
फतेहपुर, 28 सितंबर 2026। रक्तदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से सोमवार को इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के तत्वावधान में आरएस एक्सेल इंग्लिश स्कूल में रक्तदान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। दोपहर एक बजे आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को रक्तदान के महत्व, इसकी प्रक्रिया और इससे जुड़े स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन एवं कार्यकारिणी सदस्य उत्तर प्रदेश डॉ. अनुराग श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया।
गोष्ठी के दौरान डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने रक्तदान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्तदान एक ऐसा मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से किसी जरूरतमंद मरीज के जीवन को बचाने में प्रत्यक्ष रूप से सहायता की जा सकती है। अस्पतालों में दुर्घटना, गंभीर बीमारी, ऑपरेशन, प्रसव सहित विभिन्न चिकित्सकीय परिस्थितियों में मरीजों को रक्त और रक्त के अवयवों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे समय में रक्त की उपलब्धता मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक तीन महीने में रक्तदान कर सकता है। उन्होंने लोगों से रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने और स्वस्थ होने पर स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवनदान देने में मदद मिलती है और समाज में सहयोग एवं सेवा की भावना भी मजबूत होती है।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने गोष्ठी में बताया कि रक्तदान के बाद प्राप्त रक्त का उपयोग जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों के उपचार में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है। रक्त से मिलने वाले विभिन्न अवयवों को जरूरत के अनुसार अलग-अलग मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कारण एक रक्तदाता का योगदान एक से अधिक मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर कई लोगों के मन में डर और भ्रम रहता है। कुछ लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे भ्रमों को दूर करने की आवश्यकता है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए निर्धारित चिकित्सकीय जांच और नियमों के अनुसार रक्तदान की प्रक्रिया की जाती है। रक्तदान से पहले व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह रक्तदान करने के लिए उपयुक्त है।
कार्यक्रम में काउंसलर दीपाली वर्मा ने भी रक्तदान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्वस्थ महिलाएं चार महीने के अंतराल पर रक्तदान कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान से पहले संभावित रक्तदाता की आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें हीमोग्लोबिन, रक्तचाप सहित आवश्यक परीक्षण किए जाते हैं। जांच के बाद यदि व्यक्ति रक्तदान के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाया जाता है, तभी उससे रक्त लिया जाता है।
दीपाली वर्मा ने बताया कि रक्तदान की प्रक्रिया को लेकर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, क्योंकि जानकारी के अभाव में कई स्वस्थ लोग भी रक्तदान से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान से पहले स्वास्थ्य परीक्षण होने के कारण रक्तदाता की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है। इसलिए योग्य और स्वस्थ लोगों को रक्तदान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

गोष्ठी में उपस्थित विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि रक्तदान केवल अस्पतालों और रक्त केंद्रों की आवश्यकता पूरी करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज, ऑपरेशन के लिए भर्ती व्यक्ति अथवा अन्य जरूरतमंद मरीज के लिए समय पर रक्त मिलना महत्वपूर्ण हो सकता है।
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी लंबे समय से रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करती रही है। संस्था द्वारा विभिन्न स्थानों पर रक्तदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। संस्था का उद्देश्य है कि रक्त की आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को समय से रक्त उपलब्ध हो और किसी व्यक्ति की जान केवल रक्त की कमी के कारण संकट में न पड़े।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि रक्तदान के महत्व की जानकारी केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि अपने परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ने से अधिक लोग रक्तदान के लिए आगे आ सकते हैं और जरूरतमंद मरीजों को समय पर सहायता मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन अनमोल है और किसी व्यक्ति की सहायता करने का अवसर मिलने पर समाज के सक्षम लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। रक्तदान ऐसा सामाजिक कार्य है जिसमें स्वस्थ व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देकर किसी जरूरतमंद के उपचार में मदद कर सकता है।
विद्यालय में आयोजित जागरूकता गोष्ठी में उपस्थित शिक्षकों ने भी रक्तदान से संबंधित जानकारी को महत्वपूर्ण बताया। विद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों के माध्यम से समाज के व्यापक वर्ग तक संदेश पहुंचाने में सहायक हो सकता है। विद्यार्थी अपने परिवार और समाज में स्वास्थ्य तथा रक्तदान से संबंधित सही जानकारी साझा कर सकते हैं।
कार्यक्रम में आरएस एक्सेल इंग्लिश स्कूल के प्रधानाचार्य धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और मानव सेवा के कार्यों के बारे में जानकारी देना भी आवश्यक है। रक्तदान जैसे विषय पर जागरूकता कार्यक्रम युवाओं में सेवा भावना विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
इस अवसर पर प्रबंध समिति सदस्य उमेश कुमार श्रीवास्तव सहित विद्यालय के सभी अध्यापक एवं अध्यापिकाएं मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने रक्तदान से संबंधित जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना और रक्तदान की प्रक्रिया, पात्रता तथा स्वास्थ्य जांच के संबंध में अपने सवालों की जानकारी प्राप्त की।
गोष्ठी में यह संदेश भी दिया गया कि रक्तदान के लिए आगे आने वाले लोगों को किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि निर्धारित स्वास्थ्य मानकों और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से पहले आवश्यक जांच कराना और रक्त केंद्र के निर्देशों का पालन करना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता है। विशेषकर युवाओं और स्वस्थ नागरिकों को रक्तदान के महत्व की जानकारी मिलने से समाज में स्वैच्छिक रक्तदान की भावना को बढ़ावा मिल सकता है। यदि पर्याप्त संख्या में स्वस्थ और पात्र लोग नियमित अंतराल पर रक्तदान करते रहें तो अस्पतालों और रक्त केंद्रों में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर की ओर से आयोजित इस जागरूकता गोष्ठी के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम है। संस्था ने स्वस्थ एवं पात्र लोगों से रक्तदान के प्रति जागरूक होने और अपनी क्षमता के अनुसार इस मानवीय कार्य में सहयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रक्तदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना और लोगों के मन में मौजूद भ्रांतियों को दूर करना रहा। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव और काउंसलर दीपाली वर्मा द्वारा दी गई जानकारी के माध्यम से उपस्थित लोगों को रक्तदान की आयु सीमा, महिलाओं के लिए रक्तदान के अंतराल, स्वास्थ्य परीक्षण तथा रक्त के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं।
आरएस एक्सेल इंग्लिश स्कूल में आयोजित यह गोष्ठी इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि स्वस्थ और पात्र व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। समाज के अधिक से अधिक लोग यदि रक्तदान के प्रति जागरूक हों और निर्धारित नियमों के अनुसार स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं, तो जरूरत के समय मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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