
बांदा।
ग्राम पंचायत गुरेह, तहसील सदर के गरीब एवं भूमिहीन परिवारों की कृषि भूमि से जुड़े मामले को लेकर सद्भावना सेवा मंच ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। बुधवार, 12 अगस्त 2026 को संगठन के अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता राजा के नेतृत्व में पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर श्रेणी-3 के अंतर्गत आवंटित कृषि पट्टों की जांच कर पात्र लाभार्थियों के पट्टे बहाल किए जाने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने बताया कि ग्राम पंचायत गुरेह में अत्यंत गरीब और भूमिहीन परिवारों को लगभग 45 से 50 वर्ष पूर्व शासन एवं सरकार द्वारा श्रेणी-3 के अंतर्गत कृषि पट्टे आवंटित किए गए थे। इन परिवारों का कहना है कि पट्टे मिलने के समय भूमि कृषि योग्य स्थिति में नहीं थी। भूमिहीन मजदूरों ने अपने श्रम और मेहनत से इन जमीनों को कृषि योग्य बनाया तथा वर्षों से इन पर खेती करते हुए अपने परिवारों का पालन-पोषण करते आ रहे हैं।
संगठन के अनुसार, संबंधित पट्टाधारक परिवार लंबे समय से इन जमीनों पर काबिज हैं और खेती को अपनी आजीविका का प्रमुख साधन बनाए हुए हैं। इन परिवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके पास पट्टे की जमीन के अतिरिक्त अन्य कोई कृषियोग्य भूमि उपलब्ध नहीं है। उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है और अधिकांश परिवार मजदूरी एवं खेती के सहारे अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्तमान में प्रशासनिक अभिलेखों में श्रेणी-3 के अधिकांश पट्टों को बिना उचित जांच के बंजर, खलिहान, पंचायत भवन आदि के रूप में दर्ज कर दिया गया है। संगठन ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताते हुए कहा कि लंबे समय से जमीन पर खेती कर रहे गरीब परिवारों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
सद्भावना सेवा मंच ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ असामाजिक तत्वों के कथित उकसावे पर संबंधित लेखपाल द्वारा पट्टाधारकों की जमीन पर कब्जे से जुड़ी गतिविधियां कराए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। संगठन का आरोप है कि वृक्षारोपण के नाम पर इन खेतों में अन्य लोगों को कब्जा दिलाने की कथित कोशिश की जा रही है। इस स्थिति के कारण संबंधित गरीब परिवारों में चिंता और असुरक्षा का माहौल है।
संगठन ने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए। जिन परिवारों को वर्षों पहले शासन की ओर से श्रेणी-3 के तहत कृषि पट्टे आवंटित किए गए थे, उनके पुराने अभिलेखों, वर्तमान स्थिति और पात्रता की जांच की जाए। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले गरीब पट्टाधारकों की जमीन को नियमानुसार बहाल करने की कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि संबंधित परिवार लंबे समय से जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने अपने श्रम और संसाधनों से भूमि को कृषि योग्य बनाया और उसी के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण किया। ऐसे में यदि उनकी भूमि उनसे छिन जाती है तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है।
सद्भावना सेवा मंच ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि इस मामले में किसी भी पक्ष के प्रभाव में आए बिना राजस्व अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जाए। संगठन ने कहा कि गरीब और भूमिहीन परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ मामले का समाधान करना चाहिए।

ज्ञापन में विशेष रूप से मांग की गई कि ग्राम पंचायत गुरेह के जिन-जिन गरीब पट्टाधारकों के श्रेणी-3 के पट्टे निरस्त किए गए हैं, उनकी सूची तैयार की जाए। इसके बाद प्रत्येक पट्टाधारक की पात्रता और जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए। पात्र पाए जाने वाले परिवारों के पट्टे नियमानुसार बहाल करने की कार्रवाई की जाए।
संगठन का कहना है कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है। उनके पास कृषि पट्टों के अलावा जीविकोपार्जन के पर्याप्त साधन नहीं हैं। इसलिए जमीन से जुड़े मामले का जल्द समाधान होना जरूरी है, ताकि गरीब परिवारों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन से उनकी मांग किसी विवाद को बढ़ाने की नहीं, बल्कि दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के आधार पर निष्पक्ष समाधान कराने की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को वास्तव में सरकारी योजना के तहत पट्टे मिले थे और जो लंबे समय से भूमि पर खेती कर रहे हैं, उनकी स्थिति की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सद्भावना सेवा मंच ने प्रशासन से यह भी मांग की कि जमीन से संबंधित किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पट्टाधारकों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। पुराने राजस्व अभिलेखों, पट्टा आवंटन संबंधी दस्तावेजों और मौके पर भूमि की स्थिति का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार कई दशकों से इन जमीनों पर निर्भर हैं। खेती और मजदूरी के माध्यम से वे अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में जमीन से जुड़ा विवाद उनके लिए केवल संपत्ति का मामला नहीं, बल्कि आजीविका से जुड़ा गंभीर विषय है।
ज्ञापन में संगठन ने प्रशासन से आग्रह किया कि पूरे मामले की जांच राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए, जिससे किसी भी प्रकार की शिकायत या पक्षपात की संभावना न रहे। साथ ही मौके पर जाकर भूमि की स्थिति का सत्यापन करने की भी मांग की गई।
संगठन ने कहा कि गरीब परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनका नियमानुसार समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी पट्टे को निरस्त किया गया है तो उसके कारणों की भी स्पष्ट जानकारी संबंधित परिवारों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के प्रमुख महासचिव कुदरत उल्ला, कोषाध्यक्ष वृंदावन वैश्य, आरके समुद्र, निलेश श्रीवास, नेतराम वर्मा, अरविंद खटीक, अनमोल जड़िया, अर्जुन अनुरागी, पीयूष आनंद, रईस खान, किशन यादव, हिमांशु वैश्य, अमित नामदेव, गुलशन सोनी, सूरजवंशी, कमलेश, बाबूलाल, जग प्रसाद, भूननू, बिंदु कुमार, शिवप्रसाद, भगवानदीन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वे गरीब और भूमिहीन परिवारों की समस्याओं को प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिलाधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से जांच कराकर पात्र परिवारों को राहत प्रदान करेंगे।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की कि कई वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके दस्तावेजों की जांच की जाए। यदि जांच में पट्टे वैध और परिवार पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें नियमानुसार उनके अधिकार उपलब्ध कराए जाएं।
प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत ज्ञापन में यह भी कहा गया कि भूमि विवादों का समाधान रिकॉर्ड और कानून के अनुसार होना चाहिए। किसी भी गरीब परिवार को बिना उचित प्रक्रिया के उसकी आजीविका से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की मांग की।
कुल मिलाकर, ग्राम पंचायत गुरेह के गरीब पट्टाधारकों की भूमि से जुड़े मामले को लेकर सद्भावना सेवा मंच ने जिलाधिकारी से जांच और पट्टों की बहाली की मांग की है। संगठन ने कहा कि दशकों पहले आवंटित श्रेणी-3 के पट्टों की पात्रता और वर्तमान स्थिति की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। पात्र गरीब परिवारों को नियमानुसार राहत दी जाए और उनके आजीविका के साधन सुरक्षित किए जाएं। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन से मामले का शीघ्र और निष्पक्ष समाधान कराने की उम्मीद जताई है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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