
हापुड़, 8 सितंबर 2026। भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मंगलवार को अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र, बाबूगढ़ छावनी, जनपद हापुड़ में विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जॉइंट डायरेक्टर अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र डॉ. संजीव कुमार के दिशा-निर्देशन एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में केंद्र में कार्यरत सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों की टीबी की जांच की गई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कर्मचारियों को टीबी के लक्षण, बचाव, समय पर जांच और उपचार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
शिविर का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर टीबी की समय से पहचान, बीमारी की रोकथाम और कर्मचारियों के बीच टीबी को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि टीबी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय रहते इसकी पहचान और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार मिलने पर इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि संभावित लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति जांच कराने में देरी न करे और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार उपचार पूरा करे।
विशेष स्वास्थ्य शिविर के दौरान अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच की गई। सभी संबंधित कर्मचारियों के एक्स-रे भी कराए गए। इसके साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सीवाई-टीबी वैक्सीन का टीका भी लगाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच एवं टीकाकरण के साथ-साथ कर्मचारियों को टीबी से संबंधित आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी।
जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने शिविर में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को टीबी के लक्षणों के बारे में विस्तार से जागरूक किया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक खांसी रहना, बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन कम होना तथा भूख न लगना जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर व्यक्ति को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर आवश्यक जांच करानी चाहिए। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान जल्दी की जा सकती है और उपचार भी समय से शुरू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि टीबी की रोकथाम में जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि लोग बीमारी के लक्षणों को पहचानने और समय पर जांच कराने के प्रति जागरूक होंगे तो टीबी के मामलों की समय से पहचान संभव होगी। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति को उपचार उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक रहने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षणों एवं बचाव के बारे में जानकारी दें।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक लोगों की समय पर जांच की जाए और बीमारी की पुष्टि होने पर संक्रमित व्यक्ति को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि टीबी को समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता और जांच संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कार्यस्थलों पर इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाने से कर्मचारियों में बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ती है और संभावित मामलों की पहचान में भी सहायता मिलती है।
डॉ. राजेश सिंह ने कर्मचारियों से टीबी के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में टीबी से संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे जांच कराने में किसी प्रकार की झिझक नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षण, जांच और उपचार की जानकारी देने की अपील की, ताकि बीमारी के प्रति जागरूकता को समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कर्मचारियों को यह भी समझाया कि किसी भी बीमारी के उपचार में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है। टीबी के मामले में भी लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी किसी भी संदिग्ध लक्षण को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। नियमित जांच और आवश्यक उपचार के माध्यम से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
शिविर के दौरान कर्मचारियों को टीबी से बचाव के लिए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना, समय पर जांच और उपचार को बढ़ावा देना तथा बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। इसी दिशा में विभिन्न संस्थानों और कार्यस्थलों पर जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यस्थल पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनकी स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासाओं और टीबी से जुड़े सामान्य सवालों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने भी कर्मचारियों से कहा कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण होने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लें।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने टीबी की जांच के महत्व पर जोर दिया। अधिकारियों ने कहा कि बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी, उपचार शुरू करने और व्यक्ति को स्वस्थ बनाने की प्रक्रिया उतनी ही प्रभावी होगी। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को टीबी के प्रति जागरूक होना चाहिए। विशेष रूप से कार्यस्थलों पर नियमित स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां कर्मचारियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
शिविर में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सीवाई-टीबी वैक्सीन लगाए जाने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों ने टीबी की रोकथाम और समय पर जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। कर्मचारियों को बताया गया कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय उचित स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
जॉइंट डायरेक्टर अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र डॉ. संजीव कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आयोजित इस शिविर को कर्मचारियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर इस प्रकार के स्वास्थ्य कार्यक्रम कर्मचारियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ बीमारी की समय से पहचान में भी सहायक होते हैं। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी को गंभीरता से अपनाने और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की।
शिविर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. दीक्षा, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक दीपक कुमार, एक्स-रे टेक्नीशियन अजहर सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। वहीं अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र की ओर से जॉइंट डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ. साक्षी वशिष्ठ तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ जनसहभागिता भी जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर समय से जांच एवं उपचार कराना चाहिए। कार्यस्थल पर आयोजित इस विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच, टीकाकरण तथा जागरूकता का लाभ मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यस्थल पर टीबी की समय से पहचान, रोकथाम और जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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