Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश ?

Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश

Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश
Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश

देशभर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में अपनी लंबित मांगों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते आगामी 30 मई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय कर्मचारियों के प्रमुख संगठन अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ द्वारा लिया गया है, जिसके तहत विभिन्न राज्यों में कार्यरत कर्मचारी एकजुट होकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

लखनऊ में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव सुरेश सिंह यादव ने इस आंदोलन की रूपरेखा और इसके पीछे के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लंबे समय से कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखी जा रही हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस कारण कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 23 मई से की जाएगी, जब सभी कर्मचारी काला फीता बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज कराएंगे। यह प्रतीकात्मक विरोध होगा, जिसका उद्देश्य सरकार का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। इसके बाद 30 मई को देशभर में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

महासचिव ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक है कि चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए। वर्तमान समय में कई विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन उन पर नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। इससे न केवल बेरोजगारी बढ़ रही है, बल्कि कार्य का भार भी मौजूदा कर्मचारियों पर अधिक पड़ रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को न तो उचित वेतन मिलता है और न ही उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं प्राप्त होती हैं। इससे कर्मचारियों का शोषण होता है और उनकी कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा मृतक आश्रित नियुक्ति से जुड़ा है। पहले की व्यवस्था के तहत चतुर्थ श्रेणी के किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार के योग्य सदस्य को तृतीय श्रेणी की नौकरी दी जा सकती थी। लेकिन वर्तमान में इस नियम में बदलाव कर दिया गया है, जिसके तहत परिवार के सदस्य को केवल चतुर्थ श्रेणी के पद पर ही नियुक्ति दी जाएगी। महासचिव ने इस निर्णय को कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

इसके अलावा, उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों और पीआरडी जवानों के वेतन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि इन कर्मचारियों को न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का सम्मानजनक तरीके से पालन-पोषण कर सकें। वर्तमान वेतन संरचना उनके जीवन स्तर के अनुरूप नहीं है।

Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश
Outrage over demands intensifies : चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का देशव्यापी विरोध 30 मई को, मांगों को लेकर बढ़ा आक्रोश

पेंशन व्यवस्था को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष है। नई पेंशन योजना को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। महासचिव ने कहा कि कर्मचारी अपने जीवन के 40 से 42 वर्ष सेवा में बिताते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पर्याप्त पेंशन नहीं मिलती, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां एक ओर कर्मचारियों को पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों को एक से अधिक पेंशन मिलती है। इस असमानता को समाप्त किया जाना चाहिए और सभी के लिए समान नियम लागू होने चाहिए।

कोरोना काल के दौरान रोके गए भत्तों को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई है। महासचिव ने बताया कि उस समय 18 महीने का महंगाई भत्ता (डीए) अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, साथ ही सात अन्य भत्तों पर भी रोक लगा दी गई थी। अब जबकि स्थिति सामान्य हो चुकी है, इन भत्तों को पुनः बहाल किया जाना चाहिए।

महासचिव ने यह भी बताया कि कर्मचारियों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर कई बार प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। यह ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से विभिन्न राज्यों से भेजा गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है और यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा। उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस आंदोलन में भाग लें और अपनी मांगों को मजबूती से रखें।

अंततः यह स्पष्ट है कि यदि सरकार जल्द ही कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सरकारी तंत्र की रीढ़ माने जाते हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विरोध प्रदर्शन पर क्या रुख अपनाती है और कर्मचारियों की मांगों को किस हद तक पूरा करती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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