IRS: अधिकारी एकता बिश्नोई ने अमेरिका में रचा इतिहास, वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक ?

IRS: अधिकारी एकता बिश्नोई ने अमेरिका में रचा इतिहास, वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक
IRS: अधिकारी एकता बिश्नोई ने अमेरिका में रचा इतिहास, वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक

सरकारी जिम्मेदारियों के साथ खेल के मैदान में भी दिखाया

दम, 362.5 किलोग्राम वजन उठाकर जापान और कनाडा की प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ा भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी एकता बिश्नोई ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भारत का गौरव बढ़ाते हुए अमेरिका में आयोजित ‘वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप’ में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। इस उपलब्धि के साथ वह मास्टर्स-2 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पावरलिफ्टर बन गई हैं। उनकी इस सफलता को भारतीय खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

एकता बिश्नोई ने प्रतियोगिता में कुल 362.5 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी ताकत और तकनीकी दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जापान और कनाडा की मजबूत प्रतिस्पर्धियों के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी जीत केवल शारीरिक शक्ति का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे लंबे समय का अभ्यास, अनुशासित जीवनशैली, कठिन प्रशिक्षण और लक्ष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता भी शामिल रही।

एकता की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी के रूप में अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ पावरलिफ्टिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में भी लगातार सक्रिय हैं। प्रशासनिक दायित्वों और खेल प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और नियमित मेहनत से कठिन लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है।

अमेरिका में भारत का परचम लहराया

अमेरिका के नेवादा राज्य के रेनो शहर में आयोजित इस चैंपियनशिप में एकता बिश्नोई ने तीनों प्रमुख स्पर्धाओं—स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट—में शानदार प्रदर्शन किया। इन स्पर्धाओं में उनके प्रदर्शन ने उन्हें प्रतियोगिता में मजबूत स्थिति दिलाई और अंततः उन्होंने स्वर्णिम सफलता हासिल की।

पावरलिफ्टिंग ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ी को निर्धारित तकनीक और नियमों के अनुसार अधिकतम वजन उठाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। इसमें केवल ताकत ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि संतुलन, तकनीक, एकाग्रता और सही समय पर सही प्रयास करना भी जरूरी होता है।

एकता ने इन सभी पहलुओं पर अपनी पकड़ दिखाते हुए कुल 362.5 किलोग्राम वजन उठाया। जापान और कनाडा की प्रतिस्पर्धियों के बीच उनका प्रदर्शन भारत के लिए गौरव का विषय बना।

 स्क्वाट में बनाई 20 किलोग्राम की बढ़त

एकता बिश्नोई की सफलता के पीछे प्रभावी रणनीति की भी अहम भूमिका रही। उनके कोच सुनील कुमार के अनुसार, स्क्वाट स्पर्धा समाप्त होने तक एकता ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 20 किलोग्राम की निर्णायक बढ़त बना ली थी।

स्क्वाट पावरलिफ्टिंग की प्रमुख स्पर्धाओं में से एक है। इसमें खिलाड़ी को वजन के साथ निर्धारित गहराई तक बैठकर फिर खड़ा होना होता है। इसके लिए पैरों की ताकत, शरीर का संतुलन और तकनीकी दक्षता बेहद महत्वपूर्ण हैं।

स्क्वाट में मिली बढ़त को एकता ने बेंच प्रेस के दौरान भी बनाए रखा। बेंच प्रेस में खिलाड़ी पीठ के बल बेंच पर लेटकर बारबेल को निर्धारित तरीके से ऊपर उठाता है। इस स्पर्धा में ताकत के साथ शरीर का नियंत्रण और सही तकनीक आवश्यक होती है।

एकता ने दबाव के बीच अपना प्रदर्शन स्थिर रखा और मुकाबले में अपनी बढ़त को कायम रखा। इसके बाद डेडलिफ्ट में उनके प्रदर्शन ने जीत को निर्णायक रूप दिया।

 150 किलोग्राम की डेडलिफ्ट से पक्की की जीत

प्रतियोगिता के अंतिम चरण में डेडलिफ्ट एकता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। इस स्पर्धा में खिलाड़ी जमीन से बारबेल उठाकर सीधे खड़े होने का प्रयास करता है। इसमें शरीर के कई प्रमुख मांसपेशी समूहों की ताकत और तकनीकी नियंत्रण की आवश्यकता होती है।

एकता ने 150 किलोग्राम की सफल डेडलिफ्ट लगाकर अपनी ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की। यह प्रदर्शन उनके प्रशिक्षण, आत्मविश्वास और प्रतियोगिता के दौरान सही रणनीति अपनाने का परिणाम रहा।

उनकी सफलता यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हर प्रयास महत्वपूर्ण होता है। खिलाड़ी को अपनी क्षमता के अनुसार वजन चुनने, प्रतिद्वंद्वियों के प्रदर्शन पर नजर रखने और उपलब्ध बढ़त को बनाए रखने के लिए सोच-समझकर निर्णय लेने होते हैं।

एकता ने इसी अनुशासन और रणनीतिक तैयारी के दम पर तीन स्वर्ण पदक हासिल किए और मास्टर्स-2 श्रेणी में ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की।

IRS: अधिकारी एकता बिश्नोई ने अमेरिका में रचा इतिहास, वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक
IRS: अधिकारी एकता बिश्नोई ने अमेरिका में रचा इतिहास, वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक
 कोच को वीजा नहीं मिला, फिर भी नहीं टूटा हौसला

एकता बिश्नोई की सफलता की कहानी में एक चुनौतीपूर्ण पहलू भी रहा। प्रतियोगिता से ठीक पहले उनके कोच सुनील कुमार को अमेरिका का वीजा नहीं मिल सका। इससे उनके लिए प्रतियोगिता स्थल पर व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन देना संभव नहीं हो पाया।

हालांकि, इस बाधा के बावजूद एकता ने अपनी तैयारी और लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से कोच सुनील कुमार से मार्गदर्शन प्राप्त किया। वहीं, टीम अधिकारी बीनू इब्राहिम ने प्रतियोगिता स्थल पर मौजूद रहकर उन्हें आवश्यक सहयोग दिया।

इस तरह दूर से मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन और मौके पर उपलब्ध सहयोग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ। एकता ने अपनी तैयारी पर भरोसा रखा और प्रतियोगिता में तय रणनीति के अनुसार प्रदर्शन किया।

यह घटनाक्रम खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अप्रत्याशित परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

 दिल्ली में प्रशिक्षण और अनुशासित तैयारी

एकता बिश्नोई नई दिल्ली के नेताजी जिम में कोच सुनील कुमार के मार्गदर्शन में पावरलिफ्टिंग का अभ्यास करती हैं। उनकी तैयारी में नियमित प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तरीके से अभ्यास और प्रतियोगिता के लिए लक्ष्य आधारित रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया है।

पावरलिफ्टिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए लंबे समय तक लगातार अभ्यास करना पड़ता है। खिलाड़ियों को अपनी ताकत बढ़ाने के साथ-साथ तकनीक में सुधार, शरीर की रिकवरी और मानसिक तैयारी पर भी ध्यान देना होता है।

प्रतियोगिता के दौरान सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि खिलाड़ी अपनी ऊर्जा का सही उपयोग करे और प्रत्येक प्रयास के लिए पूरी तरह तैयार रहे। एकता के प्रदर्शन से पता चलता है कि व्यवस्थित प्रशिक्षण और रणनीति किसी खिलाड़ी को बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकते हैं।

उनके प्रैक्टिस पार्टनर अजय तोमर ने भी प्रतियोगिता से पहले की तैयारी को लेकर विश्वास व्यक्त किया था। टीम का लक्ष्य भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना था, जिसे एकता ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरा किया।

 सरकारी सेवा और खेल के बीच संतुलन की मिसाल

एकता बिश्नोई की उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वह भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी हैं और अपनी सरकारी जिम्मेदारियों के साथ कठिन खेल प्रशिक्षण भी जारी रखती हैं।

सरकारी सेवा में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ नियमित अभ्यास के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। इसके लिए समय प्रबंधन, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता की जरूरत होती है।

एकता ने अपनी उपलब्धि से यह दिखाया है कि पेशेवर जीवन और खेल के प्रति जुनून को उचित योजना के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। उनका प्रदर्शन उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है, जो नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने खेल अथवा फिटनेस संबंधी लक्ष्यों को पीछे छोड़ देते हैं।

उनकी सफलता यह संदेश भी देती है कि किसी नई चुनौती को स्वीकार करने और अपनी क्षमता को विकसित करने के लिए उम्र या पेशे को अपने रास्ते की अंतिम सीमा नहीं मानना चाहिए। सही प्रशिक्षण, स्वास्थ्य का ध्यान और निरंतर अभ्यास व्यक्ति को नए मुकाम तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं एकता बिश्नोई

एकता बिश्नोई की ऐतिहासिक उपलब्धि महिला खिलाड़ियों के लिए भी उत्साहवर्धक है। पावरलिफ्टिंग जैसे खेल में महिलाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि खेलों में महिलाओं के लिए विविध अवसर मौजूद हैं।

उनकी सफलता महिलाओं को अपनी शारीरिक क्षमता पर भरोसा करने, फिटनेस को प्राथमिकता देने और नए खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में सुरक्षित प्रशिक्षण, सही तकनीक और प्रशिक्षित कोच का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

एकता की उपलब्धि को केवल पदकों की संख्या से नहीं, बल्कि उस मेहनत और निरंतरता से भी समझा जाना चाहिए, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया। सरकारी सेवा के साथ खेल के प्रति उनका समर्पण उन लोगों के लिए एक उदाहरण है, जो अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच अपने लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।

भारत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि

वर्ल्ड मास्टर्स क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीतकर एकता बिश्नोई ने भारत का नाम रोशन किया है। कुल 362.5 किलोग्राम वजन उठाना, जापान और कनाडा की प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ना और मास्टर्स-2 श्रेणी में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनना उनकी उपलब्धि को विशेष बनाता है।

उनकी यह जीत मेहनत, अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास की ताकत को दर्शाती है। कोच को वीजा न मिलने जैसी चुनौती के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और वीडियो कॉल के माध्यम से मिले मार्गदर्शन तथा टीम के सहयोग से लक्ष्य हासिल किया।

एकता बिश्नोई की सफलता का संदेश स्पष्ट है—जिम्मेदारियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और सही रणनीति के सहारे नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का विषय है और देश की महिलाओं सहित युवाओं को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

 

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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