Old Shootout Case : वाराणसी कोर्ट में 24 साल पुराना शूटआउट केस, अभय सिंह की अगली सुनवाई 24 मार्च

वाराणसी की अदालत में 2002 के चर्चित शूटआउट केस ने एक बार फिर सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में फोकस अब विधायक अभय सिंह पर है। मामला कैंट थाना क्षेत्र के टकसाल सिनेमा के पास पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ा है।
4 अक्टूबर 2002 को कथित रूप से अभय सिंह और उनके साथियों ने धनंजय सिंह के काफिले पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में कई लोग घायल हुए थे और इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। घटना ने तत्काल राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी थी।
इस मामले की सुनवाई मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभय सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए और मामले की आगामी बहस के अहम बिंदु अदालत के समक्ष रखे गए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 मार्च 2026 की तारीख तय की।
कोर्ट में यह सुनवाई न केवल न्यायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 24 मार्च को तय सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इस दिन कोर्ट का रुख और अभय सिंह की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने और गवाहों की तिथियों को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मामले की जटिलता और लंबे समय से लंबित रहने के कारण इसे हाई-प्रोफाइल केस के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अभय सिंह की कानूनी टीम ने कोर्ट में यह तर्क रखा कि मामले में कई वर्षों की देरी और गवाहों के बयान समय के साथ बदल चुके हैं। दूसरी ओर, आरोपियों की ओर से यह भी दावा किया गया कि मामले में पर्याप्त सबूत हैं और न्याय प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।

वाराणसी में 2002 के शूटआउट केस ने राजनीतिक पारा कई बार बढ़ाया है। उस समय अभय सिंह और उनके साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और मामले की जांच कई बार उच्च स्तर पर हुई थी। अब 24 मार्च की सुनवाई को इस लंबे समय से लंबित केस में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान उपस्थित गवाहों और अधिवक्ताओं की दलीलों ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया। यह स्पष्ट है कि कोर्ट ने मामले की लंबित सुनवाई को तेजी से निपटाने का प्रयास किया है।
कोर्ट में केस की सुनवाई की तैयारियों के तहत सभी गवाहों को नोटिस जारी किया गया है। राजनीतिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और 24 मार्च की सुनवाई के परिणाम से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
सुनवाई में अभय सिंह के पक्ष और आरोपियों के पक्ष दोनों की दलीलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कोर्ट की आगामी तारीख पर यह तय होगा कि इस पुराने केस में आगे की कार्रवाई कैसे होगी और आरोपियों की जिम्मेदारी तय होगी।
वाराणसी के स्थानीय निवासियों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें भी इस केस पर टिकी हुई हैं। उन्हें उम्मीद है कि न्यायालय निष्पक्ष रूप से मामलों की सुनवाई करेगा और लंबे समय से लंबित मामलों का निष्कर्ष निकालेगा।
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि 2002 का शूटआउट केस आज भी न्यायिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कोर्ट की सुनवाई, गवाहों के बयान और अभय सिंह की कानूनी दलीलें आगामी फैसले में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
24 मार्च 2026 की सुनवाई में कोर्ट के फैसले और आगे की कार्यवाही यह तय करेगी कि अभय सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई होगी। यह सुनवाई न केवल न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम मानी जा रही है।
अंततः, वाराणसी की अदालत में 24 साल पुराने शूटआउट केस की सुनवाई यह दर्शाती है कि न्याय प्रक्रिया में समय लंबित रहने के बावजूद निर्णायक कदम उठाए जा सकते हैं। 24 मार्च की तारीख इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्याय और राजनीतिक प्रभाव दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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