
सहारनपुर।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद की न्यायाधीश एवं सत्र संभाग सहारनपुर की प्रशासनिक न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती मंजू रानी चौहान ने सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायालय, सहारनपुर के 12 कक्षीय न्यायालय भवन के वृहद जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने के उपरांत उसका विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा न्यायालय के कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति ने न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जनहितैषी बनाने पर विशेष बल दिया।
लोकार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं औपचारिकताओं के साथ हुआ। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने नवनिर्मित एवं जीर्णोद्धारित भवन का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने भवन में किए गए नवीनीकरण कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर आधारभूत सुविधाएं न्यायिक कार्यों के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आधुनिक एवं सुव्यवस्थित न्यायालय भवन न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय आने वाले वादकारियों के लिए अधिक सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराता है।
12 कक्षीय न्यायालय भवन के व्यापक जीर्णोद्धार के बाद अब यहां न्यायिक कार्य पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे। भवन में न्यायालय कक्षों का नवीनीकरण, आवश्यक मरम्मत, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को उन्नत किया गया है। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाना है।
लोकार्पण समारोह के उपरांत माननीय न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दीवानी कचहरी स्थित न्यायिक अधिकारी सभाकक्ष में समस्त न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, न्यायिक कार्यों के प्रभावी संचालन, अनुशासन, समयबद्ध कार्यप्रणाली तथा न्यायिक दक्षता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक वाद का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर आमजन का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक न्यायिक अधिकारी की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा लेकर आता है। इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ करें। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को कम करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना अपनाई जाए तथा लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बैठक के दौरान न्यायमूर्ति ने न्यायालयों में अनुशासन, समय पालन तथा कार्यकुशलता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की गुणवत्ता केवल निर्णयों से ही नहीं, बल्कि न्यायालय की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और आमजन के प्रति व्यवहार से भी निर्धारित होती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायालय परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश श्री सतेन्द्र कुमार ने न्यायमूर्ति का स्वागत करते हुए न्यायालय भवन के जीर्णोद्धार कार्य तथा न्यायालय की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि भवन के नवीनीकरण से न्यायिक कार्यों के संचालन में उल्लेखनीय सुविधा प्राप्त होगी तथा न्यायालय की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।

इस अवसर पर पीठासीन अधिकारी
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री अम्बर रावत, जिलाधिकारी श्री अरविन्द कुमार चौहान तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अभिनंदन भी उपस्थित रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने तथा न्यायिक प्रक्रियाओं में आवश्यक सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में अपर जिला जज श्री अभय कृष्ण तिवारी, अपर जिला जज श्री मोहम्मद अहमद खान, अपर जिला जज श्री विकास गुप्ता सहित सभी न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में अधिवक्तागण एवं दीवानी कचहरी के कर्मचारी भी समारोह में उपस्थित रहे। सभी ने न्यायालय भवन के जीर्णोद्धार को न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने सभी से आपसी समन्वय, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था तभी प्रभावी बन सकती है जब सभी संबंधित पक्ष अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
उन्होंने न्यायालय परिसर की स्वच्छता, रिकॉर्ड के सुव्यवस्थित रखरखाव, डिजिटल सुविधाओं के अधिकतम उपयोग तथा न्यायिक कार्यों में तकनीक के प्रभावी समावेश पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जा सकता है।
बैठक के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने भी न्यायालय संचालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। न्यायमूर्ति ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और आवश्यक बिंदुओं पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में निरंतर सुधार की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र, सुलभ और प्रभावी न्याय मिल सके।
कार्यक्रम का समापन सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। जिला एवं सत्र न्यायालय के 12 कक्षीय भवन का वृहद जीर्णोद्धार और उसका लोकार्पण सहारनपुर की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न्यायालय की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, न्यायिक कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित होंगे और वादकारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। न्यायपालिका के प्रति आमजन के विश्वास को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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