The Glory of a Mother : मातृ दिवस पर “एक शाम मां के नाम” कवि सम्मेलन, मां की महिमा से गूंजा साहित्यिक मंच ?

The Glory of a Mother : मातृ दिवस पर “एक शाम मां के नाम” कवि सम्मेलन, मां की महिमा से गूंजा साहित्यिक मंच

The Glory of a Mother : मातृ दिवस पर “एक शाम मां के नाम” कवि सम्मेलन, मां की महिमा से गूंजा साहित्यिक मंच
The Glory of a Mother : मातृ दिवस पर “एक शाम मां के नाम” कवि सम्मेलन, मां की महिमा से गूंजा साहित्यिक मंच

श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम के अंतर्राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ द्वारा पिलखुवा में मातृ दिवस के अवसर पर “एक शाम मां के नाम” विषय पर एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूरी तरह मां की ममता, त्याग, प्रेम और करुणा को समर्पित रहा, जिसमें देशभर से आए कवि और कवयित्रियों ने अपनी भावनात्मक रचनाओं से वातावरण को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री बीना गोयल ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। उन्होंने भावपूर्ण स्वर में कहा कि “प्यार, दया, श्रद्धा और करुणा की मूरत लगती मेरी मां”, जिससे पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी इस प्रस्तुति ने सभी श्रोताओं को भावुक कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री चंद्रकला शर्मा द्वारा मां शारदे की वंदना के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक और साहित्यिक ऊर्जा का संचार हुआ। वंदना के साथ ही मंच पर उपस्थित सभी कवियों ने मां सरस्वती और मातृशक्ति को नमन किया।

इस आयोजन में संस्था के संस्थापक कवि अशोक गोयल चक्रवर्ती का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में मातृ दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक प्रभावशाली रचना प्रस्तुत की, जिसने पूरे मंच को भावुक कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर उपस्थित श्रोताओं ने देर तक तालियां बजाईं।

कार्यक्रम के दौरान दो विशिष्ट रचनाकारों को विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया। शशि कला पाण्डेय (छत्तीसगढ़) को “अंतर्राष्ट्रीय मदर टेरेसा सम्मान 2026” तथा आंचल जैन (मध्य प्रदेश) को “स्वर कोकिला सरोजिनी नायडू सेवा श्री सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने पूरे कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन आंचल जैन (मध्य प्रदेश) और संध्या श्रीवास्तव “साँझ” द्वारा किया गया। दोनों संचालिकाओं ने अपने प्रभावशाली संचालन से पूरे कार्यक्रम को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया और श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।

कवि सम्मेलन में देशभर से आए रचनाकारों ने मां के विभिन्न रूपों—ममता, त्याग, बलिदान और प्रेरणा—को अपनी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। हर रचना में मां के प्रति गहरी भावनाओं का प्रतिबिंब दिखाई दिया। मंच पर प्रस्तुत एक-से-बढ़कर-एक रचनाओं ने श्रोताओं को भावुक और प्रेरित किया।

The Glory of a Mother : मातृ दिवस पर “एक शाम मां के नाम” कवि सम्मेलन, मां की महिमा से गूंजा साहित्यिक मंच
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इस भव्य आयोजन में अनेक प्रतिष्ठित कवि और कवयित्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें आंचल जैन (मध्य प्रदेश), डॉ. मधु स्वामी (गाजियाबाद), चंद्रकला दुबे (डिंडोरी, मध्य प्रदेश), रजनी सिंह (गाजियाबाद), डॉ. ममता सूद (कुरुक्षेत्र), शालिनी श्रीवास्तव (गोरखपुर), सरिता श्रीवास्तव (जोधपुर), राजेश्वरी बाजपेई (जबलपुर), रीता गुगलानी (फरीदाबाद), आशा शर्मा (इंदौर), संध्या श्रीवास्तव (छतरपुर), ज्योति वर्णवाल (नवादा), स्नेह लता भारती (गाजियाबाद), ममता गुप्ता (बाराबंकी), सुनीति केशरवानी (प्रयागराज), डॉ. शशि जायसवाल (प्रयागराज), ऊषा सूद (दिल्ली), संगीता शुक्ला (प्रयागराज), ज्योत्स्ना चोपड़ा (अहमदाबाद), डॉ. ऋचा शर्मा श्रेष्ठा (करनाल), हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा (कोलकाता), श्वेता कुमारी चौबे (बिहार), वैशाली रस्तोगी और कल्पना सचदेव शामिल रहीं।

कार्यक्रम में सभी कवियों ने मातृशक्ति को समर्पित रचनाएं प्रस्तुत कर मां के महत्व को रेखांकित किया। कहीं मां को जीवन की प्रथम गुरु बताया गया तो कहीं उसे त्याग और प्रेम की सजीव प्रतिमा कहा गया।

श्रोताओं ने हर प्रस्तुति पर तालियों से कवियों का उत्साहवर्धन किया। पूरा सभागार मां के प्रति भावनात्मक ऊर्जा और साहित्यिक रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम के दौरान कई क्षण ऐसे आए जब श्रोता भावुक हो उठे और वातावरण पूरी तरह भावनात्मक हो गया।

आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक चेतना और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित यह कवि सम्मेलन मां के सम्मान और उसकी महिमा को समर्पित एक सफल प्रयास रहा।

कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों और अतिथियों ने एक स्वर में मां के सम्मान और उसके त्याग को जीवन का सर्वोच्च मूल्य बताते हुए समाज में मातृ सम्मान की भावना को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

यह भव्य आयोजन साहित्य, संस्कृति और भावनाओं का एक ऐसा संगम बन गया, जिसने “मां” को शब्दों से परे एक जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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