learning environment : रेडक्रॉस व सहयोगी संस्थाओं का व्यापक जनजागरूकता अभियान, बच्चों को दी जीवन रक्षक व पर्यावरण शिक्षा ?

learning environment : रेडक्रॉस व सहयोगी संस्थाओं का व्यापक जनजागरूकता अभियान, बच्चों को दी जीवन रक्षक व पर्यावरण शिक्षा

learning environment : रेडक्रॉस व सहयोगी संस्थाओं का व्यापक जनजागरूकता अभियान, बच्चों को दी जीवन रक्षक व पर्यावरण शिक्षा
learning environment : रेडक्रॉस व सहयोगी संस्थाओं का व्यापक जनजागरूकता अभियान, बच्चों को दी जीवन रक्षक व पर्यावरण शिक्षा

दिनांक 06/05/2026 की सुबह 08 बजे इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती और दि होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक जनजागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के माध्यम से किया गया, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों और समाज को पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन रक्षक कौशलों के प्रति जागरूक करना था।

इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने किया, जो इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन, उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तथा आरोग्य भारती कानपुर प्रांत में पर्यावरण प्रमुख एवं जिला सचिव के रूप में भी कार्यरत हैं। उन्होंने इस अवसर पर दो शैक्षणिक संस्थानों—मां रामश्री उदयभान सिंह इंटर कॉलेज और श्री डी पी सिंह पब्लिक स्कूल—में विद्यार्थियों और शिक्षकों को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण विषय से की गई। डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने छात्रों को समझाया कि पानी का अनावश्यक उपयोग भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से “वाटर बेल” के उपयोग की अपील की, ताकि स्कूलों में समय-समय पर बच्चों को पानी बचाने की याद दिलाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर पानी न बहाया जाए और घरों में आरओ (RO) से निकलने वाले व्यर्थ पानी को इकट्ठा करके पौधों की सिंचाई या सफाई जैसे कार्यों में उपयोग किया जाए।

इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को एक जल संरक्षण जागरूकता पत्रक भी प्रदान किया और आग्रह किया कि इसे व्हाट्सएप के माध्यम से अभिभावकों तक पहुंचाया जाए ताकि समाज के हर स्तर पर जागरूकता फैल सके। उनका मानना था कि यदि बच्चे और उनके परिवार दोनों मिलकर प्रयास करें, तो जल संकट की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

इसके बाद पर्यावरण संरक्षण के तहत “पॉलिथीन हटाओ, इकोब्रिक्स बनाओ” अभियान चलाया गया। छात्रों को बताया गया कि प्लास्टिक और पॉलिथीन पर्यावरण के लिए बेहद हानिकारक हैं। इन्हें सीधे फेंकने के बजाय इकोब्रिक्स बनाने की विधि समझाई गई। इसमें प्लास्टिक कचरे को बोतलों में भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक से कचरा भी कम होता है और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचता।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आपातकालीन चिकित्सा प्रशिक्षण था। डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने छात्रों और शिक्षकों को सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाए, तो तुरंत सीपीआर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने समझाया कि 1 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के लिए 30 बार छाती पर दबाव और 2 बार सांस देना चाहिए, जबकि 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के लिए 15 बार दबाव और 2 बार सांस दी जाती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह प्रक्रिया अस्पताल पहुंचने से पहले जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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इसके साथ ही नशामुक्ति अभियान के तहत छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि नशा न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि परिवार और समाज पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। छात्रों को प्रेरित किया गया कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहें और दूसरों को भी इसके खिलाफ जागरूक करें।

स्वास्थ्य जागरूकता के हिस्से के रूप में चिकनपॉक्स से बचाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए 325 बच्चों को होमियोपैथिक औषधि भी वितरित की गई। यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए की गई, ताकि वे मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।

इसके अलावा हीटवेव से बचाव के लिए भी विशेष निर्देश दिए गए। छात्रों को बताया गया कि गर्मी के मौसम में सिर को ढककर रखना, टोपी का उपयोग करना, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीना और धूप में अधिक देर तक न रहना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

इस पूरे कार्यक्रम में स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। ध्यान सिंह, केशभान सिंह, ज्ञान सिंह, संदीप कुमार, माया द्विवेदी और सुमन यादव सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। साथ ही प्रेमचंद्र मौर्य ने भी कार्यक्रम में सहयोग दिया।

विद्यालयों में आयोजित इस कार्यक्रम को छात्रों ने अत्यंत उत्साह के साथ स्वीकार किया। बच्चों ने न केवल प्रशिक्षण में भाग लिया बल्कि प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा भी व्यक्त की। शिक्षकों ने भी इस पहल को अत्यंत उपयोगी और समय की आवश्यकता बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्राथमिक चिकित्सा जैसे विषय आज के समय में अत्यंत आवश्यक हो गए हैं।

अंततः, यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक समग्र जागरूकता अभियान था जिसने बच्चों को पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति संवेदनशील बनाया। डॉ अनुराग श्रीवास्तव और उनकी टीम द्वारा किया गया यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में भी सकारात्मक बदलाव की दिशा में योगदान देगा।

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