
बांदा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बांदा-कानपुर प्रांत की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह-2026 का भव्य आयोजन किया गया। समारोह का उद्देश्य शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना रहा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार, परिश्रम और राष्ट्रहित की भावना को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में शिक्षक विधायक डॉ. बाबूलाल तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। चित्रकूट धाम मंडल के मंडलायुक्त अजीत कुमार की विशेष उपस्थिति रही। प्रांत संगठन मंत्री मनीष राय ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्यानिकी विभाग के अधिष्ठाता डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी ने की। इस अवसर पर प्रांत प्रतियोगी छात्र कार्य प्रमुख डॉ. अशोक परिहार और जिला प्रमुख डॉ. शैलेश सिंह की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन आयुषी त्रिपाठी ने किया। समारोह की शुरुआत परिषद गीत और मंच आमंत्रण के साथ हुई। इसके बाद उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया गया और उनका स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। जिला प्रमुख की ओर से प्रस्ताविकी प्रस्तुत की गई, जिसमें कार्यक्रम के उद्देश्य और शिक्षक सम्मान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
मुख्य वक्ता मनीष राय ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल विद्यार्थियों को विषयों का ज्ञान देना तक सीमित नहीं है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय में प्राप्त शिक्षा और शिक्षक का मार्गदर्शन विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य तैयार करने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में अनुशासन, शील, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी न केवल अपने करियर के लिए तैयार होते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने में भी सक्षम बनते हैं। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को समाज निर्माण की आधारशिला बताया।
विशेष अतिथि मंडलायुक्त अजीत कुमार ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी अपने आचरण और व्यवहार में भी शिक्षा के मूल्यों को उतारें। उन्होंने राष्ट्रहित की भावना को जीवन का हिस्सा बनाने और समाज के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही।
मुख्य अतिथि शिक्षक विधायक डॉ. बाबूलाल तिवारी ने शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और संस्कारित समाज की नींव विद्यालयों तथा शिक्षकों के माध्यम से तैयार होती है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और सही दिशा चुनने में मदद करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करने का आह्वान किया।

डॉ. बाबूलाल तिवारी ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ उठाने तथा जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
समारोह के दौरान विभिन्न शिक्षकों को उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के प्रति परिषद की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस अवसर पर शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर समाज के निर्माण के लिए अपनी भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं। उनके द्वारा विद्यार्थियों को दिया गया ज्ञान और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए शिक्षकों के सम्मान को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह समाज में शिक्षा और शिक्षक के महत्व को स्वीकार करने का अवसर भी है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से कहा गया कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत करने के साथ ही उनमें संस्कार और अनुशासन विकसित करने में सहायक होते हैं। परिषद का प्रयास है कि युवा पीढ़ी शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी को भी समझे। शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
समारोह के अंत में डॉ. अशोक परिहार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद अधिष्ठाता डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी के समापन उद्बोधन के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. पवन त्रिपाठी, प्रांत एग्री विजन प्रमुख डॉ. विज्ञा मिश्रा, नगर अध्यक्ष नवीन पाण्डेय, नगर उपाध्यक्ष बाला जी विक्रम, विभाग संगठन मंत्री शिवम पाण्डेय, कृष्णा तोमर, वीरेंद्र दीक्षित, धीरेन्द्र सिंह, गोविंद, सुभाष, कार्तिकेय, रामेंद्र, प्रवीण, शैलेन्द्र, अम्बिका, अभय सोनी, अंश पुष्पक, अथर्व, अक्षय, निखिल, पवन, स्नेहा नामदेव, रक्षा त्रिपाठी, आलोक मिश्रा, प्रमोद तिवारी, रोहित पाण्डेय सहित सैकड़ों शिक्षक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह जैसे आयोजन समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों में ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने का माध्यम हैं। परिषद आगे भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास करेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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