
जिला एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त आयोजन में कार्यकर्ताओं ने किया धरना-प्रदर्शन, पुलिस प्रशासन से हुई नोकझोंक
हापुड़/उत्तर प्रदेश, 29 सितंबर 2026। मतदाता अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका से जुड़े सवालों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रदर्शन के दौरान भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए।
कांग्रेस की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है और चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना देकर अपनी बात रखी।
देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस द्वारा इन दिनों निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
मूसलाधार बारिश के बावजूद प्रदर्शन में डटे कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान मौसम खराब रहा और तेज बारिश होती रही। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने बारिश के बीच अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर नारेबाजी की तथा धरने में भाग लिया।
कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने कहा कि बारिश जैसी परिस्थितियां भी उन्हें अपने मुद्दों को जनता के सामने रखने से नहीं रोक सकीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को लोकतंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए अपनी आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और मतदाता को अपने मताधिकार के प्रयोग को लेकर भरोसा होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि मतदाता सूची से लेकर मतदान और परिणाम तक चुनावी प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक चरण में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन तथा पर्याप्त पारदर्शिता होनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन से हुई नोकझोंक
धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति बनी।
हालांकि प्रदर्शन का केंद्र चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे रहे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा और निर्वाचन व्यवस्था से संबंधित सवालों पर जवाबदेही की मांग की।
उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी हाल के दिनों में कांग्रेस के चुनाव आयोग संबंधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव की स्थितियां सामने आई हैं। लखनऊ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ने से रोकने की खबरें भी सामने आई थीं।
मतदाता अधिकारों को लेकर कांग्रेस का जोर
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रत्येक नागरिक का मताधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना था कि मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन जैसी प्रक्रियाओं के संबंध में मतदाताओं को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आपत्ति एवं सुधार का अवसर उपलब्ध होना चाहिए।
पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को अपने प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा बनाया। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निर्वाचन संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर स्पष्टता और सार्वजनिक जवाबदेही आवश्यक है।
हाल के दिनों में कांग्रेस ने देश के कई हिस्सों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाए हैं। वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर चुनावी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताया है और कांग्रेस के कुछ आरोपों का खंडन भी किया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका से जुड़े सवाल भी उठाए। पार्टी की ओर से निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई गईं।
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। आयोग के अधिकारियों की आधिकारिक सूची में दो निर्वाचन आयुक्तों के रूप में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के नाम भी दर्ज हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े हालिया मामलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखाई गई। इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग की ओर से अलग-अलग मौकों पर अपना पक्ष रखा गया है। इसलिए प्रदर्शन में उठाए गए राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक संस्थाओं के जवाब को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास का मुद्दा
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता का विश्वास भी उसकी महत्वपूर्ण आधारशिला है। उनका कहना था कि मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज है और उसे अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिलेगा।
प्रदर्शन के दौरान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर यही सवाल प्रमुखता से उठाया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी प्रकार के संशोधन अथवा पुनरीक्षण की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित मतदाताओं को जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया का अवसर मिलना चाहिए।
इसी तरह कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर भी जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि निर्वाचन संस्था के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लोगों के बीच किसी प्रकार का संदेह पैदा न हो, इसके लिए स्पष्ट सूचना और पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है।
देशभर में जारी है चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे इस समय राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं। कांग्रेस द्वारा विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। 25 सितंबर को भी कांग्रेस के नेतृत्व में कई स्थानों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबरें आई थीं। इन प्रदर्शनों में पार्टी ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित अपनी आपत्तियां उठाईं।
29 सितंबर को भी कांग्रेस की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश में अयोध्या सहित कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
इन प्रदर्शनों के बीच निर्वाचन आयोग और कांग्रेस के बीच चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण तथा आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
कांग्रेस ने कहा—संघर्ष मतदाता अधिकारों के लिए
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि मतदाता को अपने मत के प्रयोग का अधिकार सुरक्षित मिलना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि चुनावी संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान स्पष्ट और संस्थागत तरीके से किया जाना चाहिए।
भारी बारिश के बावजूद धरने में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को प्रभावित नहीं होने दिया। कार्यकर्ताओं ने अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी की और धरने में भाग लिया। पुलिस प्रशासन के साथ नोकझोंक के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा।
अंततः यह प्रदर्शन मतदाता अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस की स्थानीय अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया। कांग्रेस ने इन मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग दोहराई, जबकि चुनावी संस्थाओं की ओर से अपने निर्णयों और प्रक्रियाओं का बचाव किया गया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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