Investment Announcement : बरेली में पशु नस्ल सुधार को लेकर बड़ा शोध, लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ?

Investment Announcement : बरेली में पशु नस्ल सुधार को लेकर बड़ा शोध, लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ?
Investment Announcement : बरेली में पशु नस्ल सुधार को लेकर बड़ा शोध, लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ?

बरेली।

देश के प्रमुख एफएमसीजी समूह बीएल एग्रो की सहायक कंपनी लीड्स जेनेटिक्स गायों की नस्ल सुधार और पशु प्रजनन तकनीक को लेकर बड़े स्तर पर शोध कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ऐसी उन्नत नस्ल विकसित करना है, जिसकी दूध उत्पादन क्षमता मौजूदा नस्लों की तुलना में काफी अधिक हो। कंपनी के इस शोध में सफलता मिलने पर भारत के डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी दिशा में सोमवार को उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित बीएल कामधेनु फॉर्म्स में दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया।

शिखर सम्मेलन के दौरान बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। इस निवेश का उद्देश्य जेनेटिक्स और री-प्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को एकीकृत कर पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए एक 360 डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल विकसित करना है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक आनुवंशिक तकनीक और प्रजनन तकनीकों के बेहतर इस्तेमाल से देश में पशुओं की नस्ल सुधारने के साथ-साथ डेयरी उत्पादन को भी नई दिशा दी जा सकती है।

40 लीटर तक दूध देने वाली नस्ल विकसित करने का लक्ष्य

लीड्स जेनेटिक्स के इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता उच्च दूध उत्पादन क्षमता वाली गायों की नस्ल विकसित करने का प्रयास है। कंपनी के अनुसार शोध के तहत ऐसी गायों को विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, जो एक दिन में लगभग 40 लीटर तक दूध देने में सक्षम हों।

हालांकि यह लक्ष्य शोध और नस्ल विकास की प्रक्रिया से जुड़ा है और वास्तविक उत्पादन अलग-अलग पशुओं, उनकी आनुवंशिक क्षमता, पोषण, स्वास्थ्य और प्रबंधन पर निर्भर करेगा। यदि इस दिशा में अपेक्षित सफलता मिलती है तो भारत के डेयरी उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

भारत दुनिया के प्रमुख दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार को महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के विकास से किसानों को लंबे समय में अधिक दूध उत्पादन का लाभ मिल सकता है।

ब्राजील के मॉडल से प्रेरणा

इस परियोजना के पीछे ब्राजील के पशुपालन और नस्ल सुधार के अनुभव को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्राजील ने आनुवंशिक चयन और आधुनिक पशु प्रजनन तकनीकों के इस्तेमाल के जरिए अपने पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने पर लंबे समय तक काम किया है।

भारत में भी वैज्ञानिक तरीके से स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पशुओं की आनुवंशिक क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। लीड्स जेनेटिक्स का शोध इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। कंपनी का उद्देश्य केवल अधिक दूध देने वाले पशु तैयार करना नहीं, बल्कि पशु प्रजनन, आनुवंशिकी, स्वास्थ्य और डेयरी उत्पादन को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल विकसित करना है।

1500 करोड़ रुपये का निवेश क्यों महत्वपूर्ण

कैटल जीनोमिक्स शिखर सम्मेलन में घोषित 1500 करोड़ रुपये के निवेश को कंपनी की दीर्घकालिक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस निवेश के माध्यम से लीड्स जेनेटिक्स में जेनेटिक्स और री-प्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को एकीकृत करने पर काम किया जाएगा।

जेनेटिक्स के जरिए पशुओं की आनुवंशिक विशेषताओं को समझने और बेहतर गुणों वाले पशुओं के चयन में मदद मिल सकती है। वहीं प्रजनन तकनीक का उद्देश्य बेहतर आनुवंशिक क्षमता को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाना है।

कंपनी की योजना इन दोनों क्षेत्रों को अलग-अलग देखने के बजाय एकीकृत व्यवस्था के रूप में विकसित करने की है। इसके माध्यम से पशु प्रजनन से लेकर दूध उत्पादन तक पूरी प्रक्रिया को एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

360 डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर जोर

लीड्स जेनेटिक्स की प्रस्तावित योजना में 360 डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को विशेष महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य पशुपालन और डेयरी से जुड़े विभिन्न चरणों को एक-दूसरे से जोड़ना है।

इस मॉडल में पशुओं की आनुवंशिक क्षमता, प्रजनन तकनीक, पशु स्वास्थ्य, उत्पादकता और डेयरी क्षेत्र को एक समग्र व्यवस्था के रूप में देखने का प्रयास किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि केवल अधिक दूध उत्पादन पर ध्यान देने के बजाय पूरी पशुपालन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

इस तरह के मॉडल से पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने, प्रजनन व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक बनाने और दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Investment Announcement : बरेली में पशु नस्ल सुधार को लेकर बड़ा शोध, लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ?
Investment Announcement : बरेली में पशु नस्ल सुधार को लेकर बड़ा शोध, लीड्स जेनेटिक्स में 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ?

पशु प्रजनन तकनीक में आधुनिक बदलाव

पशु नस्ल सुधार के क्षेत्र में जीनोमिक्स और आधुनिक प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। जीनोमिक्स के माध्यम से पशुओं की आनुवंशिक संरचना से जुड़े गुणों का अध्ययन किया जा सकता है। इसके आधार पर बेहतर गुणों वाले पशुओं की पहचान और चयन की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

भारत जैसे बड़े देश में पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पशुओं की उत्पादकता में सुधार का सीधा प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि किसी भी नई तकनीक का व्यापक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसका इस्तेमाल वैज्ञानिक मानकों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश में विस्तार की तैयारी

बरेली में विकसित किए जा रहे इस मॉडल को केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित रखने की योजना नहीं है। कंपनी की ओर से महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अलग-अलग राज्यों में पशुपालन की परिस्थितियां, पशुओं की नस्लें, जलवायु और किसानों की जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए किसी भी मॉडल को दूसरे राज्यों में लागू करते समय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव आवश्यक होंगे। कंपनी द्वारा विभिन्न राज्यों में विस्तार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य इस तकनीक और मॉडल को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।

किसानों और डेयरी उद्योग पर संभावित असर

यदि उच्च उत्पादकता वाली नस्ल विकसित करने का शोध सफल होता है और इसे बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो इसका प्रभाव डेयरी उद्योग के साथ-साथ पशुपालकों पर भी पड़ सकता है। अधिक दूध उत्पादन की क्षमता वाले स्वस्थ पशुओं से किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं।

हालांकि दूध उत्पादन केवल नस्ल पर निर्भर नहीं करता। पशु का स्वास्थ्य, संतुलित आहार, स्वच्छता, जल उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाएं और वैज्ञानिक प्रबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए नस्ल सुधार के साथ इन सभी क्षेत्रों को मजबूत करना आवश्यक होगा।

बरेली से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश

कैटल जीनोमिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन ने बरेली को पशु नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है। बीएल कामधेनु फॉर्म्स में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से कंपनी ने अपने शोध और भविष्य की निवेश योजना को सामने रखा।

1500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश इस बात का संकेत है कि निजी क्षेत्र भी पशु आनुवंशिकी और प्रजनन तकनीक को डेयरी क्षेत्र के भविष्य से जोड़कर देख रहा है। यदि शोध के अपेक्षित परिणाम सामने आते हैं, तो इससे भारत में वैज्ञानिक पशुपालन और नस्ल सुधार की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

डेयरी क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद

भारत में दूध उत्पादन पहले से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में पशुओं की आनुवंशिक क्षमता और उत्पादकता में सुधार का प्रयास डेयरी क्षेत्र को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

लीड्स जेनेटिक्स द्वारा किया जा रहा शोध अभी अपनी प्रक्रिया में है। एक दिन में लगभग 40 लीटर तक दूध देने वाली गाय विकसित करने का लक्ष्य कंपनी की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी वास्तविक सफलता शोध के परिणामों और उसके बाद बड़े पैमाने पर अपनाए जाने पर निर्भर करेगी।

बरेली में आयोजित कैटल जीनोमिक्स शिखर सम्मेलन और 1500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा ने देश में पशु नस्ल सुधार को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। यदि जेनेटिक्स, आधुनिक प्रजनन तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन को प्रभावी तरीके से एक साथ लाया जाता है, तो आने वाले समय में भारतीय डेयरी उद्योग की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इसके महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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