Service That Became an Example : रेडक्रॉस सोसाइटी फतेहपुर ने गंभीर मरीज को उपलब्ध कराया रक्त, मानवता की मिसाल बनी सेवा

जनपद फतेहपुर में मानवता और सामाजिक सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल उस समय देखने को मिली जब गंभीर रूप से बीमार एक मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाने का प्रयास किया गया। दिनांक 06 मई 2026 को प्रभाकांत तिवारी पुत्र राजाराम, निवासी ग्राम शाखा जनपद फतेहपुर, गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय फतेहपुर में भर्ती थे। चिकित्सकों के अनुसार उनका हिमोग्लोबिन मात्र 3.2 ग्राम रह गया था, जो सामान्य स्तर से बेहद कम और अत्यंत चिंताजनक स्थिति मानी जाती है। मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मरीज के पास कोई रक्तदाता उपलब्ध नहीं था। ऐसे कठिन समय में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया और मरीज को आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया।
जानकारी के अनुसार प्रभाकांत तिवारी और उनके परिजनों ने जिला चिकित्सालय फतेहपुर के रक्तकेंद्र के माध्यम से इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर के चेयरमैन डॉ अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने तुरंत सक्रियता दिखाई और रक्तकेंद्र में कार्यरत अशोक शुक्ल से बातचीत कर मरीज के लिए O पॉजिटिव रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित करवाई। समय रहते रक्त उपलब्ध हो जाने से मरीज के उपचार में तेजी लाई जा सकी और परिजनों ने राहत की सांस ली।
इस पूरी प्रक्रिया में रक्तकेंद्र के आजीवन सदस्य बृजकिशोर, कौशल श्रीवास्तव, पूजा तिवारी तथा अन्य स्टाफ सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने समन्वय बनाकर मरीज को आवश्यक सहायता पहुंचाई। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज सेवा और मानवता की भावना से लोग आगे आते हैं, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। रक्तदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान देने के समान है।
डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति के शरीर में हिमोग्लोबिन का स्तर पुरुषों में लगभग 13 से 17 ग्राम और महिलाओं में 12 से 15 ग्राम तक होना चाहिए। ऐसे में प्रभाकांत तिवारी का हिमोग्लोबिन 3.2 ग्राम होना बेहद खतरनाक स्थिति थी। इस अवस्था में मरीज को कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। समय पर रक्त न मिलने पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। इसलिए चिकित्सकों ने तत्काल रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी।
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर द्वारा किए गए इस सराहनीय कार्य की जिलेभर में प्रशंसा हो रही है। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने संस्था की तत्परता और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की संस्थाएं समाज में आशा और सहयोग का प्रतीक होती हैं। खासतौर पर उन लोगों के लिए, जिनके पास संकट की घड़ी में कोई सहारा नहीं होता। रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग करती हैं, बल्कि समाज में मानवता और परोपकार की भावना को भी मजबूत बनाती हैं।
डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान सबसे बड़ा महादान है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग रक्तदान को लेकर अनावश्यक डर या भ्रम पाल लेते हैं, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। रक्तदान करने से शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इससे समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद होती है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार अस्पतालों में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनके पास रक्तदाता नहीं होते। ऐसे समय में स्वैच्छिक रक्तदाता ही उनकी उम्मीद बनते हैं। यदि समाज में अधिक से अधिक लोग रक्तदान के प्रति जागरूक होंगे, तो किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में परेशान नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करती रहती है और जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत रहती है।
रक्तकेंद्र के सदस्यों ने बताया कि समाज में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग इससे दूर हैं। कई लोग केवल तब रक्तदान के महत्व को समझते हैं जब उनके परिवार या परिचितों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए जरूरी है कि समाज में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि लोग स्वेच्छा से रक्तदान के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में रक्तदान कर सकता है और इससे किसी प्रकार की कमजोरी या स्वास्थ्य हानि नहीं होती।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि सामाजिक संस्थाएं और स्वास्थ्य विभाग मिलकर किस प्रकार मानव सेवा का कार्य कर सकते हैं। यदि समय पर सहयोग और समन्वय हो, तो गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। प्रभाकांत तिवारी के परिवार ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर, रक्तकेंद्र के कर्मचारियों और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिजनों का कहना था कि संकट की इस घड़ी में संस्था ने जो सहयोग दिया, उसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।
अंत में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी फतेहपुर ने जिले के सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि सभी स्वस्थ लोग स्वेच्छा से रक्तदान करें और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आएं। रक्तदान केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। किसी भी व्यक्ति द्वारा किया गया छोटा सा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है। संस्था ने सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में ऐसे लोगों की वजह से ही मानवता जीवित है और जरूरतमंदों को नई उम्मीद मिलती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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