
हापुड़,
महिलाओं एवं बालिकाओं को संकट की स्थिति में एक ही छत के नीचे त्वरित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित वन स्टॉप सेंटर ‘सखी’ का जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने बुधवार को औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी के अचानक सेंटर पहुंचने से वहां मौजूद कर्मचारियों में सक्रियता दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केंद्र में महिलाओं एवं बालिकाओं को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सेवाओं, कर्मचारियों की उपस्थिति, अभिलेखों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने वन स्टॉप सेंटर में उपलब्ध मेडिकल सहायता, पुलिस सहायता, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय गृह की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जानकारी लेते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि संकट में सेंटर पहुंचने वाली प्रत्येक महिला और बालिका को बिना किसी अनावश्यक देरी के आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल पीड़ित महिलाओं को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा, कानूनी, पुलिस और मनोवैज्ञानिक सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सेंटर में आने वाली पीड़ित महिलाओं से संबंधित अभिलेखों की भी जांच की। उन्होंने आगमन रजिस्टर, सहायता रजिस्टर और रेफरल रिकॉर्ड का अवलोकन किया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से पूछा कि सेंटर पर आने वाले मामलों में किस प्रकार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और कितने प्रकरणों को संबंधित विभागों अथवा संस्थाओं को रेफर किया गया है। उन्होंने लंबित प्रकरणों की स्थिति की भी जानकारी ली और निर्देश दिए कि किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि महिलाओं से संबंधित मामलों में समय का विशेष महत्व होता है। संकट में पहुंची महिला या बालिका को यदि समय पर सहायता नहीं मिलती है तो उसकी समस्या और गंभीर हो सकती है। इसलिए सेंटर पर आने वाले प्रत्येक मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केंद्र में तैनात प्रशासक, केस वर्कर, काउंसलर, नर्स और सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति पंजिका की भी जांच की। उन्होंने यह देखा कि निर्धारित दायित्वों के अनुसार कर्मचारी सेंटर पर उपस्थित हैं अथवा नहीं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि वन स्टॉप सेंटर जैसी संवेदनशील सेवा में कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी समय जरूरतमंद महिला या बालिका सेंटर पर सहायता के लिए पहुंच सकती है, इसलिए आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए।
उन्होंने सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों से उनके दायित्वों के संबंध में जानकारी भी ली। केस वर्कर और काउंसलर से पूछा गया कि पीड़ित महिलाओं के मामलों में काउंसलिंग और केस मैनेजमेंट किस प्रकार किया जाता है। वहीं नर्स से मेडिकल सहायता से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। सुरक्षा कर्मियों से सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की गई।
निरीक्षण के दौरान 181 महिला हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवा के साथ सेंटर के समन्वय की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हेल्पलाइन से प्राप्त होने वाली सूचनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी महिला या बालिका की सहायता के लिए कॉल आने पर रिस्पांस टाइम न्यूनतम रखा जाए और जरूरत पड़ने पर संबंधित टीम को तत्काल मौके पर भेजा जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि संकट की स्थिति में सहायता मांगने वाली महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर एक महत्वपूर्ण सहारा है। ऐसे में सेंटर और हेल्पलाइन सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि 181 और 112 से प्राप्त मामलों की जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज की जाए और प्रत्येक मामले में की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाए।
इसके बाद जिलाधिकारी ने सेंटर परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सेंटर परिसर हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखा जाए। विशेष रूप से अस्थायी आश्रय गृह में रहने वाली महिलाओं के लिए स्वच्छ वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी ने सेंटर में लगे CCTV कैमरों की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े संस्थान में निगरानी व्यवस्था मजबूत और प्रभावी होनी चाहिए। CCTV कैमरों को ऐसी जगहों पर सुचारु रूप से संचालित रखा जाए जहां सुरक्षा की दृष्टि से उनकी आवश्यकता है। उन्होंने कैमरों की कार्यशीलता की नियमित जांच कराने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने सेंटर में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अग्निशमन उपकरण चालू हालत में रहें और कर्मचारियों को आपात स्थिति में उनके उपयोग की जानकारी हो। उन्होंने कहा कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सेंटर में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए संकट के समय एक महत्वपूर्ण सहारा है। यहां आने वाली प्रत्येक महिला और बालिका के साथ संवेदनशील, सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देशित किया कि पीड़ित महिला की परिस्थिति को समझते हुए उसकी गोपनीयता और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के सेंटर पर पहुंचने का मतलब है कि वह किसी न किसी परेशानी या संकट से गुजर रही है। ऐसे में उससे पूछताछ या बातचीत के दौरान संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। पीड़ित महिला को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जिसमें वह बिना भय और संकोच के अपनी समस्या बता सके और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सके।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेंटर में आने वाली महिलाओं और बालिकाओं को उपलब्ध सेवाओं की जानकारी सरल भाषा में दी जाए। यदि किसी मामले में पुलिस सहायता की आवश्यकता है तो पुलिस विभाग से तत्काल समन्वय किया जाए। मेडिकल सहायता की जरूरत होने पर संबंधित स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया जाए तथा कानूनी सहायता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने मनोवैज्ञानिक परामर्श की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि कई बार पीड़ित महिलाओं को शारीरिक सहायता के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। इसलिए काउंसलिंग की व्यवस्था प्रभावी तरीके से संचालित की जाए और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विशेषज्ञों से समन्वय किया जाए।
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सेंटर की समग्र व्यवस्थाओं को देखा और अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की मंशा के अनुरूप महिलाओं एवं बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित कर्मचारियों को अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं का लाभ लेने वाली प्रत्येक महिला और बालिका को समय पर सहायता मिले, यही केंद्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस प्रकार जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में सेंटर की चिकित्सा, पुलिस, कानूनी, मनोवैज्ञानिक, आश्रय, अभिलेखीय और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का उद्देश्य वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना तथा संकट की स्थिति में महिलाओं एवं बालिकाओं को तत्काल, सुरक्षित और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराना रहा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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