
मेरठ।
बेगमपुल स्थित नमो भारत स्टेशन के पास से अगवा हुई एक वर्षीय बच्ची को पुलिस ने तीन दिन बाद सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, बच्ची के अपहरण का सौदा 20 हजार रुपये में तय किया गया था और कथित तौर पर रकम एडवांस के रूप में दी गई थी। घटना के बाद से परिवार में चिंता और भय का माहौल था, वहीं पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंच गई।
जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर निवासी सोनू पिछले करीब एक वर्ष से मेरठ में अपनी पत्नी और छह बच्चों के साथ रह रहा है। परिवार यहां कूड़ा बीनने का काम करता है। सोनू का परिवार बेगमपुल स्थित नमो भारत स्टेशन के पास सड़क किनारे रह रहा था। बुधवार रात परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। इसी दौरान सोनू की एक वर्षीय बेटी किलावती अपनी मां के पास सो रही थी।
सुबह जब परिवार के लोगों की नींद खुली तो उन्होंने बच्ची को अपने पास नहीं पाया। बच्ची के गायब होने की जानकारी मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने आसपास के इलाके में बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद लालकुर्ती थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी लेते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्ची की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में जांच शुरू की। घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। पुलिस टीम ने अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग को ध्यान से देखा और बच्ची के गायब होने के समय के आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई।
सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। दोनों ने कथित तौर पर चेहरे पर नकाब लगा रखा था और बाइक से बच्ची को गढ़ रोड की ओर ले जाते हुए नजर आए। पुलिस ने फुटेज के आधार पर उनकी गतिविधियों का रास्ता तलाशना शुरू किया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस हापुड़ अड्डे तक पहुंची, जहां सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारी के आधार पर बाइक का नंबर सामने आया।
पुलिस ने बाइक के नंबर की जांच कराई तो वह मेडिकल थाना क्षेत्र के कमालपुर निवासी युसूफ के नाम पर पंजीकृत मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने युसूफ को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में मामले से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली और जांच की दिशा आगे बढ़ी।
पुलिस ने युसूफ की निशानदेही पर उसके साथी हुस्ने आलम को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को कथित तौर पर खरीदने वाले ठेकेदार अकबर को भी गिरफ्तार किया। पुलिस टीम ने आरोपियों से पूछताछ के बाद बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।
बच्ची के सकुशल बरामद होने की जानकारी मिलते ही परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। तीन दिनों से बच्ची की तलाश में परेशान परिवार के लिए यह बेहद राहत भरा क्षण था। पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित बरामद करने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि युसूफ कैरम बोर्ड बनाने का काम करता था और इसी दौरान उसकी पहचान ठेकेदार अकबर से हुई थी। पुलिस का दावा है कि अकबर के परिवार में बच्चा नहीं होने के कारण युसूफ ने उसे बच्चा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। इसके बाद कथित तौर पर बच्ची को उपलब्ध कराने के लिए 20 हजार रुपये में सौदा तय किया गया।
पुलिस के अनुसार, इस सौदे के तहत 20 हजार रुपये एडवांस दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद आरोप है कि युसूफ ने अपने साथी हुस्ने आलम के साथ मिलकर बेगमपुल स्थित नमो भारत स्टेशन के पास से बच्ची को उठाया। दोनों कथित तौर पर बाइक से बच्ची को लेकर वहां से निकल गए।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्ची को अगवा करने की योजना कब बनाई गई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के आधार पर घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
इस मामले में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। बच्ची के गायब होने के बाद पुलिस ने आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालनी शुरू की। फुटेज में दिखाई दिए संदिग्ध युवकों और बाइक की जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया। बाइक के पंजीकरण से उसके मालिक तक पहुंचने के बाद पुलिस ने युसूफ को हिरासत में लिया और पूछताछ के दौरान मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं।

पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटना से पहले आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ था और बच्ची को लेकर क्या योजना बनाई गई थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की किसी घटना में शामिल रहे हैं या नहीं।
घटना ने बेगमपुल और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी चिंतित कर दिया। सड़क किनारे रहने वाले परिवारों की सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में राहत जरूर है कि बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस लगातार सतर्क रहती है। किसी भी बच्चे के लापता होने की सूचना मिलने पर तत्काल जांच शुरू की जाती है। इस मामले में भी पुलिस ने सूचना मिलते ही घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
बच्ची की बरामदगी के बाद अब पुलिस मामले के प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है। तीनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित तौर पर बच्ची को अगवा करने की योजना कैसे बनी और इसमें किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि 20 हजार रुपये की कथित रकम किस माध्यम से दी गई और बच्ची को कहां रखने की योजना थी।
परिजनों के लिए बच्ची का सकुशल वापस मिलना सबसे बड़ी राहत है। घटना के बाद परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा जताया है। वहीं पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कमालपुर निवासी युसूफ, उसका साथी हुस्ने आलम और ठेकेदार अकबर शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना से यह भी सामने आया है कि शहर के सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी अपराध की जांच में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बेगमपुल स्थित नमो भारत स्टेशन के आसपास लगे कैमरों की फुटेज से पुलिस को संदिग्धों की गतिविधियों का पता चला और बाइक के नंबर के जरिए जांच आरोपियों तक पहुंची।
फिलहाल एक वर्षीय किलावती सकुशल अपने परिवार के पास पहुंच गई है। पुलिस मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि बच्ची के अपहरण की पूरी साजिश का खुलासा किया जाए और घटना में यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
तीन दिन तक चली तलाश के बाद बच्ची की सकुशल बरामदगी से परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई जांच से मामले का खुलासा हुआ। अब पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि आरोपियों ने कथित तौर पर किस योजना के तहत बच्ची को निशाना बनाया और इस पूरे मामले में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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