
फतेहपुर।
दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और एक-दूसरे के प्रति सहयोग की भावना को मजबूत करने का भी अवसर है। सभी उत्सव एकता और खुशी का संदेश देते हैं। मानव धर्म ही सर्वोपरि है और भारत में रहने वाले सभी लोग सबसे पहले भारतीय हैं। इसी विचारधारा को समाज में जागरूक करने और धर्म तथा जाति के आधार पर बनी संकीर्ण सोच को दूर करने के उद्देश्य से डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में एक सराहनीय सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी दीपमालिका उत्सव से पूर्व जरूरतमंद परिवारों तक खुशियां पहुंचाने की पहल की गई।
गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को प्रातः सात बजे समाजसेवी, फतेहपुर के चेयरमैन एवं इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी उत्तर प्रदेश के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंदों, दिव्यांगों, वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं को दीपावली की खुशियां बांटीं। इस दौरान कुल 19 लोगों को लाई, गट्टा, पट्टी, मिठाई और मोमबत्तियां वितरित की गईं। इस छोटी-सी पहल का उद्देश्य उन परिवारों के त्योहार में भी मिठास और रोशनी का अनुभव कराना था, जो आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पर्व की खुशियां पूरी तरह नहीं मना पाते।
कार्यक्रम के अंतर्गत राधानगर क्षेत्र में छह जरूरतमंद लोगों, बक्सपुर में आठ लोगों तथा सथरियांव में पांच लोगों को दीपावली सामग्री प्रदान की गई। इस प्रकार तीनों स्थानों को मिलाकर कुल 19 जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई गई। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने स्वयं इन क्षेत्रों में जाकर लोगों से मुलाकात की और उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं देते हुए सामग्री भेंट की। लाई, गट्टा, पट्टी और मिठाई जैसी पारंपरिक खाद्य सामग्री के साथ मोमबत्तियां देकर उनके घरों में भी दीपावली की रोशनी और उल्लास पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मानवता और सामाजिक समानता का दिया संदेश
इस अवसर पर डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि सभी त्योहारों का मूल उद्देश्य समाज में प्रेम, एकता, भाईचारे और खुशियों का प्रसार करना है। किसी भी उत्सव को केवल किसी एक धर्म या जाति तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग धर्मों, जातियों, भाषाओं और परंपराओं के लोग एक साथ रहते हैं। यही विविधता देश की विशेषता और ताकत है। यहां रहने वाले सभी लोग भारतवासी हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना ही सच्ची सामाजिक एकता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म है। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी निराश्रित व्यक्ति को सहारा देना और किसी असहाय परिवार की खुशियों में सहभागी बनना ही वास्तविक सेवा है। समाज में धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव करने वाली संकीर्ण मानसिकता को समाप्त करने की आवश्यकता है। जब तक समाज का प्रत्येक वर्ग एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील नहीं होगा, तब तक समानता और सद्भाव की भावना पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकती।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि दीपावली का पर्व अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है। ऐसे में यह जरूरी है कि त्योहार की खुशियां समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचें। आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को चाहिए कि वे अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंदों, दिव्यांगों, वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं की मदद के लिए आगे आएं। त्योहारों पर की गई छोटी-सी सहायता भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी खुशी का कारण बन सकती है।

पिछले वर्ष की परंपरा को इस बार भी रखा जारी
डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन की ओर से पिछले वर्ष भी दीपमालिका उत्सव से पहले इसी प्रकार जरूरतमंदों को त्योहार की सामग्री वितरित की गई थी। इस वर्ष भी उसी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन का उद्देश्य केवल सामग्री बांटना नहीं, बल्कि समाज के उन लोगों को यह एहसास कराना था कि वे अकेले नहीं हैं और त्योहार की खुशियों में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।
कार्यक्रम में वितरित की गई सामग्री भले ही मात्रा में सीमित रही हो, लेकिन इसके पीछे छिपी संवेदना और सेवा का भाव महत्वपूर्ण रहा। विशेष रूप से वृद्धजनों, दिव्यांगों और निराश्रित महिलाओं को सम्मानपूर्वक त्योहार की सामग्री उपलब्ध कराना सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना। ऐसे प्रयास समाज में सहयोग और अपनत्व की भावना को बढ़ावा देते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी निभाई सहभागिता
इस सेवा कार्यक्रम के दौरान सभासद अरुण यादव, राजोल सेन तथा प्रमुख सहयोगी सुरेश कुमार श्रीवास्तव और अभिनव श्रीवास्तव उपस्थित रहे। सभी ने जरूरतमंदों तक सामग्री पहुंचाने में सहयोग किया और सेवा कार्य के माध्यम से सामाजिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी इस बात पर जोर दिया कि त्योहारों की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग खुशी और सम्मान के साथ उन्हें मना सके।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजसेवा किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी लोगों की भागीदारी जरूरी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी एक जरूरतमंद परिवार की मदद करे, तो समाज में खुशियों और सकारात्मकता का दायरा काफी बढ़ सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि दीपावली सहित सभी त्योहारों को आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाएं। जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें तथा जरूरतमंदों की सहायता को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें। उनका कहना था कि देश की एकता और अखंडता तभी मजबूत होगी, जब नागरिकों के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और मानवता का भाव होगा।
इस प्रकार दीपमालिका उत्सव से पहले फतेहपुर में आयोजित यह छोटा-सा सेवा अभियान सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाला बना। 19 जरूरतमंदों को त्योहार की सामग्री देकर उनके जीवन में थोड़ी मिठास और रोशनी लाने का प्रयास किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि दीपावली के दीप तभी सार्थक हैं, जब उनकी रोशनी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर घर में खुशियों का उजाला हो।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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