Mutation of Title : अंश निर्धारण से उत्तराधिकार, बंटवारा और नामांतरण की प्रक्रिया होगी सरल, डीएम ने 30 दिन में निस्तारण के दिए निर्देश ?

Mutation of Title : अंश निर्धारण से उत्तराधिकार, बंटवारा और नामांतरण की प्रक्रिया होगी सरल, डीएम ने 30 दिन में निस्तारण के दिए निर्देश ?
Mutation of Title : अंश निर्धारण से उत्तराधिकार, बंटवारा और नामांतरण की प्रक्रिया होगी सरल, डीएम ने 30 दिन में निस्तारण के दिए निर्देश ?

हापुड़।

जनपद में भूमि एवं संपत्ति से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के उद्देश्य से अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। 13 अगस्त 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में अंश निर्धारण की प्रगति और लंबित प्रकरणों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों को शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुरूप अभियान चलाकर अंश निर्धारण की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि एवं संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रत्येक खातेदार, वारिस या सहखातेदार के हिस्से का स्पष्ट निर्धारण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना बेहद आवश्यक है। इससे भविष्य में उत्तराधिकार, नामांतरण और बंटवारे से जुड़े मामलों को निस्तारित करने में आसानी होती है। साथ ही भूमि के हिस्से को लेकर होने वाले संभावित विवादों को भी कम किया जा सकता है।

अंश निर्धारण से दूर होंगे भूमि संबंधी विवाद

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि कई मामलों में एक ही भूमि पर एक से अधिक खातेदार या उत्तराधिकारी दर्ज होते हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से का स्पष्ट निर्धारण राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं होने पर भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने कहा कि अंश निर्धारण के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संयुक्त भूमि या संपत्ति में प्रत्येक वारिस अथवा सहखातेदार का कितना हिस्सा है। जब यह जानकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो जाती है तो आगे की प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत आसान हो जाती हैं।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंश निर्धारण की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता के रूप में न लिया जाए, बल्कि इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।

खातेदार की मृत्यु के बाद प्रक्रिया होगी आसान

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि किसी खातेदार की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के दौरान अंश का स्पष्ट निर्धारण महत्वपूर्ण होता है। यदि प्रत्येक उत्तराधिकारी का हिस्सा पहले से स्पष्ट रूप से दर्ज है तो नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी की संभावना कम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के हिस्से को लेकर विवाद कई बार लंबे समय तक चलते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों में सही और स्पष्ट अंश दर्ज होना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुसार जनपद में अंश निर्धारण की प्रक्रिया को अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

सभी तहसीलों में अभियान चलाने के निर्देश

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद हापुड़ की सभी तहसीलों में भूमि और संपत्ति के अंश निर्धारण की कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। अभियान के दौरान लंबित मामलों की पहचान करते हुए उनका नियमानुसार निस्तारण किया जाए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंश निर्धारण से संबंधित प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। जहां आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हों और प्रक्रिया पूरी करने में कोई बाधा न हो, वहां निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अभियान की नियमित समीक्षा की जाए और प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए।

30 दिन के अंदर प्रार्थना पत्रों का निस्तारण

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने बैठक में विशेष रूप से निर्देश दिए कि अंश निर्धारण के लिए प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्रों का 30 दिवस के अंदर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए निर्धारित समय सीमा का गंभीरता से पालन किया जाए। प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच और आवश्यक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

नामांतरण और बंटवारे के मामलों में आएगी तेजी

अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांतरण और बंटवारे से संबंधित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। राजस्व अभिलेखों में प्रत्येक सहखातेदार या वारिस का हिस्सा स्पष्ट होने से आगे की कार्रवाई में सुविधा होगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि अंश निर्धारण का मुख्य उद्देश्य राजस्व अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है। इससे प्रशासन और आम नागरिक दोनों को लाभ होगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने पर विशेष ध्यान दिया जाए। सही रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।

भविष्य के विवादों को रोकने पर जोर

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि अंश निर्धारण हो जाने से भविष्य में भूमि और संपत्ति से जुड़े कई विवादों को रोका जा सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा राजस्व अभिलेख में स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा तो बाद में उत्तराधिकारियों के बीच हिस्सेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति कम होगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल वर्तमान मामलों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों की संभावना को भी कम करना है।

अंश निर्धारण की प्रक्रिया इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को अपने अधिकारों की स्थिति स्पष्ट रूप से पता चल सकेगी।

अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि अंश निर्धारण से जुड़े मामलों में राजस्व अभिलेखों का ध्यानपूर्वक परीक्षण किया जाए। किसी भी मामले में कार्रवाई नियमानुसार और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाए।

उन्होंने कहा कि भूमि और संपत्ति के मामले संवेदनशील होते हैं। इसलिए अधिकारियों को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए।

प्रार्थना पत्रों की जांच के दौरान संबंधित पक्षों को आवश्यक प्रक्रिया और दस्तावेजों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

शासन और राजस्व परिषद के निर्देशों का पालन

जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन और राजस्व परिषद की ओर से अंश निर्धारण को लेकर दिए गए निर्देशों के अनुसार जनपद में अभियान संचालित किया जाए। सभी संबंधित अधिकारी शासनादेश और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिकता है। अंश निर्धारण के मामलों में भी इसी दृष्टिकोण के साथ काम किया जाना चाहिए।

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आम नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ

अंश निर्धारण अभियान का सीधा लाभ उन नागरिकों को मिलेगा जिनकी भूमि संयुक्त रूप से दर्ज है या जिनके परिवार में उत्तराधिकार के बाद हिस्सेदारी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है।

राजस्व अभिलेखों में हिस्सा स्पष्ट होने से नागरिकों को नामांतरण, बंटवारे और उत्तराधिकार संबंधी कार्यवाही में सुविधा मिल सकती है। साथ ही संपत्ति के अधिकारों को लेकर होने वाले विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि राजस्व से संबंधित सेवाएं आम जनता के लिए सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाई जाएं।

लंबित प्रकरणों की समीक्षा

बैठक में जनपद में अंश निर्धारण से संबंधित लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से लंबित मामलों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और समय सीमा के भीतर उनके निस्तारण के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन मामलों में किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेजी समस्या है, उन्हें चिन्हित कर नियमानुसार समाधान किया जाए। अनावश्यक कारणों से किसी भी प्रकरण को लंबित न रखा जाए।

अधिकारियों को नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

प्रशासन की प्राथमिकता समयबद्ध निस्तारण

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों से जुड़े राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंश निर्धारण के प्रार्थना पत्रों को 30 दिन की निर्धारित अवधि में निस्तारित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि समय पर राजस्व अभिलेखों में अंश का अंकन होने से लोगों को आगे की प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी और भूमि संबंधी विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुरूप जनपद की सभी तहसीलों में अंश निर्धारण का अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जाए। लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए और प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर 30 दिवस के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि “अंश निर्धारण होने से भविष्य में विवादों की संभावना कम होगी तथा उत्तराधिकार, नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों का निस्तारण भी सरल एवं शीघ्र हो सकेगा।” प्रशासन का उद्देश्य राजस्व अभिलेखों को अधिक स्पष्ट, अद्यतन और व्यवस्थित बनाकर आम नागरिकों को भूमि एवं संपत्ति संबंधी मामलों में सुविधा प्रदान करना है।

हापुड़। जनपद में भूमि एवं संपत्ति से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के उद्देश्य से अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। 13 अगस्त 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में अंश निर्धारण की प्रगति और लंबित प्रकरणों की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों को शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुरूप अभियान चलाकर अंश निर्धारण की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि एवं संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रत्येक खातेदार, वारिस या सहखातेदार के हिस्से का स्पष्ट निर्धारण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना बेहद आवश्यक है। इससे भविष्य में उत्तराधिकार, नामांतरण और बंटवारे से जुड़े मामलों को निस्तारित करने में आसानी होती है। साथ ही भूमि के हिस्से को लेकर होने वाले संभावित विवादों को भी कम किया जा सकता है।

अंश निर्धारण से दूर होंगे भूमि संबंधी विवाद

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि कई मामलों में एक ही भूमि पर एक से अधिक खातेदार या उत्तराधिकारी दर्ज होते हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से का स्पष्ट निर्धारण राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं होने पर भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने कहा कि अंश निर्धारण के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संयुक्त भूमि या संपत्ति में प्रत्येक वारिस अथवा सहखातेदार का कितना हिस्सा है। जब यह जानकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो जाती है तो आगे की प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत आसान हो जाती हैं।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अंश निर्धारण की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता के रूप में न लिया जाए, बल्कि इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।

खातेदार की मृत्यु के बाद प्रक्रिया होगी आसान

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि किसी खातेदार की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के दौरान अंश का स्पष्ट निर्धारण महत्वपूर्ण होता है। यदि प्रत्येक उत्तराधिकारी का हिस्सा पहले से स्पष्ट रूप से दर्ज है तो नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी की संभावना कम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के हिस्से को लेकर विवाद कई बार लंबे समय तक चलते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों में सही और स्पष्ट अंश दर्ज होना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुसार जनपद में अंश निर्धारण की प्रक्रिया को अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

सभी तहसीलों में अभियान चलाने के निर्देश

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद हापुड़ की सभी तहसीलों में भूमि और संपत्ति के अंश निर्धारण की कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। अभियान के दौरान लंबित मामलों की पहचान करते हुए उनका नियमानुसार निस्तारण किया जाए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंश निर्धारण से संबंधित प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। जहां आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हों और प्रक्रिया पूरी करने में कोई बाधा न हो, वहां निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अभियान की नियमित समीक्षा की जाए और प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए।

30 दिन के अंदर प्रार्थना पत्रों का निस्तारण

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने बैठक में विशेष रूप से निर्देश दिए कि अंश निर्धारण के लिए प्राप्त होने वाले प्रार्थना पत्रों का 30 दिवस के अंदर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए निर्धारित समय सीमा का गंभीरता से पालन किया जाए। प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच और आवश्यक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

नामांतरण और बंटवारे के मामलों में आएगी तेजी

अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांतरण और बंटवारे से संबंधित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। राजस्व अभिलेखों में प्रत्येक सहखातेदार या वारिस का हिस्सा स्पष्ट होने से आगे की कार्रवाई में सुविधा होगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि अंश निर्धारण का मुख्य उद्देश्य राजस्व अभिलेखों को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है। इससे प्रशासन और आम नागरिक दोनों को लाभ होगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने पर विशेष ध्यान दिया जाए। सही रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।

भविष्य के विवादों को रोकने पर जोर

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि अंश निर्धारण हो जाने से भविष्य में भूमि और संपत्ति से जुड़े कई विवादों को रोका जा सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा राजस्व अभिलेख में स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा तो बाद में उत्तराधिकारियों के बीच हिस्सेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति कम होगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल वर्तमान मामलों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों की संभावना को भी कम करना है।

अंश निर्धारण की प्रक्रिया इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को अपने अधिकारों की स्थिति स्पष्ट रूप से पता चल सकेगी।

अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि अंश निर्धारण से जुड़े मामलों में राजस्व अभिलेखों का ध्यानपूर्वक परीक्षण किया जाए। किसी भी मामले में कार्रवाई नियमानुसार और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाए।

उन्होंने कहा कि भूमि और संपत्ति के मामले संवेदनशील होते हैं। इसलिए अधिकारियों को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए।

प्रार्थना पत्रों की जांच के दौरान संबंधित पक्षों को आवश्यक प्रक्रिया और दस्तावेजों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

शासन और राजस्व परिषद के निर्देशों का पालन

जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन और राजस्व परिषद की ओर से अंश निर्धारण को लेकर दिए गए निर्देशों के अनुसार जनपद में अभियान संचालित किया जाए। सभी संबंधित अधिकारी शासनादेश और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्यवाही सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिकता है। अंश निर्धारण के मामलों में भी इसी दृष्टिकोण के साथ काम किया जाना चाहिए।

आम नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ

अंश निर्धारण अभियान का सीधा लाभ उन नागरिकों को मिलेगा जिनकी भूमि संयुक्त रूप से दर्ज है या जिनके परिवार में उत्तराधिकार के बाद हिस्सेदारी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है।

राजस्व अभिलेखों में हिस्सा स्पष्ट होने से नागरिकों को नामांतरण, बंटवारे और उत्तराधिकार संबंधी कार्यवाही में सुविधा मिल सकती है। साथ ही संपत्ति के अधिकारों को लेकर होने वाले विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि राजस्व से संबंधित सेवाएं आम जनता के लिए सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाई जाएं।

लंबित प्रकरणों की समीक्षा

बैठक में जनपद में अंश निर्धारण से संबंधित लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से लंबित मामलों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और समय सीमा के भीतर उनके निस्तारण के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन मामलों में किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेजी समस्या है, उन्हें चिन्हित कर नियमानुसार समाधान किया जाए। अनावश्यक कारणों से किसी भी प्रकरण को लंबित न रखा जाए।

अधिकारियों को नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

प्रशासन की प्राथमिकता समयबद्ध निस्तारण

जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों से जुड़े राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंश निर्धारण के प्रार्थना पत्रों को 30 दिन की निर्धारित अवधि में निस्तारित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि समय पर राजस्व अभिलेखों में अंश का अंकन होने से लोगों को आगे की प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी और भूमि संबंधी विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन एवं राजस्व परिषद के निर्देशों के अनुरूप जनपद की सभी तहसीलों में अंश निर्धारण का अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जाए। लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए और प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर 30 दिवस के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि “अंश निर्धारण होने से भविष्य में विवादों की संभावना कम होगी तथा उत्तराधिकार, नामांतरण और बंटवारे के प्रकरणों का निस्तारण भी सरल एवं शीघ्र हो सकेगा।” प्रशासन का उद्देश्य राजस्व अभिलेखों को अधिक स्पष्ट, अद्यतन और व्यवस्थित बनाकर आम नागरिकों को भूमि एवं संपत्ति संबंधी मामलों में सुविधा प्रदान करना है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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