It’s gone today : टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पिलखुवा में 20 क्षय रोगियों को पोषण किट वितरित की गई आज

हापुड़, 20 जुलाई 2026। भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत तथा उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के क्रम में सोमवार को पिलखुवा नगर पालिका परिषद सभागार में टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित मरीजों के लिए पोषण आहार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी रोगियों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना, उन्हें नियमित उपचार के लिए प्रेरित करना तथा समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद पिलखुवा के अध्यक्ष विभु बंसल ने 20 क्षय रोगियों को पोषण आहार किट वितरित करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को केवल दवा से ही नहीं, बल्कि संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, सकारात्मक सोच और समय पर इलाज के माध्यम से पूरी तरह हराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार टीबी उन्मूलन के लिए लगातार प्रभावी प्रयास कर रही हैं और वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
अपने संबोधन में विभु बंसल ने कहा कि टीबी रोगियों के लिए प्रोटीन युक्त और संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है। नियमित दवा के साथ पौष्टिक भोजन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मरीज को तेजी से स्वस्थ होने में सहायता करता है। उन्होंने कहा कि टीबी के मरीजों को किसी प्रकार की सामाजिक उपेक्षा का सामना नहीं करना चाहिए, बल्कि समाज को उनके साथ सहयोग और संवेदनशीलता का व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने समाज के सक्षम और जागरूक नागरिकों से ‘निक्षय मित्र’ बनने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि निक्षय मित्र योजना के माध्यम से कोई भी व्यक्ति, संस्था या सामाजिक संगठन टीबी रोगियों को पोषण आहार, आवश्यक सामग्री और मानसिक सहयोग प्रदान कर सकता है। यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय मिशन है।
कार्यक्रम के दौरान जनपद स्तरीय जिला पीपीएम (पब्लिक-प्राइवेट मिक्स) कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने उपस्थित लोगों को टीबी रोग के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहती है, वजन तेजी से कम होने लगता है, लगातार बुखार आता है, रात में अत्यधिक पसीना आता है या भूख कम लगती है, तो उसे इसे सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी अवश्य है, लेकिन यह पूरी तरह उपचार योग्य है। यदि मरीज समय पर जांच कराकर चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन करता है और उपचार बीच में नहीं छोड़ता, तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि उपचार अधूरा छोड़ने से बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है और दवाओं का असर भी कम हो सकता है।
सुशील चौधरी ने जानकारी दी कि सरकार द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार की सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। मरीजों को किसी भी प्रकार की जांच या दवा के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति किसी भी मरीज के उपचार में बाधा न बने।
इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने भी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार टीबी रोगियों को मुफ्त जांच और उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र मरीज के बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजती है। इस सहायता का उद्देश्य मरीजों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उपचार के दौरान उनके पोषण स्तर को बेहतर बनाए रखना है।

डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी के मरीजों से भेदभाव न करें, बल्कि उन्हें समय पर उपचार लेने के लिए प्रेरित करें और मानसिक रूप से सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही टीबी उन्मूलन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को टीबी से बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्वच्छ वातावरण, संतुलित भोजन, अच्छी जीवनशैली, समय पर जांच और नियमित उपचार से टीबी जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि यदि परिवार या आसपास किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर जांच कराएं।
पोषण आहार वितरण कार्यक्रम के दौरान लाभार्थी मरीजों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उपचार के साथ पौष्टिक आहार मिलने से उन्हें बीमारी से लड़ने में काफी सहायता मिलेगी। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग देने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर सभासद पति सचिन पुंडीर, स्वास्थ्य विभाग से विजय कुमार सहित नगर पालिका परिषद एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि टीबी अब लाइलाज नहीं, बल्कि पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच, नियमित दवा, पौष्टिक भोजन और समाज के सहयोग से टीबी को हराया जा सकता है। सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर और जागरूकता फैलाकर ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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