Enterprises : मानहानि मामले में रवि नायर फिलहाल जेल में रहेंगे, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब के लिए दिया अंतिम मौका ?

Enterprises : मानहानि मामले में रवि नायर फिलहाल जेल में रहेंगे, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब के लिए दिया अंतिम मौका ?
Enterprises : मानहानि मामले में रवि नायर फिलहाल जेल में रहेंगे, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब के लिए दिया अंतिम मौका ?

अहमदाबाद।

पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को नायर की याचिका पर अपना कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष रखने के लिए समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनी को जवाब दाखिल करने का यह अंतिम अवसर है और इसके बाद मामले में आगे स्थगन नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी। तब तक उपलब्ध आदेश के अनुसार रवि नायर न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।

यह मामला उस आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़ा है, जिसे अडाणी एंटरप्राइजेज ने पत्रकार रवि नायर के खिलाफ दायर किया था। शिकायत में कंपनी की ओर से आरोप लगाया गया था कि नायर ने अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट और एक वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री के माध्यम से अडाणी एंटरप्राइजेज तथा अडाणी समूह के बारे में कथित रूप से झूठे और मानहानिकारक दावे किए। नायर ने इन आरोपों का विरोध किया है और मामले में अपनी ओर से कानूनी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रखी हैं।

फरवरी में हुई थी दोषसिद्धि

मामले में 10 फरवरी 2026 को गांधीनगर जिले के मंसा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने रवि नायर को आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। यह फैसला अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से दर्ज कराई गई आपराधिक मानहानि शिकायत के आधार पर हुआ था।

दोषसिद्धि के बाद नायर ने फैसले को गांधीनगर की सेशंस अदालत में चुनौती दी। अपील लंबित रहने के दौरान 9 मार्च 2026 को उनकी सजा निलंबित कर दी गई और उन्हें जमानत दी गई। जमानत की शर्तों में अदालत के समक्ष नियमित रूप से उपस्थित होना, बिना पूर्व अनुमति भारत से बाहर नहीं जाना, पासपोर्ट जमा करना तथा निवास और मोबाइल नंबर में बदलाव के लिए अदालत की अनुमति लेना शामिल था।

3 सितंबर को जारी हुआ गैर-जमानती वारंट

मामले में विवाद उस समय बढ़ा जब 3 सितंबर 2026 को नायर अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए। उनकी ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के लिए आवेदन किया गया था। सेशंस कोर्ट ने यह आवेदन स्वीकार नहीं किया और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट यानी NBW जारी कर दिया। बाद में इसी वारंट के आधार पर उनकी गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत का रास्ता खुला।

नायर की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में इस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। उनकी ओर से यह दलील दी गई है कि सीधे गैर-जमानती वारंट जारी करने से पहले उन्हें समन या जमानती वारंट जारी करने जैसी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। यह नायर की ओर से प्रस्तुत कानूनी दलील है और इस मुद्दे पर गुजरात हाईकोर्ट ने अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

Enterprises : मानहानि मामले में रवि नायर फिलहाल जेल में रहेंगे, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब के लिए दिया अंतिम मौका ?
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17 सितंबर को पहुंचे थे अदालत

17 सितंबर 2026 को रवि नायर स्वयं सेशंस कोर्ट पहुंचे और अपने खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने के लिए आवेदन किया। हालांकि अदालत ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी आदेश के खिलाफ उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया।

नायर की याचिका में सेशंस कोर्ट के 17 सितंबर के आदेश के साथ-साथ 3 सितंबर को जारी आदेश और गैर-जमानती वारंट को भी चुनौती दी गई है। याचिका का मामला R/Special Criminal Application (Quashing) No. 13853 of 2026, Ravi Nair v. State of Gujarat & Anr. के रूप में दर्ज है।

हाईकोर्ट ने 19 सितंबर को जारी किया नोटिस

रवि नायर की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम. के. ठक्कर की अदालत ने 19 सितंबर को सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार और अडाणी एंटरप्राइजेज को नोटिस जारी किया था। अदालत ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए लिया और अगली सुनवाई 21 सितंबर तय की थी। नायर की ओर से अधिवक्ता अभिक चिमनी और रोनिथ जॉय ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

याचिका में नायर की ओर से यह भी कहा गया है कि वह गुजरात के निवासी नहीं हैं और सामान्य रूप से केरल में रहते हैं। उनका कहना है कि अपील की प्रत्येक तारीख पर गांधीनगर पहुंचना उनके लिए यात्रा, खर्च और अन्य परेशानियों से जुड़ा है। साथ ही उनकी ओर से दावा किया गया कि उनके अधिवक्ता अदालत में नियमित रूप से उपस्थित रहे और उनकी व्यक्तिगत अनुपस्थिति के कारण अपील की कार्यवाही बाधित नहीं हुई।

21 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?

सोमवार, 21 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से मामले में कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा। नायर की ओर से पेश अधिवक्ता अभिक चिमनी ने इस अनुरोध का विरोध किया और तत्काल अंतरिम राहत दिए जाने की मांग की। उन्होंने अदालत के समक्ष नायर की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मामले की कार्यवाही पहले से अपीलीय स्तर पर चल रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, नायर की ओर से यह दलील भी दी गई कि उनके मुवक्किल को जेल में एक दिन भी नहीं रहना चाहिए और अडाणी एंटरप्राइजेज को बार-बार स्थगन का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना उचित माना। अदालत ने कहा कि नोटिस जारी होने के बाद अडाणी एंटरप्राइजेज अदालत के समक्ष उपस्थित हुई है, इसलिए उसे अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।

23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आगे और स्थगन नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी। इस कारण फिलहाल नायर को तत्काल अंतरिम राहत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे।

आने वाली सुनवाई में अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से गैर-जमानती वारंट, निचली अदालत के आदेश और नायर की हिरासत से जुड़े कानूनी एवं तथ्यात्मक पहलुओं पर अपना पक्ष रखा जाना है। इसके बाद हाईकोर्ट नायर की ओर से उठाए गए सवालों पर आगे विचार करेगा। फिलहाल अदालत ने यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि नॉन-बेलेबल वारंट जारी करने या नायर को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई कानूनी रूप से सही थी या नहीं।

मूल मानहानि मामला और वर्तमान याचिका अलग-अलग

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए दोनों न्यायिक प्रक्रियाओं को अलग-अलग देखना जरूरी है। मूल आपराधिक मानहानि मामले में मंसा की अदालत ने 10 फरवरी को नायर को दोषी ठहराते हुए एक साल की सजा और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया था। इस दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील अभी लंबित है और मार्च में सेशंस कोर्ट ने सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी थी।

वहीं वर्तमान गुजरात हाईकोर्ट की याचिका मुख्य रूप से गैर-जमानती वारंट, 17 सितंबर के सेशंस कोर्ट के आदेश और उसके बाद हुई न्यायिक हिरासत को चुनौती देने से संबंधित है। नायर तत्काल राहत और अपनी हिरासत से बाहर आने की मांग कर रहे हैं। इस याचिका पर हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

इस प्रकार 21 सितंबर की सुनवाई के बाद फिलहाल स्थिति यह है कि रवि नायर जेल में हैं, जबकि गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। 23 सितंबर की सुनवाई इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण होगी, जिसमें अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर रखे जाने वाले कानूनी एवं तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे विचार करेगी। तब तक नायर की ओर से मांगी गई राहत पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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