The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया ?

The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया

The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया ?
The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया ?

मेरठ। सरकारी सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाले आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडे की चर्चा आज पूरे उत्तर प्रदेश में हो रही है। दिन में अपने घर की बनी हुई चार रोटियों और दाल का टिफिन लेकर सरकारी गाड़ी में चलने वाले और जून जैसे गर्म महीने में बिना एसी के मच्छरदानी में सोने वाले इस अधिकारी को उनकी ईमानदारी, साहस और समर्पण के लिए बेहद सराहा जा रहा है। मेरठ जैसे संवेदनशील जिले में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को न केवल पूरी निष्ठा से निभाया, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्मों से उदाहरण पेश किया।

अविनाश पांडे 2018 और 2019 में मेरठ में एसपी देहात के पद पर तैनात रहे। उनकी नियुक्ति के समय यह देखा गया कि अगले चुनाव और जिले में मौजूदा पुलिस व्यवस्था के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत थी जो मेरठ में लंबे समय तक कार्य कर सकें और जिले की परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ हों। शासन स्तर पर करीब 15 दिन पहले ही यह तय कर लिया गया था कि बरेली के मूल निवासी और मेरठ से सटे बड़ौत के रहने वाले एसएसपी अनुराग आर्य को मेरठ में तैनात नहीं किया जा सकता। इसके अलावा दूसरा नाम सतपाल अंकित का था, जो बागपत से सटे हरियाणा के गांव के रहने वाले थे। इस बार ऐसी स्थिति सामने आई कि आसपास के जिलों में ऐसे कोई अधिकारी नहीं थे जिनकी मेरठ से कनेक्शन हो, और ऐसे में अविनाश पांडे का चयन न केवल समझदारी भरा कदम था बल्कि जिले की सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

2019 में मेरठ और आसपास के जिलों में हुई एनआरसी हिंसा की घटनाओं के दौरान अविनाश पांडे की बहादुरी और नेतृत्व क्षमता ने कई लोगों का जीवन बचाया। हापुड़ रोड पर जब एक सीओ और एक प्रशासनिक अधिकारी समेत पीएसी के 35 जवानों को हिंसक भीड़ ने बंधक बना लिया, तब एसपी देहात रहे अविनाश पांडे ने पूरी धैर्य और सूझबूझ के साथ स्थिति को संभाला। उन्होंने न केवल बंधक बने जवानों और अधिकारियों को सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की, बल्कि हिंसा की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम भी उठाए। इस हिंसा के दौरान भूमिया पुल और हापुड़ रोड पर 6 लोगों की जान चली गई थी, लेकिन उनके कुशल नेतृत्व और समय पर उठाए गए कदमों के कारण कई और जानें बचाई जा सकीं।

अविनाश पांडे की पुलिस सेवा में बहादुरी केवल हिंसा नियंत्रण तक सीमित नहीं रही। उन्होंने आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की है। पीलीभीत में SP रहते हुए उन्होंने तीन आतंकवादियों को एनकाउंटर में ढेर किया। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि आतंकियों के मनोबल को भी तोड़ा। अविनाश पांडे की यह बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा उनके कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया ?
The criminals were killed : अविनाश पांडे ने मेरठ और पीलीभीत में साहस दिखाते हुए आतंकियों और अपराधियों को ढेर किया ?

योगी सरकार के लगभग नौ साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कई कुख्यात अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस दौरान न केवल आम अपराधियों को बल्कि ऐसे अपराधियों को भी एनकाउंटर में ढेर किया गया जिन्होंने समाज और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न किया था। अविनाश पांडे जैसी कर्तव्यनिष्ठ और साहसी अधिकारियों की भूमिका इस कार्रवाई में अहम रही है। उनके नेतृत्व में कई ऐसे अभियानों को अंजाम दिया गया जिनसे अपराधियों पर अंकुश लगा और आम नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा।

अविनाश पांडे का जीवन और कार्य शैली यह दिखाती है कि एक अधिकारी के लिए पद और प्रतिष्ठा से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है कर्तव्य और जनता की सुरक्षा। उन्होंने न केवल कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का पालन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि ईमानदारी और साहस के साथ कार्य करना ही सच्चे अधिकारी की पहचान है। दिन में साधारण भोजन और गर्मियों में बिना एसी के मच्छरदानी में सोने जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण उनके जीवन की साधारणता और अनुशासन को दिखाते हैं।

मेरठ और आसपास के जिलों में उनकी कार्यशैली और साहस की मिसाल दी जाती है। अधिकारी और आम लोग दोनों ही उनके निर्णय, कार्रवाई और नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा करते हैं। उनके कार्यकाल के दौरान जिले में अपराधियों और संगठित अपराधों पर नियंत्रण रखने में उल्लेखनीय सफलता मिली। एनआरसी हिंसा जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में उन्होंने स्थिति को स्थिर किया और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई की।

साथ ही, पीलीभीत में आतंकवादियों के एनकाउंटर ने भी यह साबित कर दिया कि अविनाश पांडे किसी भी चुनौती का सामना करने से पीछे नहीं हटते। उनका कार्य न केवल जिले बल्कि राज्य स्तर पर भी आदर्श माना जाता है। उनके प्रयासों और साहस ने आम जनता में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाया और यह संदेश दिया कि कानून व्यवस्था के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

अविनाश पांडे की कहानी यह भी दर्शाती है कि अच्छे अधिकारियों की मौजूदगी समाज और प्रशासन दोनों के लिए कितनी अहम होती है। कठिन परिस्थितियों में उनका धैर्य, साहस और समर्पण न केवल अपराधियों को चेतावनी देता है बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा भी दिलाता है। यह अनुभव यह भी बताता है कि निष्ठा, ईमानदारी और कर्मठता किसी भी प्रशासनिक चुनौती का सामना करने में सबसे बड़ा हथियार होती है।

अंत में, अविनाश पांडे जैसे अधिकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए गौरव का विषय हैं। उनके कार्य और साहस को देखकर नए अधिकारी और जवान प्रेरणा लेते हैं। उनके योगदान से यह स्पष्ट होता है कि कर्तव्यपरायणता, साहस और ईमानदारी के साथ किया गया काम समाज और प्रशासन दोनों के लिए स्थायी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। ऐसे अधिकारी न केवल अपराधियों के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज और कानून व्यवस्था के लिए सुरक्षा की गारंटी भी हैं।

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