Historic campaign : आजादी के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना, 17 अगस्त से शुरू होगा ऐतिहासिक अभियान ?
Historic campaign : आजादी के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना, 17 अगस्त से शुरू होगा ऐतिहासिक अभियान ?
भारत में आजादी के बाद पहली बार देशव्यापी जनगणना के दौरान जातिगत आंकड़ों को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाएगा। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि जनगणना की प्रक्रिया 17 अगस्त से प्रारंभ होगी। यह जनगणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी और इसके तहत केवल जनसंख्या की संख्या ही नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी एकत्र की जाएंगी। विशेष बात यह है कि इस बार जनगणना में जाति संबंधी जानकारी भी दर्ज की जाएगी, जिसे लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों द्वारा उठाया जाता रहा है।
सरकार के अनुसार वर्ष 2027 में पूरी होने वाली इस जनगणना में प्रत्येक नागरिक की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे आंकड़ों का संकलन पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक होगा।
इस बार जनगणना में परिवार के मुखिया का नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास, आयु और लिंग जैसी सामान्य जानकारियों के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की जाति का भी विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा माता और पिता से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। इनमें माता-पिता की जन्म तिथि, जन्म स्थान और अन्य आवश्यक विवरण शामिल हो सकते हैं। इन सूचनाओं का उद्देश्य जनसंख्या के सामाजिक स्वरूप को बेहतर ढंग से समझना तथा भविष्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक भवन से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें मकान का प्रकार, उपलब्ध सुविधाएं, पेयजल, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, रसोई गैस और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विवरण दर्ज किया जाएगा। दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार और उसके सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसी चरण में जाति, शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति तथा अन्य सामाजिक जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
सरकार का कहना है कि जातिगत आंकड़ों के उपलब्ध होने से विभिन्न वर्गों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में कई योजनाएं अनुमानित आंकड़ों के आधार पर बनाई जाती हैं, जबकि नई जनगणना से प्राप्त जानकारी नीति निर्माण को अधिक सटीक बना सकती है।
जातिगत जनगणना को लेकर देश में लंबे समय से बहस होती रही है। कई राज्यों ने अपने स्तर पर जाति सर्वेक्षण कराए हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी मांग की थी। अब पहली बार केंद्र सरकार द्वारा आयोजित आधिकारिक जनगणना में जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने से सामाजिक संरचना का व्यापक और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध होगा।
Historic campaign : आजादी के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना, 17 अगस्त से शुरू होगा ऐतिहासिक अभियान ?
इस बार जनगणना की प्रक्रिया में डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। गणनाकर्मी मोबाइल ऐप और टैबलेट के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। इससे आंकड़ों के संकलन में होने वाली त्रुटियों में कमी आएगी और परिणाम अपेक्षाकृत कम समय में उपलब्ध हो सकेंगे। जहां आवश्यक होगा, वहां पारंपरिक कागजी प्रपत्रों का भी उपयोग किया जा सकेगा।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि जनगणना के दौरान सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। जनगणना के लिए दी गई व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा और उसका उपयोग केवल सांख्यिकीय तथा प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। किसी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
जनगणना के माध्यम से देश की कुल आबादी, शहरी और ग्रामीण जनसंख्या, शिक्षा का स्तर, रोजगार की स्थिति, प्रवास, परिवारों की संरचना तथा सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति का विस्तृत चित्र सामने आएगा। इसके आधार पर भविष्य में संसाधनों का बेहतर वितरण, नई विकास योजनाओं की रूपरेखा और कल्याणकारी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जातिगत आंकड़े उपलब्ध होने से सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों, आरक्षण व्यवस्था, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पहचान और विकास योजनाओं के मूल्यांकन में भी मदद मिलेगी। हालांकि इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मत भी मौजूद हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि जनगणना का उद्देश्य केवल प्रमाणिक आंकड़े जुटाना और नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय आधार तैयार करना है।
17 अगस्त से शुरू होने वाली यह जनगणना भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण जनगणनाओं में से एक मानी जा रही है। पहली बार जाति के साथ-साथ माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान जैसी विस्तृत जानकारियां दर्ज किए जाने से देश के सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप का व्यापक डेटाबेस तैयार होगा। इससे भविष्य की योजनाओं और नीतियों को अधिक वैज्ञानिक, समावेशी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।
अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।