On deputation : हिमाचल के युवा IAS में दिल्ली जाने की इतनी भी क्या जल्दी : 3 साल में 18 अफसर गए केंद्र, टॉप-10 में से 6 भी डेपुटेशन पर

शिमला। हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। बीते एक सप्ताह के भीतर ही केंद्र सरकार ने तीन युवा आईएएस अधिकारियों को दिल्ली में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिमाचल कैडर के लगभग 18 आईएएस अफसर केंद्र सरकार में जा चुके हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के कुल स्वीकृत 126 आईएएस पदों में से 22 अधिकारी केंद्र सरकार या अन्य राज्यों में प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में इन तीन युवा आईएएस अफसरों को दिल्ली बुलाया गया
बीते एक सप्ताह में केंद्र सरकार ने राज्य में बड़े महकमों की जिम्मेदारी संभाल रहे तीन युवा अफसरों को दिल्ली में नई नियुक्तियां दी हैं:
निपुण जिंदल : आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) में डिप्टी सेक्रेटरी बनाया गया।
राकेश कुमार प्रजापति : उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में डायरेक्टर पद पर नियुक्त।
विवेक भाटिया : युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग में डायरेक्टर नियुक्त।
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को इन तीनों अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर कार्यमुक्त (Relieve) करने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठता सूची के टॉप-10 में से 6 अफसर राज्य से बाहर
राज्य में आईएएस अधिकारियों के दिल्ली जाने का रुझान सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है। हिमाचल कैडर की वरिष्ठता सूची (Seniority List) के टॉप-10 वरिष्ठ नौकरशाहों में से 6 अफसर इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। बीते तीन-चार सालों में इस रुझान में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
केंद्र में जाने के मुख्य कारण और विशेषज्ञों की राय
नौकरशाही के जानकारों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अधिकारियों के दिल्ली जाने के पीछे कई प्रमुख वजहें हैं:
करियर ग्रोथ व नेशनल एक्सपोजर: राष्ट्रीय स्तर की नीतियों और योजनाओं को करीब से समझने और बेहतर प्रोफेशनल एक्सपोजर के लिए अधिकारी दिल्ली जाना पसंद करते हैं।
प्लेसमेंट पॉलिसी व व्यक्तिगत कारण: सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुसार, कार्मिक विभाग (Personal Department) की प्लेसमेंट पॉलिसी में पक्षपात और पारदर्शी माहौल का न होना भी एक कारण माना जाता है। इसके अलावा पारिवारिक व बच्चों की शिक्षा से जुड़ी जरूरतें भी एक बड़ी वजह होती हैं।
ऑल इंडिया सर्विस का स्वरूप: आईएएस, आईपीएस और आईएफएस ऑल इंडिया कैडर का हिस्सा हैं, इसलिए केंद्र और राज्य के बीच अधिकारियों की आवाजाही एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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