
हापुड़।
जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र के सिंभावली स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय राजपुर, ब्लॉक सिंभावली में बालिकाओं को आत्मरक्षा के विभिन्न कौशल सिखाए जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यालय की छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग, आत्मविश्वासी और सक्षम बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करने के साथ-साथ मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को केवल शारीरिक प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस विकसित करना भी है। प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं को यह समझाया जा रहा है कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय संयम और समझदारी से परिस्थितियों का सामना करना चाहिए।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं की सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए यह पहल संचालित की जा रही है। प्रशिक्षण में छात्राओं को आत्मरक्षा से जुड़े विभिन्न कौशलों की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें अपने आसपास के वातावरण के प्रति सजग रहने और आवश्यकता पड़ने पर मदद लेने के तरीकों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।
नई शिक्षा नीति 2020 में जीवन कौशल और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रहकर बच्चों को जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करना भी है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं को इसी प्रकार के जीवन कौशल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशिक्षक मनप्रीत खैरा ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण भारत सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों में छात्राओं के लिए संचालित किया जाने वाला निःशुल्क कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना और आपात परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा के लिए तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को विभिन्न आत्मरक्षा कौशल का अभ्यास कराया जाता है। बालिकाओं को अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने, संभावित खतरे को पहचानने और विपरीत परिस्थिति में उचित निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि छात्राओं के भीतर भय की भावना कम हो और वे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख सकें।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत है। किसी भी परिस्थिति में उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर परिवार, शिक्षक, पुलिस या अन्य विश्वसनीय लोगों से सहायता लेनी चाहिए।

डीसी बालिका शिक्षा पूजा सैनी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को अब केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से बालिकाओं में निडरता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होगी। शिक्षा के साथ सुरक्षा और जीवन कौशल की जानकारी मिलने से छात्राओं का आत्मविश्वास और मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालयों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इससे वे कठिन परिस्थितियों में अधिक आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने में सक्षम बन सकेंगी।
समग्र शिक्षा के अंतर्गत अब उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भी रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बालिकाओं को 48 कार्यदिवस का विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को नियमित अभ्यास कराया जाता है। इसका उद्देश्य उनकी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता को बढ़ाना है। छात्राओं को यह भी समझाया जाता है कि आत्मरक्षा का अर्थ केवल शारीरिक प्रतिक्रिया देना नहीं है, बल्कि खतरे को पहचानना, सुरक्षित स्थान की ओर जाना, समय पर सहायता मांगना और स्थिति के अनुसार उचित निर्णय लेना भी आत्मरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस पहल से विद्यालयों में बालिकाओं के बीच सुरक्षा और आत्मविश्वास को लेकर सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है। छात्राएं प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रही हैं और आत्मरक्षा के विभिन्न कौशल सीख रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं में अनुशासन, एकाग्रता और नियमित अभ्यास की भावना भी विकसित हो रही है।
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय में 10 प्रशिक्षित छात्राओं को शामिल करते हुए सेल्फ डिफेंस क्लब बनाए जाने की योजना है। इन क्लबों के माध्यम से विद्यालय स्तर पर आत्मरक्षा संबंधी जागरूकता को लगातार आगे बढ़ाया जा सकेगा। प्रशिक्षित छात्राएं अन्य छात्राओं को भी जागरूक करने में सहयोग कर सकेंगी।
सेल्फ डिफेंस क्लब विद्यालय में बालिकाओं के लिए एक ऐसा मंच बन सकते हैं, जहां वे आत्मरक्षा, सुरक्षा और जीवन कौशल से संबंधित गतिविधियों में भाग लेंगी। इससे प्रशिक्षण का प्रभाव केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य विद्यार्थियों तक भी पहुंच सकेगा।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण का नाम भी बालिकाओं को साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ता की प्रेरणा देता है। रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेकर छात्राओं को अपने जीवन में आत्मविश्वास और साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग की इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण को सरकारी विद्यालयों की छात्राओं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली बालिकाओं को समान रूप से प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। निःशुल्क प्रशिक्षण के माध्यम से अधिक से अधिक छात्राओं को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यालयों में इस तरह की गतिविधियों से अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। जब छात्राएं आत्मरक्षा और सुरक्षा से जुड़े कौशल सीखेंगी तो वे घर पर भी अपने परिवार के सदस्यों के साथ इन विषयों पर चर्चा कर सकेंगी। इससे समाज में बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता का दायरा बढ़ सकता है।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में भी सहायक हो सकता है। नियमित अभ्यास से उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और निर्णय क्षमता विकसित होती है। इन गुणों का उपयोग वे केवल आपात परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि शिक्षा और दैनिक जीवन में भी कर सकती हैं।
सिंभावली के उच्च प्राथमिक विद्यालय राजपुर में चल रहा यह प्रशिक्षण इसी व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है। यहां बालिकाओं को आत्मरक्षा के कौशल सिखाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं में उत्साह और सीखने की इच्छा दिखाई दे रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग का प्रयास है कि विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाएं शिक्षा के साथ-साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार हों। आत्मरक्षा प्रशिक्षण इसी सोच को आगे बढ़ाता है। बालिकाओं को मजबूत और आत्मविश्वासी बनाकर उन्हें अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग एवं सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि बेटियों को शिक्षा के साथ सुरक्षा और आत्मविश्वास का कौशल भी मिलना चाहिए। जब बालिकाएं स्वयं के प्रति सजग और आत्मविश्वासी होंगी, तो वे शिक्षा, खेल, सामाजिक गतिविधियों और अन्य क्षेत्रों में अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ सकेंगी।
इस प्रकार हापुड़ के सिंभावली स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय राजपुर में संचालित रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण बालिकाओं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 48 कार्यदिवस के विशेष प्रशिक्षण, विद्यालय स्तर पर सेल्फ डिफेंस क्लब और प्रशिक्षित छात्राओं की सहभागिता से इस अभियान को व्यापक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी बेटियों का निर्माण करना है जो जागरूक, आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और विपरीत परिस्थितियों में समझदारी से निर्णय लेने में सक्षम हों।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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