Poignant appeal : माहे रमज़ान के दूसरे अशरे में वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने की नेकियों की राह अपनाने की मार्मिक अपील

रमज़ान के इस मुकद्दस दौर में हर इंसान को अधिक से अधिक नेक काम करने चाहिए
- तथा गरीब और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए दिल खोलकर दान, ज़कात और सदक़ा देना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों के नेक अमल को बेहद पसंद करता है और रमज़ान के इस पाक महीने में की गई इबादत, दुआ और दान का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए यह समय इंसान के लिए अपने गुनाहों से तौबा करने, अपनी गलतियों से सीख लेने और नेक रास्ते पर चलने का बेहतरीन मौका होता है। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि रमज़ान के इस मुबारक महीने के हर पल को इबादत, दुआ, दान और इंसानियत की सेवा में गुज़ारे तथा समाज में भलाई और मोहब्बत का संदेश फैलाए।
- उत्तर प्रदेश। पवित्र माह-ए-रमज़ान के दूसरे अशरे (मग़फ़िरत का अशरा) के आगाज़ के साथ ही मुस्लिम समाज में इबादत, तौबा और अल्लाह से माफी मांगने की भावना और अधिक प्रबल हो जाती है। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मुसरफ ख़ान ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि रमज़ान के इस मुकद्दस दौर में हर इंसान को अधिक से अधिक नेक काम करने चाहिए तथा गरीब और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए दिल खोलकर दान, ज़कात और सदक़ा देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि
- अल्लाह अपने बंदों के नेक अमल को बेहद पसंद करता है और रमज़ान के इस पाक महीने में की गई इबादत, दुआ और दान का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए यह समय इंसान के लिए अपने गुनाहों से तौबा करने, अपनी गलतियों से सीख लेने और नेक रास्ते पर चलने का बेहतरीन मौका होता है। श्री ख़ान ने बताया कि रमज़ान का महीना तीन अशरों में तक़सीम किया गया है। पहला अशरा रहमत यानी अल्लाह की दया का होता है, दूसरा अशरा मग़फ़िरत यानी गुनाहों की माफी का और तीसरा अशरा जहन्नम से निजात का माना जाता है। उन्होंने कहा कि दूसरे अशरे में विशेष रूप से तौबा, इस्तिग़फ़ार, नमाज़ और इबादत के साथ-साथ विशेष रूप से दान, ज़कात और सदक़ा देने पर जोर देना चाहिए, ताकि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ फरमा दे।
- उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान को सब्र, संयम और आत्मिक अनुशासन का पाठ पढ़ाता है। रमज़ान के दिनों में नमाज़, कुरआन की तिलावत, दान, ज़कात और सदक़ा जैसे नेक अमल समाज में इंसानियत और करुणा का संदेश फैलाते हैं। सामाजिक चिंतक मुसरफ ख़ान ने अंत में कहा कि अल्लाह अपने बंदों की सच्ची तौबा को बेहद पसंद करता है और इस पाक महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए हर इंसान को चाहिए कि रमज़ान के इस मुबारक महीने के हर पल को इबादत, दुआ, दान और इंसानियत की सेवा में गुज़ारे तथा समाज में भलाई और मोहब्बत का संदेश फैलाए।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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