कि एचआईवी से जुड़ा विषय केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय पर पहचान, संवेदनशीलता, उचित उपचार और बिना किसी भेदभाव के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़ी महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि एचआईवी से संबंधित मामलों में जागरूकता और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना कार्यक्रम की सफलता के लिए बेहद आवश्यक है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एचआईवी की रोकथाम के लिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना, जांच की सुविधा के बारे में जागरूक करना तथा जांच के बाद आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम के निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई।

कार्यशाला के दौरान जनपद की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हेमलता सिंह ने एचआईवी/एड्स से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील एवं समान व्यवहार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एचआईवी से ग्रस्त व्यक्ति के साथ भेदभाव करना दंडनीय अपराध है। इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को ऐसे मरीजों के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को उसकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सामाजिक अथवा स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

डॉ. हेमलता सिंह ने एचआईवी की रोकथाम के साथ-साथ समय से एचआईवी जांच कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर जांच होने से संक्रमित व्यक्ति की पहचान शीघ्र की जा सकती है और उसे आवश्यक उपचार एवं परामर्श सेवाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को उपचार से जोड़ने के साथ उपचार की निरंतरता बनाए रखने को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यशाला में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने टीबी और एचआईवी के बीच संबंध को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी से प्रभावित प्रत्येक मरीज की एचआईवी जांच तथा एचआईवी/एड्स से प्रभावित मरीज की टीबी जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने दोनों स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता बताई, ताकि किसी मरीज में दोनों में से किसी बीमारी की स्थिति होने पर समय से उसकी पहचान की जा सके और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीआई नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उपलब्ध विभिन्न सेवाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया गया कि पात्र लोगों तक कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। HIV Testing यानी एचआईवी जांच, Linkage to ART यानी संक्रमित व्यक्तियों को एंटीरेट्रोवायरल उपचार सेवाओं से जोड़ना, Retention in Care यानी उपचार एवं देखभाल से लगातार जुड़े रहना तथा Viral Load Testing जैसी सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

Emphasis on connecting : एचआईवी संक्रमित मरीजों से भेदभाव दंडनीय अपराध, समय पर जांच और उपचार से जोड़ने पर जोर
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कार्यक्रम के दौरान जनपद में चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा भी की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्यक्रम के संचालन के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधान को लेकर विचार-विमर्श किया। इस दौरान यह बात सामने रखी गई कि एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम की सफलता के लिए केवल जांच की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच के बाद संबंधित व्यक्ति को उचित परामर्श, उपचार और नियमित स्वास्थ्य देखभाल से जोड़ना भी जरूरी है।

कार्यशाला में बेहतर रेफरल एवं लिंकज व्यवस्था विकसित करने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि किसी व्यक्ति की जांच में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उसे आवश्यक उपचार सेवाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावी होनी चाहिए। इसी प्रकार उपचार से जुड़े मरीजों की नियमित देखभाल और आवश्यक जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी है।

कार्यशाला के दौरान यह निर्णय लिया गया कि एचआईवी/एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नियमित समीक्षा की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर रेफरल और लिंकज व्यवस्था विकसित की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों की नियमित निगरानी करने तथा सामने आने वाली समस्याओं का समन्वय के साथ समाधान करने पर जोर दिया गया।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण यूपीसेक्स से दीपक तिवारी, अवंतिका बाजपेई और डॉ. मनीष शर्मा तथा दिशा क्लस्टर से सचिन कुमार द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षकों ने एचआईवी जांच, उपचार सेवाओं से जुड़ाव, मरीजों की देखभाल में निरंतरता और कार्यक्रम के विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी दी।

कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। इनमें एडिशनल सीएमओ डॉ. महेश चंद, डॉ. दिनेश कुमार भारती, डिप्टी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. केके शर्मा, जिला पीएमडीटी/टीबी-एचआईवी कोऑर्डिनेटर मनोज कुमार गौतम सहित संबंधित चिकित्सा अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीआई नियंत्रण कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और परिणामपरक बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया गया। अधिकारियों ने कहा कि एचआईवी की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार तक पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह संदेश दिया गया कि एचआईवी/एड्स से जुड़े मामलों में जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और संक्रमित व्यक्तियों को उपचार सेवाओं से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को लगातार सक्रिय रहना होगा। इसके साथ ही टीबी और एचआईवी से संबंधित सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाकर मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में शामिल रहेगा। कार्यशाला में हुई चर्चा और लिए गए निर्णयों से जनपद में राष्ट्रीय एड्स एवं एसटीआई नियंत्रण कार्यक्रम की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास तेज करने पर जोर दिया गया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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