Raised a demand : बधानी ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों पर फर्जी हाजिरी के आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

बस्ती। जनपद बस्ती के विकास खंड गौर अंतर्गत ग्राम पंचायत बधानी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत संचालित विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और फर्जी हाजिरी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मनरेगा के अंतर्गत संचालित “नंदलाल के घर से कंचनपुर सरहद तक चकबंद निर्मलन” कार्य में कागजों पर बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि मौके पर कार्यस्थल लगभग सुनसान दिखाई देता है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति सक्षम जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार वर्षा हो रही है, जिससे अधिकांश निर्माण और मिट्टी से जुड़े कार्य प्रभावित हैं। इसके बावजूद मनरेगा के मस्टर रोल में मजदूरों की नियमित उपस्थिति दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कार्यस्थल पर पर्याप्त संख्या में श्रमिक मौजूद ही नहीं हैं, तो उपस्थिति दर्ज होने और भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की कथित मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल तैयार किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बिना कार्य कराए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है और उसके आधार पर भुगतान किया जा रहा है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि कार्यस्थल से प्राप्त जीपीएस युक्त तस्वीरों में बड़ी संख्या में मजदूर कार्य करते हुए दिखाई नहीं देते। उनका कहना है कि उपलब्ध तस्वीरें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मौके की स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी के बीच अंतर हो सकता है। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और इसकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही की जा सकती है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के दौरान संबंधित मस्टर रोल, उपस्थिति रजिस्टर, जॉब कार्ड का विवरण, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन, जीपीएस आधारित फोटोग्राफ, मजदूरी भुगतान का रिकॉर्ड तथा बैंक खातों में किए गए भुगतान की भी जांच की जाए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मनरेगा देश की महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और सार्वजनिक उपयोग के विकास कार्यों को गति देना है। इस योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मस्टर रोल, ऑनलाइन उपस्थिति, जियो टैगिंग, सोशल ऑडिट और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। यदि इन व्यवस्थाओं के बावजूद किसी प्रकार की अनियमितता होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनके आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे न केवल सरकारी धन का नुकसान होगा, बल्कि वास्तविक मजदूरों के अधिकार भी प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि योजना का लाभ उन्हीं लोगों तक पहुंचना चाहिए जो वास्तव में कार्य कर रहे हैं। फर्जी उपस्थिति या कागजी भुगतान जैसी शिकायतें योजना की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।
स्थानीय नागरिकों ने ब्लॉक प्रशासन और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि ग्रामीणों के बीच पारदर्शिता बनी रहे और यदि आरोप गलत हों तो वह भी स्पष्ट रूप से सामने आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजनाओं की सफलता पारदर्शिता और सामाजिक निगरानी पर निर्भर करती है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितताओं की शिकायत मिलती है तो समयबद्ध जांच से न केवल सच्चाई सामने आती है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलती है।
प्रशासनिक स्तर पर ऐसे मामलों में सामान्यतः संबंधित विभाग द्वारा स्थलीय निरीक्षण, अभिलेखों का सत्यापन और लाभार्थियों से पूछताछ की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर उच्चाधिकारियों द्वारा विशेष जांच समिति भी गठित की जा सकती है। यदि जांच में फर्जी हाजिरी, बिना कार्य भुगतान, रिकॉर्ड में हेरफेर या अन्य वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल बधानी ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर लगाए गए आरोप स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सामने लाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव होगा। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी, ताकि यदि कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो यह तथ्य भी सार्वजनिक रूप से सामने आ सके। इससे मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना के प्रति लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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