
मथुरा।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यप्रणाली और विभिन्न शिक्षक एवं प्रधानाचार्यों से जुड़े प्रकरणों के निस्तारण में हो रही देरी को लेकर आज सेठ बी.एन. पोद्दार इंटर कॉलेज, मथुरा में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ एवं प्रधानाचार्य परिषद के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की सर्वदलीय संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की लंबित समस्याओं, कार्यालयीय कार्यप्रणाली तथा मांगों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता श्री अयोध्या प्रसाद अग्रवाल एवं श्री विनोद कुमार उपाध्याय ने की।
बैठक में उपस्थित विभिन्न शिक्षक संगठनों एवं प्रधानाचार्य परिषद के पदाधिकारियों ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी-अपनी बात रखी। पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से संबंधित अनेक प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं, जिसके कारण संबंधित कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में वक्ताओं ने अपनी समस्याओं और पीड़ा को साझा करते हुए मांग की कि लंबित प्रकरणों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सभी संबंधित शिक्षक संगठनों एवं प्रधानाचार्य परिषद की ओर से संयुक्त रूप से प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर अपनी मांगों को जिला विद्यालय निरीक्षक के समक्ष रखा जाएगा। इसके माध्यम से लंबित प्रकरणों के निस्तारण और कार्यालयीय कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की जाएगी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि यदि मांगों का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया जाता है, तो शिक्षक संगठन एवं प्रधानाचार्य परिषद संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन करेंगे तथा ज्ञापन देकर उच्चाधिकारियों को भी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।
बैठक में मुख्य रूप से शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों से संबंधित पूर्व एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली), जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि), अवशेष देयकों, पेंशन, प्रोन्नत वेतनमान तथा चयन वेतनमान से जुड़े लंबित प्रकरणों को उठाया गया। पदाधिकारियों ने इन सभी मामलों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में मांग की गई कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए सिटीजन चार्टर लागू किया जाए। इसके अंतर्गत प्रत्येक कार्य के निस्तारण की समयसीमा निर्धारित हो, ताकि संबंधित शिक्षक और कर्मचारी अपने प्रकरण की स्थिति तथा उसके समाधान की संभावित अवधि की जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही कार्यालय में प्राप्त होने वाले पत्रों एवं प्रत्यावेदनों के निस्तारण के लिए भी स्पष्ट चार्टर लागू करने की मांग की गई।
पदाधिकारियों ने कहा कि सिटीजन चार्टर को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में प्रमुखता से प्रदर्शित कराया जाना चाहिए, जिससे सभी शिक्षक, प्रधानाचार्य और संबंधित कर्मचारी कार्यालय की निर्धारित प्रक्रिया एवं समयसीमा से परिचित हो सकें। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक प्रकरण के निस्तारण की समयसीमा और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी, तो कार्यालयीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा अनावश्यक विलंब को कम करने में मदद मिलेगी।

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि
शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की सेवा संबंधी समस्याओं का समय पर समाधान होना आवश्यक है। पेंशन, जीपीएफ, एनपीएस, अवशेष भुगतान तथा वेतनमान से जुड़े मामले कर्मचारियों के सेवा लाभों से संबंधित हैं। ऐसे मामलों के लंबित रहने से संबंधित कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए कार्यालय स्तर पर इन समस्याओं के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैठक में संगठनात्मक स्तर पर संयुक्त संघर्ष को प्रभावी बनाने के लिए सर्वसम्मति से डॉ. अजय कृष्ण सारस्वत को संयुक्त संघर्ष समिति का संयोजक बनाया गया। वहीं श्रीमती रुमा देवी, श्री राजेश कुमार सिंह राय, डॉ. मनवीर सिंह, डॉ. दिनेश राणा एवं संजय पचौरी को सहसंयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संघर्ष समिति में प्रत्येक संगठन के जिलाध्यक्ष एवं जिला मंत्री सदस्य होंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से सभी संगठनों को संयुक्त रूप से अपनी समस्याएं रखने और मांगों के निस्तारण के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि विभिन्न संगठनों की एकजुटता से शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जा सकेगा।
बैठक में संरक्षक के रूप में श्री अयोध्या प्रसाद अग्रवाल, प्रांतीय कोषाध्यक्ष, श्री सुरेंद्र शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष, तथा श्री विनोद कुमार उपाध्याय एवं श्री के.पी. सिंह, पूर्व अध्यक्ष, उपस्थित रहे। बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक का संचालन वीरेन्द्र कुमार उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर अनिल सिंह छौंकर, मनोज छौंकर, जोगेन्द्र सिंह, चंद्रभान यादव, सुरेश चंद्र तोमर, शिव कुमार सिंह, डॉ. शिवाजी सिंह, दिवाकर चौबे, प्रमोद गौतम, प्रमोद चतुर्वेदी, रोहताश सोलंकी, सूरज पाल सिंह एवं प्रदीप शर्मा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए संयुक्त रूप से प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की। सर्वसम्मति से तय किया गया कि पहले संयुक्त प्रत्यावेदन के माध्यम से मांगों को जिला विद्यालय निरीक्षक के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद मांगों पर होने वाली कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
शिक्षक संगठनों एवं प्रधानाचार्य परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से संबंधित समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कराना तथा कार्यालयीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देना है। बैठक में गठित संयुक्त संघर्ष समिति के माध्यम से सभी संगठन एक मंच पर आकर अपनी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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