Emphasis on punctuality : जिलाधिकारी कविता मीना ने पशुपालन निर्माण कार्यों की समीक्षा कर गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर

हापुड़, 18 जून 2026। जनपद हापुड़ में पशुपालन विभाग के अंतर्गत चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने की। इस दौरान जनपद में निर्माणाधीन पशु चिकित्सालयों, वृहद गौ-संरक्षण केंद्रों, गौशालाओं, कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों तथा बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा केंद्रों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं में शामिल इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पशुपालकों और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ परियोजनाओं में कार्य की गति अपेक्षित स्तर पर नहीं है। इस पर उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी संस्था द्वारा लापरवाही बरती जाती है अथवा निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी की जाती है, तो उसके विरुद्ध शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
उन्होंने विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जिनका कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है या किसी कारणवश लंबित है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे सभी लंबित कार्यों को तत्काल प्रारंभ कराया जाए तथा नियमित रूप से उनकी निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी परियोजनाओं में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और उनके बेहतर रखरखाव को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में निर्माणाधीन वृहद गौ-संरक्षण केंद्रों का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन केंद्रों में चारा, स्वच्छ पेयजल, पशुओं के लिए पर्याप्त शेड, भूसा गोदाम तथा सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल जैसी मूलभूत सुविधाओं का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि गौ-संरक्षण केंद्र केवल पशुओं को आश्रय देने का स्थान नहीं हैं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने का माध्यम भी हैं। इसलिए इन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या संरचनात्मक समस्या उत्पन्न न हो।

पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने प्रत्येक वृहद गौ-संरक्षण केंद्र में बायो-गैस प्लांट स्थापित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोवंश से प्राप्त अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बायो-गैस उत्पादन किया जा सकता है, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही गौ-संरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
बैठक में पशु चिकित्सालयों और बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा केंद्रों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए आवश्यक है कि निर्माणाधीन चिकित्सा केंद्रों का कार्य शीघ्र पूरा हो और उन्हें जल्द से जल्द संचालन के लिए तैयार किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद आवश्यक उपकरणों, दवाओं और अन्य संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए ताकि केंद्र शुरू होते ही लोगों को सेवाएं मिल सकें। पशुओं के स्वास्थ्य का सीधा संबंध किसानों की आर्थिक स्थिति से होता है, इसलिए पशु चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाना ग्रामीण विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में इन केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और केंद्रों को निर्धारित समय के भीतर तैयार किया जाए। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी और उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की तथा निर्माण कार्यों में आ रही चुनौतियों से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी ने समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर कार्यों को समय पर पूरा करें।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि पशुपालन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश और देश की बड़ी आबादी आज भी पशुपालन पर निर्भर है। किसानों और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और पर्याप्त आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों को समय से पशु चिकित्सा सुविधाएं मिलें, इसके लिए सभी निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूर्ण कराए जाएं।” जिलाधिकारी के इस स्पष्ट संदेश से यह संकेत मिला कि प्रशासन जनपद में पशुपालन संबंधी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने, प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा कर जनपद के किसानों और पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में पशुपालन विभाग एवं संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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