
मेरठ। पति सौरभ राजपूत की हत्या और शव के टुकड़े कर ड्रम में भरने के चर्चित मामले में आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को सजा सुनाए जाने से पहले अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई के दौरान जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुस्कान और साहिल से उनका पक्ष जाना। इस दौरान जब न्यायाधीश ने मुस्कान से पूछा कि वह सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी है और क्या सजा चाहती है, तो मुस्कान ने अपनी छोटी बेटी का ख्याल रखने की बात कही। इसके बाद वह चुप हो गई।
अदालत में हुई इस कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। सरकारी पक्ष की ओर से अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए कड़ी सजा की मांग की गई, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपियों की पारिवारिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कम सजा देने की अपील की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फैसले के लिए लंच के बाद का समय बताया गया था।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों का पक्ष सुना
मामले में सजा सुनाए जाने से पहले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुस्कान और साहिल का पक्ष सुना। न्यायालय की इस प्रक्रिया के दौरान मुस्कान से उसकी सजा को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उसने अपनी बेटी के भविष्य और उसकी देखभाल की चिंता जताई।
मुस्कान ने कहा कि उसकी बेटी छोटी है और उसका ख्याल रखा जाए। यह कहने के बाद वह चुप हो गई। सुनवाई के दौरान सामने आई इस बात ने मामले के कानूनी पक्ष के साथ आरोपियों की पारिवारिक परिस्थितियों को भी चर्चा में ला दिया।
हालांकि, किसी मामले में सजा का निर्धारण केवल आरोपी की व्यक्तिगत अपील पर नहीं, बल्कि अपराध से जुड़े तथ्यों, साक्ष्यों, लागू कानून और अदालत के समक्ष रखी गई दलीलों के आधार पर किया जाता है। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिया जाता है।
सरकारी वकील ने अपराध की गंभीरता का दिया हवाला
सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता केके चौबे ने अदालत में अपनी दलील रखते हुए अपराध की गंभीरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पति-पत्नी के बीच संबंध ठीक नहीं थे और साथ रहना संभव नहीं था, तो अलग होने के लिए कानूनी रास्ते उपलब्ध थे। ऐसे में हत्या जैसा कदम उठाना गंभीर अपराध है।
सरकारी वकील ने अदालत से मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कड़ी सजा देने की मांग की। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि वैवाहिक संबंधों में विवाद होने की स्थिति में कानून के तहत समाधान तलाशे जा सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की हत्या करना स्वीकार्य विकल्प नहीं हो सकता।
अभियोजन पक्ष की दलीलों का केंद्र अपराध की गंभीरता और उसके लिए कानून के अनुरूप दंड सुनिश्चित करना रहा। अदालत में दोनों पक्षों की बात सुने जाने के बाद फैसला न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार सुनाया जाना था।
बचाव पक्ष ने परिवार और बच्चों की परिस्थितियों का किया उल्लेख
वहीं, मुस्कान और साहिल की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें रखीं। उन्होंने मुस्कान की पारिवारिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कम से कम सजा देने की अपील की। बचाव पक्ष ने कहा कि मुस्कान की दो बेटियां हैं और उसके माता-पिता बुजुर्ग हैं। ऐसे में सजा तय करते समय इन परिस्थितियों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष की ओर से रखी गई दलील में परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों के भविष्य का मुद्दा प्रमुख रहा। अदालत में एक ओर अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता के आधार पर कड़ी सजा की मांग की, तो दूसरी ओर बचाव पक्ष ने आरोपी की पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखने का अनुरोध किया।
अब इन दलीलों पर विचार करना न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है। अदालत अपराध से जुड़े साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही सजा के संबंध में निर्णय लेती है।
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने खींचा था ध्यान
मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड अपनी परिस्थितियों के कारण चर्चा में रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामले में सौरभ की हत्या करने और उसके शव के टुकड़े कर ड्रम में भरने के आरोप मुस्कान और साहिल पर हैं। इस मामले में अदालत की कार्यवाही और सजा से संबंधित घटनाक्रम पर लोगों की नजर बनी हुई है।
मामले में सजा सुनाए जाने से पहले हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अलग-अलग तर्क प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपी की पारिवारिक परिस्थितियों और बच्चों की जिम्मेदारी का हवाला दिया।
ऐसे आपराधिक मामलों में अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उसी के माध्यम से उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी प्रावधानों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए न्यायिक निष्कर्ष निकाला जाता है।

फैसले पर टिकी रहीं निगाहें
बुधवार को हुई कार्यवाही में जिला जज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों आरोपियों का पक्ष सुना। मुस्कान की ओर से बेटी की देखभाल की चिंता जताई गई, जबकि सरकारी वकील ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा की मांग की। बचाव पक्ष ने मुस्कान की दो बेटियों और बुजुर्ग माता-पिता की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए नरमी बरतने की अपील की।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लंच के बाद फैसला सुनाए जाने की बात कही गई थी। अंतिम सजा और न्यायालय के आदेश की पुष्टि आधिकारिक अदालती निर्णय से की जानी चाहिए।
इस मामले में मुख्य सवाल यही रहा कि अदालत अपराध की गंभीरता, अभियोजन की दलीलों और बचाव पक्ष द्वारा बताई गई पारिवारिक परिस्थितियों पर विचार करते हुए क्या निर्णय देती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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