Sanitation system : संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 22 में से 7 मशीनें पहुंचीं ही नहीं, खराब मशीनों के सहारे चल रहा था काम ?

Sanitation system : संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 22 में से 7 मशीनें पहुंचीं ही नहीं, खराब मशीनों के सहारे चल रहा था काम
Sanitation system : संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 22 में से 7 मशीनें पहुंचीं ही नहीं, खराब मशीनों के सहारे चल रहा था काम

रीवा। संजय गांधी अस्पताल एवं गांधी मेमोरियल अस्पताल (जीएमएच) की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में सफाई के लिए स्वीकृत मशीनों और मौके पर उपलब्ध मशीनों के बीच कथित अंतर सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सफाई व्यवस्था के लिए कंपनी को बड़ी संख्या में मशीनें उपलब्ध करानी थीं, लेकिन स्वीकृत 22 मशीनों में से कथित तौर पर सात मशीनें अस्पताल पहुंची ही नहीं। वहीं उपलब्ध मशीनों में भी कई लंबे समय से खराब बताई जा रही हैं।

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और सांसद स्तर पर भी अस्पताल की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताए जाने की बात सामने आती रही है। अब मशीनों की उपलब्धता को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

22 मशीनें स्वीकृत, सात के अस्पताल पहुंचने पर सवाल

संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए संबंधित कंपनी को कुल 22 मशीनें उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से सात मशीनें अस्पताल परिसर में पहुंची ही नहीं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था का काम चलता रहा और संबंधित एजेंसी को भुगतान किए जाने का आरोप है।

यदि मशीनों की वास्तविक संख्या स्वीकृत संख्या से कम थी, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित अधिकारियों ने तीन वर्षों तक इस अंतर को क्यों नहीं पकड़ा। अस्पताल जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में मशीनों की उपलब्धता, उनकी स्थिति और उनके इस्तेमाल का रिकॉर्ड नियमित रूप से जांचे जाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में सात मशीनों का कथित तौर पर लंबे समय तक उपलब्ध नहीं होना व्यवस्था की निगरानी पर प्रश्न खड़ा करता है।

मामले में यह भी कहा जा रहा है कि अस्पताल में केवल 15 मशीनों के सहारे सफाई व्यवस्था संचालित की जा रही थी। यानी कागजों में स्वीकृत संख्या और मौके पर उपलब्ध मशीनों में अंतर बना रहा। अब जब इस संबंध में जानकारी सामने आने लगी है तो अस्पताल प्रशासन और संबंधित एजेंसी से मशीनों की खरीद, आपूर्ति, निरीक्षण और भुगतान का रिकॉर्ड सामने रखने की मांग उठ सकती है।

10 मशीनें खराब होने का दावा

मामला केवल सात मशीनों के अस्पताल नहीं पहुंचने तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अस्पताल में मौजूद 15 मशीनों में से भी करीब 10 मशीनें खराब पड़ी थीं। यदि यह स्थिति सही है तो सफाई व्यवस्था के लिए वास्तविक रूप से इस्तेमाल होने वाली मशीनों की संख्या बेहद कम रह जाती है।

तीन वर्षों तक खराब मशीनों के बावजूद सफाई व्यवस्था संचालित होने का दावा कई सवाल खड़े करता है। सफाई एजेंसी को निर्धारित मशीनरी के आधार पर काम करना था या नहीं, मशीनों का नियमित निरीक्षण किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी और खराब मशीनों को बदलने अथवा उनकी मरम्मत कराने की प्रक्रिया क्या थी—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक हो जाती है।

अस्पताल में सफाई केवल सौंदर्य व्यवस्था का विषय नहीं है। यह सीधे तौर पर मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। अस्पताल में संक्रमण रोकने के लिए फर्श, वार्ड, शौचालय, गलियारों और अन्य स्थानों की नियमित सफाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि सफाई के लिए आवश्यक मशीनें ही उपलब्ध न हों अथवा खराब पड़ी हों तो उसका असर अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।

तीन साल तक कैसे चलता रहा भुगतान?

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भुगतान व्यवस्था को लेकर है। आरोप है कि जिन मशीनों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं, उनके बावजूद संबंधित कंपनी को भुगतान किया जाता रहा। यदि अनुबंध में मशीनों की संख्या स्पष्ट रूप से निर्धारित थी, तो भुगतान से पहले यह जांचना जरूरी था कि एजेंसी ने सभी निर्धारित मशीनें उपलब्ध कराई हैं या नहीं।

यहां सवाल उठता है कि क्या हर महीने या निर्धारित अंतराल पर मशीनों का भौतिक सत्यापन किया गया? क्या निरीक्षण रिपोर्ट तैयार हुई? क्या मशीनों के सीरियल नंबर और उनकी कार्यशील स्थिति का रिकॉर्ड रखा गया? यदि निरीक्षण हुआ तो सात मशीनों के कथित तौर पर गायब होने और अन्य मशीनों के खराब होने की जानकारी रिकॉर्ड में क्यों नहीं आई?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित विभाग तथा अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

Sanitation system : संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 22 में से 7 मशीनें पहुंचीं ही नहीं, खराब मशीनों के सहारे चल रहा था काम
Sanitation system : संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 22 में से 7 मशीनें पहुंचीं ही नहीं, खराब मशीनों के सहारे चल रहा था काम

डॉ. सुनील अग्रवाल के कार्यकाल पर भी उठ रहे सवाल

मामले में पूर्व डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के कार्यकाल को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में संबंधित कंपनियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, किसी अधिकारी पर मिलीभगत या भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार करने से पहले दस्तावेजी जांच और संबंधित पक्ष का बयान आवश्यक है।

यदि जांच में यह साबित होता है कि निर्धारित मशीनें उपलब्ध नहीं थीं, फिर भी भुगतान जारी रहा, तो यह जानना जरूरी होगा कि भुगतान को मंजूरी देने वाले अधिकारी कौन थे और किस आधार पर भुगतान किया गया। इसी तरह यदि मशीनें लंबे समय तक खराब थीं तो उनकी मरम्मत या प्रतिस्थापन के लिए एजेंसी को नोटिस जारी किए गए थे या नहीं, इसका भी रिकॉर्ड जांच का हिस्सा होना चाहिए।

सफाई व्यवस्था पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

संजय गांधी अस्पताल क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है और यहां बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल की सफाई व्यवस्था को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। वार्डों, परिसर और अन्य हिस्सों में साफ-सफाई की स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाती हैं।

ऐसे में यदि सफाई एजेंसी के पास आवश्यक मशीनरी ही पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थी तो यह जांच का विषय है कि अस्पताल की सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कदम उठाए।

अस्पताल प्रबंधन के लिए यह भी आवश्यक है कि सफाई एजेंसी के काम की निगरानी केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर न हो, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए।

मशीनों के सत्यापन से सामने आ सकती है पूरी स्थिति

मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए सभी 22 मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है। प्रत्येक मशीन का नाम, मॉडल, सीरियल नंबर, खरीद अथवा आपूर्ति की तारीख, वर्तमान स्थान और कार्यशील स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में एजेंसी को किए गए भुगतान, बिलों, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुबंध की शर्तों और अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाण-पत्रों की जांच भी जरूरी होगी। यदि सात मशीनें वास्तव में अस्पताल नहीं पहुंचीं तो यह भी पता लगाना होगा कि उनके नाम पर कोई भुगतान हुआ या नहीं।

इसी प्रकार खराब पड़ी मशीनों के मामले में यह देखा जाना चाहिए कि वे कब से खराब हैं और उन्हें ठीक कराने के लिए एजेंसी ने क्या प्रयास किए। यदि अनुबंध के तहत मशीनों की मरम्मत या प्रतिस्थापन एजेंसी की जिम्मेदारी थी, तो संबंधित शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

मरीजों को मिलनी चाहिए बेहतर स्वच्छता व्यवस्था

संजय गांधी अस्पताल में आने वाला मरीज उपचार के साथ-साथ सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण की अपेक्षा करता है। अस्पताल में सफाई व्यवस्था कमजोर होने का असर सीधे मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ सकता है। इसलिए मशीनों की उपलब्धता और एजेंसी के भुगतान से जुड़े विवाद का जल्द से जल्द समाधान होना जरूरी है।

पूरे मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक होगा। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित एजेंसी और अधिकारियों को भी अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

फिलहाल 22 स्वीकृत मशीनों में से सात के अस्पताल नहीं पहुंचने और उपलब्ध मशीनों में से करीब 10 के खराब होने के दावे ने संजय गांधी अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन वर्षों तक यह व्यवस्था किस तरह संचालित हुई और संबंधित एजेंसी को किस आधार पर भुगतान किया गया, इसका जवाब जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।

YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q

YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews

Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/

Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c

अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।

Check Also

Search intensified : अंकित बालियान हत्याकांड: तीन आरोपी घोषित भगोड़े, एक-एक लाख रुपये का इनाम; मुख्य साजिशकर्ता समेत आरोपियों की तलाश तेज ?

Search intensified : अंकित बालियान हत्याकांड: तीन आरोपी घोषित भगोड़े, एक-एक लाख रुपये का इनाम; मुख्य साजिशकर्ता समेत आरोपियों की तलाश तेज ?

शामली। हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *