House arrest : भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान घाट जा रहे किसान नेताओं को पुलिस ने रोका, कई नेता होम अरेस्ट

हापुड़/दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली स्थित किसान घाट पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेताओं को बुधवार को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारियों को उनके घरों पर ही होम अरेस्ट कर लिया गया, जबकि कुछ नेताओं को रास्ते से हिरासत में लेकर संगठन के कैंप कार्यालय पर बैठा दिया गया। किसान नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वी. एम. सिंह के नेतृत्व में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसान घाट, दिल्ली पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसी क्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महासचिव चौधरी वीरपाल सिंह ग्राम ततारपुर से किसान नेताओं के साथ दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि इससे पहले ही पुलिस प्रशासन उनके निवास पर पहुंच गया और उन्हें होम अरेस्ट कर लिया, ताकि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
उधर, राष्ट्रीय सैनिक संस्था का एक प्रतिनिधिमंडल भी किसानों के समर्थन में दिल्ली जाने के लिए ततारपुर बाईपास पर एकत्र हुआ था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संस्था के प्रदेश प्रवक्ता एवं हापुड़ जिला अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र त्यागी कर रहे थे। उनके साथ जिला सचिव मुकेश प्रजापति, नगर उपाध्यक्ष राजकुमार वर्मा, दीपचंद प्रजापति, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जगमेर सिंह तथा हरेंद्र सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का कहना है कि जैसे ही वे किसान घाट के लिए रवाना होने लगे, पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद सभी को हिरासत में लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महासचिव चौधरी वीरपाल सिंह के कैंप कार्यालय पर बैठा दिया गया। संगठन के नेताओं ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने की कार्रवाई बताया।
चौधरी वीरपाल सिंह ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का विरोध भारत-अमेरिका ट्रेड डील के उस प्रस्तावित स्वरूप को लेकर है, जिसमें किसानों के कृषि उत्पादों, दुग्ध एवं डेयरी उत्पादों को भी शामिल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। उनका कहना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को इस तरह की ट्रेड डील के दायरे में लाया गया तो इसका सीधा असर देश के किसानों की आय और आजीविका पर पड़ेगा।
उन्होंने मांग की कि सरकार किसी भी स्थिति में किसानों के कृषि उत्पाद, दूध और डेयरी उत्पादों को भारत-अमेरिका ट्रेड डील के दायरे में शामिल न करे। उनका कहना था कि देश के करोड़ों किसान पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और ऐसे में विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उनकी स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है।

चौधरी वीरपाल सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार किसान और नौजवान विरोधी नीतियां अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार पुलिस प्रशासन का सहारा लेकर आंदोलन को रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया देश के भविष्य के लिए उचित नहीं है।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के प्रदेश प्रवक्ता एवं हापुड़ जिला अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र त्यागी ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता अधिवक्ता मुकुल कुमार त्यागी, मंडल उपाध्यक्ष वीरेश चौधरी, जिला अध्यक्ष अशोक डींगरा सहित कई अन्य नेताओं को भी पुलिस प्रशासन ने उनके घरों पर ही होम अरेस्ट कर दिया। उनका कहना था कि प्रशासन ने किसी भी किसान नेता को दिल्ली पहुंचने का अवसर नहीं दिया।
ज्ञानेन्द्र त्यागी ने कहा कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था किसानों की जायज मांगों के समर्थन में हमेशा उनके साथ खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को अनदेखा करना देशहित में नहीं है। यदि किसान मजबूत होंगे तभी देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा भी मजबूत रहेगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि सरकार किसानों की बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने और नजरबंद करने का रास्ता अपनाएगी तो इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न करना नहीं था, बल्कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संभावित प्रभावों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। उनका कहना है कि यदि कृषि और डेयरी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के शामिल किया गया तो छोटे और मध्यम किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
संगठन के नेताओं ने सरकार से मांग की कि ट्रेड डील से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले किसान संगठनों से व्यापक संवाद किया जाए और उनकी आशंकाओं का समाधान किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद किसान नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा और वे लोकतांत्रिक तरीके से किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की आवाज को दबाने के बजाय उनसे संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकाला जाए। किसान संगठनों का कहना है कि वे कृषि, दुग्ध और डेयरी क्षेत्र को किसी भी ऐसी ट्रेड डील के दायरे में शामिल किए जाने का विरोध करते रहेंगे, जिससे किसानों के आर्थिक हित प्रभावित होने की आशंका हो।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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