Gold and silver : सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी ₹8,000 से ज्यादा टूटी, सोना भी ₹1,000 प्रति 10 ग्राम गिरा

सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 16 फरवरी को भारतीय सर्राफा और वायदा बाजारों में भारी गिरावट का जोरदार प्रभाव देखने को मिला। सप्ताह के पहले व्यापारिक दिन ही सोना और चांदी के भाव में तेज़ी से हुए बदलाव ने निवेशकों, व्यापारियों और आम खरीदारों के बीच हलचल मचा दी। चांदी की कीमतों में ₹8,000 से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोने का भाव भी ₹1,000 प्रति 10 ग्राम से ज़्यादा लुढ़क गया, जिससे बाजार की धारणा और निवेश की रणनीतियों पर असर पड़ा।
📉 बहुमूल्य धातुओं में गिरावट: बाजार की तेज़ प्रतिक्रिया
भारतीय सर्राफा बाजार में मंगलवार सुबह से ही सोना और चांदी के दाम में गिरावट का रुझान स्पष्ट था। चांदी के भाव में आई भारी गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में स्थिरता और मध्यम उछाल देखने को मिल रहा था। वहीं सोने की कीमतों में गिरावट ने उन निवेशकों को भी प्रभावित किया, जिन्होंने हाल के महीनों में सोने में निवेश बढ़ाया था।
🪙 चांदी की कीमतें ₹8,000 से अधिक टूटी
चांदी की कीमतों में आई गिरावट इस प्रकार थी कि स्थानीय बाजार में चांदी की रेट ₹8,000 से अधिक कम हो गई। ट्रेडिंग फ़्लोर पर चांदी की तेजी से गिरती हुई कीमत ने व्यावसायिक आकलन और निवेश रणनीतियों को प्रभावित किया। कई सर्राफा व्यापारियों ने बताया कि कीमतों में गिरावट की वजह वैश्विक मांग में मंदी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में धातुओं के भाव में गिरावट तथा डॉलर के सुदृढ़ होने से भी जुड़ी रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी चूंकि औद्योगिक उपयोग में भी प्रयुक्त होती है, इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन मांग के आधार पर इसके भाव में उतार-चढ़ाव आता है। अगर वैश्विक स्तर पर उत्पादन गतिविधियाँ मंद होती हैं या मांग प्रभावित होती है, तो चांदी के दामों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
🟡 सोने की कीमतें ₹1,000 से अधिक गिरावट के साथ
सोना, जो परंपरागत रूप से जोखिम-रहित निवेश का प्रतीक माना जाता है, उसकी कीमतों में भी गिरावट ने बाजार को चौंका दिया। स्थानीय कारोबारी हॉलों में 10 ग्राम सोना लगभग ₹1,000 से अधिक गिर गया। इस गिरावट ने अल्पकालिक निवेशकों को सर्तक कर दिया है, क्योंकि सोने में गिरावट का रुझान निवेश की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
सोने के भाव में गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक संकेतक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की मौद्रिक नीतियों की समीक्षा, डॉलर की मजबूती तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों में प्रतिक्रियाएं सोने के भाव को प्रभावित कर रही हैं।
अधिकतर विश्लेषकों का मानना है कि जब डॉलर की स्थिति मजबूत होती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बनता है क्योंकि सोना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में डॉलर में ही लेन-देन होता है। साथ ही, ब्याज दरों में संभावित बदलाव भी सोने के भाव को प्रभावित करते हैं।
📊 निवेशकों और बाजार के रुझान
सोने और चांदी की गिरावट ने निवेशकों को इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर किया है कि क्या यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है या फिर एक दीर्घकालिक रुझान की शुरुआत। कुछ निवेशकों ने कहा है कि वे इस गिरावट को खरीद के अवसर के तौर पर देखते हैं, जबकि अन्य इसे मार्केट में अस्थिरता का संकेत मान रहे हैं।
सर्राफा व्यापारी भी अभी स्थिति को लेकर मिश्रित राय रख रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ कारोबारी सत्रों में भाव स्थिर नहीं होते हैं, तो निवेशकों को जोखिम प्रबंधन रणनीति अपनानी चाहिए। खासकर उन लोगों को जिन्होंने लीवरेज्ड निवेश (ब्याज लेन-देन) या वायदा सौदों में निवेश किया है।

🌍 वैश्विक बाजारों का प्रभाव
भारतीय सर्राफा बाजार अक्सर अंतरराष्ट्रीय धातु मूल्यों से प्रभावित होता है। हाल के दिनों में वैश्विक बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट रही है, जो भारत में भी प्रतिफलित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक ब्याज दरों की भविष्यवाणियां और आर्थिक संकेतक इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा, एशियाई बाजारों में मांग की स्थिति, थोक मांग और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की आर्थिक गतिविधियां भी इनकी कीमतों पर असर डालती हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ती है, तो सोना फिर से सुरक्षित निवेश के तौर पर उभर सकता है, जिससे कीमतों में उछाल दिख सकता है।
👥 निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बिना किसी जल्दबाजी के यह निर्णय लें कि क्या वे सोने और चांदी में निवेश जारी रखें या लाभ सुरक्षित करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करें। बाजार अनिश्चितताओं की वजह से यह आवश्यक है कि निवेश दीर्घकालिक लक्ष्यों और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही किया जाए।
इसके अलावा, यदि कोई निवेशक वायदा या भविष्य निधि मार्केट में शामिल है, तो उसे भी पेशेवर सलाह लेने पर विचार करना चाहिए क्योंकि यह मार्केट अत्यधिक उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है।
📌 निष्कर्ष
सोने और चांदी में 16 फरवरी को आई भारी गिरावट ने निवेशकों, व्यापारियों और खरीदारों के बीच चिंता और उत्सुकता दोनों पैदा की है। चांदी के भाव में ₹8,000 से अधिक गिरावट, और सोने के भाव में ₹1,000 प्रति 10 ग्राम से अधिक की गिरावट ने यह दर्शाया है कि बाजार में उतार-चढ़ाव निरंतर बना हुआ है। वैश्विक बाजार गतिशीलता, डॉलर का असर, आर्थिक संकेतक और निवेश धारणा इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
फिलहाल निवेशक और बाजार दोनों ही आगे के कारोबारी सत्रों का इंतज़ार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या यह गिरावट स्थिर रहेगी या बाजार फिर से उछाल लेगा। इस बीच, विशेषज्ञ सलाह यह है कि निवेश निर्णय ठंडे दिमाग से लें, निवेश लक्ष्यों और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही अगला कदम उठाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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