
सहारनपुर में नकली सिक्कों के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश करने का दावा किया है। कोतवाली नगर पुलिस, SOG, SWAT और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में नकली सिक्कों का निर्माण और उनकी सप्लाई करने वाले गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से नकली सिक्कों के निर्माण और उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में खपाने के काम में सक्रिय था। शुरुआती पूछताछ में नकली सिक्कों के बड़े पैमाने पर बाजार में पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी सहारनपुर से लेकर बिहार तक विभिन्न स्थानों पर नकली सिक्कों की सप्लाई करते थे। पूछताछ के दौरान गिरोह से जुड़े लोगों ने अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चलाए जाने की जानकारी दी है। पुलिस इस दावे की जांच कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए पूछताछ जारी है। यदि जांच में यह आंकड़ा पुष्ट होता है तो यह नकली मुद्रा से जुड़े बड़े नेटवर्क में से एक हो सकता है।
संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए हैं। इन सिक्कों की कुल अंकित कीमत 1.28 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा पुलिस ने दो कार, नकली सिक्के बनाने वाली मशीनें, डाई, अधबने सिक्के, मोबाइल फोन और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। बरामद सामान से पुलिस को यह संकेत मिला है कि गिरोह केवल नकली सिक्कों की सप्लाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इनके निर्माण की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ था।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नकली सिक्कों का निर्माण कहां किया जाता था और उन्हें बाजार तक पहुंचाने के लिए किस तरह का नेटवर्क तैयार किया गया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके और उसके संपर्कों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के दौरान नकली सिक्कों की सप्लाई से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह द्वारा सहारनपुर में नकली सिक्कों का एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही थी। इस जानकारी ने जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस प्रस्तावित प्लांट के लिए मशीनें और अन्य सामान कहां से जुटाया जा रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
बरामद मशीनों और डाई की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन उपकरणों की मदद से कितने समय से नकली सिक्कों का निर्माण किया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नकली सिक्कों को वास्तविक सिक्कों जैसा दिखाने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इस संबंध में विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकती है, ताकि बरामद सिक्कों और उपकरणों की तकनीकी जांच के आधार पर गिरोह की गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
जांच एजेंसियों के सामने एक और महत्वपूर्ण चुनौती बाजार में पहले से खपाए जा चुके नकली सिक्कों का पता लगाना है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से उन स्थानों और लोगों की जानकारी हासिल कर रही है, जहां नकली सिक्कों की सप्लाई की गई। सहारनपुर के अलावा बिहार और अन्य संभावित क्षेत्रों में भी इस नेटवर्क के संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि सप्लाई का नेटवर्क कई स्तरों पर फैला हो सकता है।

नकली सिक्कों का बाजार में चलना आर्थिक व्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय है। नकली मुद्रा किसी भी रूप में बाजार में पहुंचने पर लेन-देन की व्यवस्था में परेशानी पैदा कर सकती है। आम दुकानदार और ग्राहक कई बार असली और नकली मुद्रा में अंतर नहीं कर पाते। ऐसे में नकली सिक्कों की बड़ी मात्रा में सप्लाई होने की स्थिति में छोटे व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पुलिस की इस कार्रवाई में कई टीमों का संयुक्त रूप से शामिल होना भी जांच के व्यापक स्तर की ओर संकेत करता है। कोतवाली नगर पुलिस के साथ SOG, SWAT और सर्विलांस टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। सर्विलांस के जरिए संदिग्ध लोगों की गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाई गई होगी, जबकि अन्य टीमों ने कार्रवाई को अंजाम देने में सहयोग किया। हालांकि नेटवर्क के संचालन और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत तथ्य जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।
गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ का दौर जारी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी। क्या कोई व्यक्ति निर्माण का काम देखता था, कोई सिक्कों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाता था और कोई बाजार में उन्हें खपाने का काम करता था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही गिरोह को आर्थिक मदद, मशीन उपलब्ध कराने या अन्य संसाधन मुहैया कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आए 70 करोड़ रुपये से अधिक के आंकड़े को भी जांच के जरिए सत्यापित किया जाएगा। यह आंकड़ा आरोपियों से पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित बताया गया है। इसलिए इसे फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितने मूल्य के नकली सिक्के बाजार में पहुंचाए गए थे और इस नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना था।
मामले में बरामद मोबाइल फोन भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस इन मोबाइल फोन से संपर्कों, संदेशों और अन्य उपलब्ध जानकारी की जांच कर सकती है। इससे गिरोह के सदस्यों के बीच होने वाली बातचीत, सप्लाई से जुड़े लोगों और संभावित ग्राहकों या सहयोगियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। इसी आधार पर पुलिस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
दो कारों की बरामदगी के बाद वाहनों के इस्तेमाल की दिशा में भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा सकती है कि इन वाहनों का उपयोग नकली सिक्कों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किया जाता था या नहीं। यदि वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई के लिए किया गया है तो उनके आवागमन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
सहारनपुर में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने की कथित तैयारी इस मामले का एक अहम पहलू है। यदि पुलिस जांच में यह बात सही साबित होती है तो इससे पता चलेगा कि गिरोह अपने काम को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रस्तावित प्लांट के लिए स्थान, मशीन और अन्य सामग्री किस स्तर तक तैयार की जा चुकी थी।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने और नकली सिक्कों की सप्लाई की पूरी श्रृंखला का पता लगाने पर है। यह भी जांच की जा रही है कि सहारनपुर से बिहार तक किन-किन स्थानों पर नकली सिक्के पहुंचाए गए और वहां कौन लोग उन्हें बाजार में चलाने का काम करते थे। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद नकली सिक्कों के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर 70 करोड़ रुपये से अधिक के कथित नेटवर्क, प्रस्तावित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, सप्लाई चैन और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका को लेकर जांच महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, सहारनपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्कों की बरामदगी ने नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़े एक कथित बड़े नेटवर्क को सामने ला दिया है। मशीनें, डाई, अधबने सिक्के, वाहन और मोबाइल फोन की बरामदगी मामले को और गंभीर बनाती है। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने और बाजार में पहुंच चुके नकली सिक्कों का पता लगाने में जुटी है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस गिरोह से जुड़े और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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