
फतेहपुर।
जरूरतमंद मरीजों की सहायता और मानव जीवन की रक्षा के उद्देश्य से इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर लगातार सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को जिला अस्पताल फतेहपुर में भर्ती एक महिला मरीज को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल O Negative रक्त उपलब्ध कराया गया। मरीज के पास रक्त की व्यवस्था करने के लिए कोई रक्तदाता नहीं था। ऐसी स्थिति में इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने पहल करते हुए संबंधित चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद रक्तकेंद्र के माध्यम से मरीज के लिए रक्त की व्यवस्था कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल फतेहपुर में अनीता देवी (46 वर्ष), पत्नी राजेश कुमार, निवासी शाह, गाजीपुर, जनपद फतेहपुर भर्ती थीं। उनका हीमोग्लोबिन कम होने के कारण चिकित्सक ने उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई थी। उपचार के दौरान रक्त की जरूरत सामने आने पर मरीज के परिजनों के सामने रक्त की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई, क्योंकि उनके पास कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था।
ऐसे समय में मरीज की सहायता के लिए इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया गया। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए और संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर मरीज को रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने की पहल
मरीज की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने रक्तकेंद्र एवं पैथोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज फतेहपुर के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. वरद वर्धन बिसेन को पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती अनीता देवी को चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार एक यूनिट रक्त की जरूरत है और उनके पास रक्तदाता उपलब्ध नहीं है।
मामले की जानकारी मिलते ही प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन ने तत्परता दिखाते हुए रक्तकेंद्र के टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद मरीज के लिए O Negative रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
इस पहल से रक्त की आवश्यकता से जूझ रही महिला मरीज को समय पर सहायता मिल सकी। आपात स्थिति में रक्त की उपलब्धता मरीज के उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयास से जरूरतमंद मरीज की सहायता संभव हो सकी।
इस दौरान रक्तकेंद्र के बृजकिशोर, कमला प्रसाद सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाई।
जरूरतमंदों की सेवा में रेडक्रॉस की भूमिका महत्वपूर्ण
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी लंबे समय से मानव सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता और जरूरतमंद लोगों की सहायता के क्षेत्र में कार्य करती रही है। रक्त की आवश्यकता वाले मरीजों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना भी मानवीय सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों को बीमारी, दुर्घटना, ऑपरेशन या अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण रक्त की आवश्यकता पड़ती है। कई बार मरीज के परिजन रक्त की व्यवस्था करने में असमर्थ होते हैं। ऐसी स्थिति में सामाजिक संस्थाओं, रक्तकेंद्रों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों का सहयोग मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है।
फतेहपुर में अनीता देवी को O Negative रक्त उपलब्ध कराने की यह पहल भी इसी मानवीय भावना को दर्शाती है। मरीज के पास रक्तदाता नहीं होने की जानकारी मिलने पर संबंधित लोगों ने आपसी समन्वय के साथ सहायता की व्यवस्था की।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने मामले को संबंधित विभाग तक पहुंचाया, वहीं प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन के निर्देश पर टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल और रक्तकेंद्र के कर्मचारियों ने रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में सहयोग किया। इस प्रकार विभिन्न स्तरों पर किए गए प्रयासों से मरीज की रक्त संबंधी आवश्यकता पूरी करने में मदद मिली।
O Negative रक्त का विशेष महत्व
रक्त के विभिन्न समूह होते हैं, जिनमें A, B, AB और O प्रमुख हैं। इन समूहों के साथ Rh फैक्टर के आधार पर रक्त को पॉजिटिव और नेगेटिव श्रेणियों में भी बांटा जाता है। O Negative रक्त को आपातकालीन परिस्थितियों में विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि लाल रक्त कोशिकाओं के आधान में इसे कई स्थितियों में व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि, प्रत्येक मरीज के लिए रक्त चढ़ाने से पहले चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुसार रक्त समूह की पुष्टि, अनुकूलता की जांच और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी होता है। इसलिए रक्तकेंद्र की भूमिका केवल रक्त उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक जांच और प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
अनीता देवी के मामले में चिकित्सक ने एक यूनिट रक्त चढ़ाने की आवश्यकता बताई थी। इसके बाद संबंधित विभाग से समन्वय कर O Negative रक्त उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की प्रक्रिया में सहायता मिली।

रक्तदान से बचाई जा सकती हैं अनमोल जिंदगियां
इस अवसर पर रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता भी सामने आती है। रक्त ऐसी आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति केवल कृत्रिम विकल्पों से सामान्य रूप से नहीं की जा सकती। अस्पतालों में भर्ती मरीजों, दुर्घटना में घायल लोगों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों और विभिन्न प्रकार की शल्य चिकित्सा कराने वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार रक्त या उसके घटकों की आवश्यकता पड़ सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में स्वैच्छिक रक्तदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा नियमित अंतराल पर निर्धारित मानकों के अनुसार रक्तदान करने से रक्तकेंद्रों में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।
आमतौर पर 18 से 65 वर्ष के स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्तदान की पात्रता व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, हीमोग्लोबिन स्तर, वजन, पिछली बार रक्तदान करने के बाद बीते समय और लागू चिकित्सा दिशानिर्देशों पर निर्भर करती है। रक्तदान करने से पहले संबंधित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा आवश्यक जांच की जाती है।
रक्तदान करने वाले व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह निर्धारित स्वास्थ्य मानकों को पूरा करता हो। इससे रक्तदाता की सुरक्षा के साथ-साथ रक्त प्राप्त करने वाले मरीज की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
समय पर रक्त उपलब्ध होना बेहद जरूरी
रक्त की आवश्यकता कई बार अचानक उत्पन्न होती है। दुर्घटना, प्रसव संबंधी जटिलताओं, गंभीर एनीमिया, ऑपरेशन और कुछ बीमारियों के उपचार के दौरान मरीज को रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में समय पर रक्त उपलब्ध होना उपचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अस्पतालों और रक्तकेंद्रों के बीच समन्वय, स्वैच्छिक रक्तदाताओं की उपलब्धता तथा सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता से जरूरतमंद मरीजों को सहायता मिल सकती है। इसके लिए समाज के लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक होना चाहिए और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुकूल होने पर स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
फतेहपुर में अनीता देवी को रक्त उपलब्ध कराने के लिए की गई पहल यह संदेश देती है कि जरूरत के समय आपसी सहयोग और संवेदनशीलता से मरीजों की सहायता की जा सकती है। साथ ही यह घटना रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रक्तकेंद्रों में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
मानव सेवा ही सबसे बड़ा संकल्प
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ. अनुराग श्रीवास्तव की पहल तथा मेडिकल कॉलेज के रक्तकेंद्र एवं पैथोलॉजी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से अनीता देवी के लिए O Negative रक्त की व्यवस्था की गई। इस कार्य में प्रो. डॉ. वरद वर्धन बिसेन, टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल, बृजकिशोर, कमला प्रसाद सहित रक्तकेंद्र के अन्य कर्मचारियों की भूमिका रही।
यह पहल समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना के महत्व को दर्शाती है। जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए संस्थाओं, चिकित्सा विभागों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
रक्तदान केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन की रक्षा में योगदान देने का माध्यम है। स्वस्थ और पात्र लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक होकर आगे आना चाहिए, ताकि किसी भी मरीज को रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सहायता मिलने की संभावना बढ़ सके।
समय पर रक्त की उपलब्धता, जागरूक रक्तदाता और सेवा के प्रति समर्पित लोगों का सहयोग मिलकर मानव जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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